करने की बीमारी
Submitted by vasna on 2 August 2019 - 12:55pm“पहले, कृत्य की प्रकृति और उसमें छिपे प्रवाह को समझना होगा, अन्यथा विश्रान्ति सम्भव नहीं है। यदि फिर भी तुम विश्रान्त होना चाहते हो, यह असम्भव होगा यदि तुम ने कृत्य की प्रकृति को ध्यान से नहीं देखा होगा, ध्यान नहीं रखा होगा, वास्तव में साकार होते नहीं देखा होगा, क्योंकि कृत्य साधारण घटना नहीं है।
बहुत से लोग विश्रान्त होना चाहते है, लेकिन वे विश्रान्त नहीं हो पाते। विश्रान्ति एक फूल खिलने के समान है: तुम इसे मजबूर नहीं कर सकते। तुम्हें पूरी घटना को समझना होगा। तुम इतने सक्रिय क्यों हो, सक्रियता की इतनी आतुरता क्यों, इसके लिए इतना पागलपन क्यों?




