पोषाहार क्या है जानिए

पोषाहार करें इस प्रकार 

मोटे अनाज और उनके पोषक तत्व 

जनसंख्या विस्फोट और भोजन की मांग हमेशा साथ-साथ चलते हैं। पारंपरिक रूप से हम कई प्रकार के मोटे अनाज खाते हैं। शहरी जीवन द्वारा संतुलित आहार के अर्थ के बदलने से मोटे अनाज की उपयोगिता को हमारे देश में ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के अनुरूप संशोधित किया गया है।

हरी सब्जियों का महत्व

यह भाग हरी सब्जी की विशेषता हरी पत्तीदार सब्जियों का पौष्टिक रूप से महत्व और रक्त में मधुमेह एवं कोलेस्टेरॉल के स्तर को घटाने के लिए मेथी के दानों का प्रयोग के महत्व के बारे में बताता है। Read More : पोषाहार क्या है जानिए about पोषाहार क्या है जानिए

लोबिया की खेती कैसे करें

लोबिया की खेती कैसे करें

लोबिया (काऊपीज) की फसल कम समय, कम शक्ति तथा कम धन में अधिक लाभ देती है। पंजाब तथा कई अन्य राज्यों में यह फसल पहले से अधिक मात्रा में बोइ जाने लगी है। यह फसल गर्मी की ऋतु में फरवरी तथा जून-जुलाई को बोइ जाती है। यह फसल 45-50 दिन में पककर तैयार हो जाती है।

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गाजर की उन्नत क़िस्में

गाजर की उन्नत क़िस्में

गाजर हमारे शरीर के लिए अनेक प्रकार से लाभकारी हैं। इसमें बीटा केरोटीन पाया जाता हैं जो ‘विटामिन ए’ में बदल जाता हैं। इसमें कैंसर दूर करने के गुण पाए जाते हैं। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता हैं और यह कोशिकओं को नष्ट होने से रोकता हैं, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता हैं। यह शरीर की रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता हैं और टॉनिक की तरह कार्य करता हैं।
पूसा मेघाली 
यह नारंगी गूदे, छोटी टॉप तथा कैरोटीन की अधिक मात्रा वाली संकर प्रजाति है। इसकी फ़सल बुवाई से 100-110 दिन में तैयार हो जाती है।
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बोने से पहले ही आप पानी और नमक के घोल से

बोने से पहले ही आप पानी और नमक के घोल से

प्रमाणित बीज को भी बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा आधार बीज से पैदा कराया जाता है। यह कार्य प्रत्येक वर्ष म.प्र. राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम या उन्नतशील किसानों द्वारा बीज पैदा करने की मानक विधियों के अनुसार किया जाता है। प्रमाणित बीज के थैलों पर नीले रंग का लेबिल लगा रहता है। प्रमाणित बीज को किसानों द्वारा व्यावसायिक फसल के उत्पादन के लिये उपयोग में लाया जाता है।
(ब) बीज शुद्धता व अंकुरण परीक्षण:-
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अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार

देश में दलहन की पैदावार न बढ़ने से दालों के आयात पर हमारी निर्भरता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में दलहनों की पैदावार बढ़ाने लिए अधिक उपज वाली किस्में विकसित करना जरूरी है। इसे देखते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जेनेटिक और प्लांट ब्रीडिंग विभाग ने मूंग की अधिक उपज वाली मालवीय जनकल्याणी (एचयूएम 16) नई किस्म विकसित की है। इस किस्म की खासियत है कि यह महज दो माह में पककर तैयार हो जाती है। किसान इसकी बुवाई गेहूं की कटाई के बाद यानी अप्रैल माह में भी कर सकते हैं। जिससे बरसात से पहले इसकी कटाई की जा सके। इस तरह इस किस्म की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। इसके अलावा इस किस्म में अन्य किस्मों के Read More : अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार about अधिक उपज देने वाली मूंग की किस्म तैयार

रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत

रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत

मनमोहन मन में हो तुम्ही -कैसे कहूंअदाना अदाना
चाह बर्बाद करेगी – शाहजहां बागेश्री बागेश्री
शुभ घड़ी आई रे- बागेश्री बागेश्री
दीवाने तुम कि दीवाने हम -बागेश्री बागेश्री
जा रे बेईमान तुझे जन लिया- बागेश्री बागेश्री
बेदर्दी हुआ बलमा -बागेश्री बागेश्री
दगाबाज्ज तू नहीं बलमा मोरा बागेश्री
राधा ना बोले ना बोले आजाद बागेश्री बागेश्री
जाग दर्द ए इश्क जाग- अनारकली बागेश्री बागेश्री
चमन में रंग ए बहार उतरा तो मैंने देखा – ग़ज़ल गुलाम अली बागेश्री बागेश्री
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स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई है। ‘स्वन’ शब्द के लिए अंग्रेजी में ‘Phone’ शब्द है। ध्वनि का लघुत्तम अनुभवगम्य विच्छिन्न खण्ड स्वन विज्ञान में ‘स्वन’ कहलाता है। ‘ध्वनि’ शब्द संस्कृत ‘ध्वन्’ (आवाज करना, शब्द करना) धातु के साथ इण (इ) प्रत्यय संम्पृक्त करने से बनता है। इसका अर्थ होता है-‘आवाज’ या ‘आवाज करना’। व्यक्ति जब बोलता है, तो उसके मुख-विवर से वायु निकलती है जो वागेन्द्रिय के माध्यम से कुछ वाणी (आवाज) प्रकट करती है, उसी को ‘ध्वनि’ कहा जाता है। संस्कृत में उसके लिए ध्वन और ध्वनन तथा स्वन और स्वनन शब्दों का प्रयोग किया गया है। किंतु सभी का आशय एक ही है। डॉ. Read More : स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? about स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ?

क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने?

Vani Jairam

गुलजार की फिल्म मीरा भले ही सफल नहीं रही लेकिन उसका संगीत लाजवाब था. सत्तर का दशक आते-आते गुलजार साहब का फिल्म इंडस्ट्री में काफी नाम हो चुका था. बतौर गीतकार वो तमाम हिट फिल्में दे चुके थे. खामोशी, आनंद, बावर्ची जैसी कामयाब फिल्मों के डायलॉग्स भी गुलजार साहब की कलम से ही निकले थे. उनके पास फिल्मों से जुड़े तमाम पहलुओं का तजुर्बा हो चुका था. इसी दशक में उन्होंने फिल्म निर्देशन भी शुरू किया था. Read More : क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने? about क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने?

संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

किस तरह का संगीत एक किशोर चुनता है उससे उसके व्यक्तित्व का पता चलता है। शोध कार्य से पता चला है की कई तरह के संगीत का किशोर के दिमाग पर असर पड़ता है जैसे: Read More : संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है? about संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

ध्यान : संतुलन ध्यान

ध्यान : संतुलन ध्यान

लाओत्से के साधना-सूत्रों में एक गुप्त सूत्र आपको कहता हूं, जो उसकी किताबों में उलेखित नहीं है, लेकिन कानों-कान लाओत्से की परंपरा में चलता रहा है। वह सूत्र है लाओत्से की ध्यान की पद्धति का। वह सूत्र यह है।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
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