अनार की खेती कैसे करें

अनार  की खेती कैसे करें

अनार का पौधा तीन-चार साल में पेड़ बनकर फल देने लगता है और एक पेड़ करीब 25 वर्ष तक फल देता है। साथ ही अब तक के अनुसंधान के मुताबिक प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए अगर दो पौधों के बीच की दूरी को कम कर दिया जाए तो प्रति पेड़ पैदावार पर कोई असर नहीं पड़ता है। लेकिन ज्यादा पेड़ होने के कारण प्रति हैक्टेयर उत्पादन करीब डेढ़ गुना हो जाता है। परंपरागत तरीके से अनार के पौधों की रोपाई करने पर एक हैक्टेयर में 400 पौधे ही लग पाते हैं जबकि नए अनुसंधान के अनुसार पांच गुणा तीन मीटर में अनार के पौधों की रोपाई की जाए तो पौधों के फलने-फूलने पर कोई असर नहीं पड़ेगा और एक हैक्टेयर में छह सौ पौधे लगने से Read More : अनार की खेती कैसे करें about अनार की खेती कैसे करें

केले की खेती

केले की खेती

जलवायु-भूमि

केला की खेती के लिए गर्मतर एवं समजलवायु उत्तम होती है अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में केले की खेती सफल रहती है। जीवंशयुक्त दोमट, मटियार दोमट भूमि, जिससे जल निकास उत्तम हो, उपयुक्त मानी जाती है।

खेती की तैयारी 

समतल खेत को चार-पांच गहरी जुताई करके भुरभुरा बना लेना चाहिए। खेत की तैयारी करने के बाद समतल खेत में लाइनों में गड्ढे तैयार करके रोपाई की जाती है। केले की रोपाई के लिए खेत की तैयारी के बाद लाइनों में गड्ढे 1.5 मीटर लम्बे, 1.5 मीटर चौड़े गहरा खोद कर छोड़ दें, जिससे धूप लग जाए। 

पौधरोपण  Read More : केले की खेती about केले की खेती

लौकी के खेत की तैयारी करें इस प्रकार

लौकी की खेती करने के उन्नत तरीके

वैसे तो लौकी की फसल हर प्रकार की भूमि में हो सकती है लेकिन उचित जल निकास युक्त प्रचुर जीवांश से युक्त दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे उत्तम है | इसके लिए भूमि का Ph उदासीन होना चाहिए, उदासीन का मतलब ना अम्लीय और ना ही छारीय होना चाहिए अर्थात 6.5 से 7.5 बीच में होना चाहिए | Read More : लौकी के खेत की तैयारी करें इस प्रकार about लौकी के खेत की तैयारी करें इस प्रकार

मलेरिया के लक्षणऔर उपाय

प्लाज्मोडियम' नाम के पैरासाइट से होने वाली बीमारी है मलेरिया। यह मादा 'एनोफिलीज' मच्छर के काटने से होता है जो गंदे पानी में पनपते हैं। ये मच्छर आमतौर पर सूर्यास्त के बाद काटते हैं। मलेरिया के मच्छर रात में ही ज्यादा काटते हैं। कुछ केसेज में मलेरिया अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। ऐसे में बुखार ज्यादा ना होकर कमजोरी होने लगती है और एक स्टेज पर पेशंट को हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, जिससे वह अनीमिक हो जाता है।
  Read More : मलेरिया के लक्षणऔर उपाय about मलेरिया के लक्षणऔर उपाय

मूंगफली की खेती कब और कैसे

 मूंगफली की खेती कब और कैसे

 मूंगफली खरीफ और जायद दोनों मौसम की फसल है, मूंगफली की फसल हवा और बारिश से मिट्टी कटने से बचाती है। खरीफ की आपेक्षा जायद में कीट और बीमारियों का प्रकोप कम होता है। प्रदेश में यह झांसी, हरदोई, सीतापुर, खीरी, उन्नाव, बरेली, बदायूं, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, मुरादाबाद, और सहारनपुर के अधिक क्षेत्रफल में उगाई जाती हैI Read More : मूंगफली की खेती कब और कैसे about मूंगफली की खेती कब और कैसे

रागों का विभाजन

रागों का विभाजन

किसी भी राग में अधिक से अधिक सात व कम से कम पाँच स्वरों का प्रयोग करना आवश्यक है। इस तरह रागों को मूलत: तीन जातियों में विभाजित किया जा सकता है-

औडव जाति - जहाँ राग विशेष में पाँच स्वरों का प्रयोग होता हो। 
षाडव जाति - जहाँ राग में छ: स्वरों का प्रयोग होता हो।
संपूर्ण जाति - जहाँ राग में सभी सात स्चरों का प्रयोग किया जाता हो। Read More : रागों का विभाजन about रागों का विभाजन

रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है।

रागों की उत्पत्ति

हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है । रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। थाटों की संख्या गणित की दृष्टि से ‘72’ मानी गयी है किन्तु आज मुख्यतः ‘10’ थाटों का ही क्रियात्मिक प्रयोग किया जाता है जिन के नांम हैं बिलावल, कल्याण, खमाज, भैरव, भैरवी, काफी, आसावरी, पूर्वी, मारवा और तोडी हैं। प्रत्येक राग विशिष्ट समय पर किसी ना किसी विशिष्ट भाव (मूड – थीम) का घोतक है। राग शब्द सँस्कृत के बीज शब्द ‘रंज’ से लिया गया है। अतः प्रत्येक राग में स्वरों और उन के चलन के नियम हैं जिन का पालन करना अनिवार्य है अन्यथ्वा आपेक्षित भाव का सर्जन नहीं हो सकता। हिन्दूस्तानी संगीत में प्रत्येक राग अपने निर्धारि Read More : रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। about रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है।

भारतीय कलाएँ

भारतीय कलाएँ

ीड़ा कला · वीणाडमरूकवाद्य कला · प्रहेलिका कला · प्रतिमाला कला · दुर्वाचकयोग कला · पुस्तक-वाचन कला · नाटकाख्यायिका-दर्शन कला · काव्य समस्यापूरण कला · पट्टिकावेत्रवानविकल्प कला · तक्षकर्म कला · तक्षण कला · वास्तुविद्या कला · रूप्यरत्नपरीक्षा कला · धातुवाद कला · मणिरागाकर ज्ञान कला · वृक्षायुर्वेदयोग कला · मेषकुक्कुटलावकयुद्धविधि कला · शुकसारिका प्रलापन कला · उत्सादन-संवाहन केशमर्दनकौशल कला · अक्षरमुष्टि कला · म्लेच्छित विकल्प कला · देशभाषा-विज्ञान कला · पुष्पशकटिका कला · निमित्तज्ञान कला · यन्त्र मातृका कला · धारणमातृका कला · संपाठ्य कला · मानसी काव्य-क्रिया कला · अभिधानकोष कला · छन्दोज्ञान क Read More : भारतीय कलाएँ about भारतीय कलाएँ

करने की बीमारी

करने की बीमारी

“पहले, कृत्य की प्रकृति और उसमें छिपे प्रवाह को समझना होगा, अन्यथा विश्रान्ति सम्भव नहीं है। यदि फिर भी तुम विश्रान्त होना चाहते हो, यह असम्भव होगा यदि तुम ने कृत्य की प्रकृति को ध्यान से नहीं देखा होगा, ध्यान नहीं रखा होगा, वास्तव में साकार होते नहीं देखा होगा, क्योंकि कृत्य साधारण घटना नहीं है।

 

बहुत से लोग विश्रान्त होना चाहते है, लेकिन वे विश्रान्त नहीं हो पाते। विश्रान्ति एक फूल खिलने के समान है: तुम इसे मजबूर नहीं कर सकते। तुम्हें पूरी घटना को समझना होगा। तुम इतने सक्रिय क्यों हो, सक्रियता की इतनी आतुरता क्यों, इसके लिए इतना पागलपन क्यों?

  Read More : करने की बीमारी about करने की बीमारी

व्यस्त लोगों के लिये ध्यान

लिये ध्यान

पहला चरण : दूसरे का अवलोकन करो

"बैठ जायें और एक दूसरे की आखों में देखें (बेहतर होगा पलकें कम से कम झपकें, एक कोमल टकटकी) बिना सोचे गहरे, और गहरे देखें।

 

"यदि आप सोचते नहीं, यदि आप केवल आंखों के भीतर टकटकी लगाकर देखते हैं तो शीघ्र ही तरंगें विलीन हो जायेंगी और सागर प्रकट होगा। यदि आप आंखों में गहरे देख सकते हैं तो आप अनुभव करेंगे कि व्यक्ति विलीन हो गया है, मुखड़ा मिट गया। एक सागरीय घटना पीछे छिपी है और यह व्यक्ति बस उस गहराई का लहराना था, कुछ अनजाने की, कुछ छुपे हुए की एक तरंग।"

  Read More : व्यस्त लोगों के लिये ध्यान about व्यस्त लोगों के लिये ध्यान

Pages

जवाब विशेषज्ञ से लें

Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
  • सेक्स टाइम कैसे बढ़ाएं
  • लिंग का साइज कैसे बढ़ाएं
  • लिंग को बड़ा लम्बा और मोटा करने के घरेलू उपाय
  • सेक्स की फीलिंग को कैसे बढ़ाए
  • ओरल सेक्स कैसे करें

इस प्रकार सवालों का जवाब विशेषज्ञ से लें

सलाह शुल्क ₹500 है जिसमें आप हर सप्ताह व्हाट्सएप पर बात करके अपनी समस्या को व्यवस्थित तरीके से हल कर सकते हैं

A/c Name: Pradeep Kumar
A/c No: 5547297104
IFSC : kkbk0005321
Bank: Kotak Mahindra Bank

 
1 Start 2 Complete
Files must be less than 2 MB.
Allowed file types: gif jpg jpeg png bmp tif pict txt rtf pdf doc docx.