रात में बार-बार भूख लगने की आदत, इस गंभीर बीमारी का है संकेत

भूख लगना आमतौर पर एक शारीरिक क्रिया है, जो किसी भी समय लग सकती है। खासकर सुबह, दोपहर और शाम को हर किसी को भूख लगती है। क्‍योंकि यही हमारे खाने का सही समय होता है। लेकिन कभी-कभी यही भूख किसी बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। अगर आपको रात में बार-बार उठ-उठकर कुछ ना कुछ खाने की आदत है तो यह ईटिंग सिंड्रोम जैसी खतरनाक बीमारी का संकेत है।

क्‍या है ईटिंग सिंड्रोम Read More : रात में बार-बार भूख लगने की आदत, इस गंभीर बीमारी का है संकेत about रात में बार-बार भूख लगने की आदत, इस गंभीर बीमारी का है संकेत

मिट्टी का पीएच और पोषक तत्वों की उपलब्धता

मिट्टी का पीएच और पोषक तत्वों की उपलब्धता

pH क्या होता है ?

अगर मिट्टी का pH 0-7 होता है तो मिट्टी को acidic मिट्टी मे कहा जाता है और अगर मिट्टी का pH 7 से लेकर 14 हो तो उसे besic मिट्टी कहा जाता है। उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में आम तौर पर अम्लीय (acidic) मिट्टी होती है, जबकि सीमित वर्षा वाले क्षेत्रों में आम तौर पर क्षारीय (alkaline) भूमि होती है। सेब के पेड़ 6.5 के पीएच वाली, थोड़ी अम्लीय मिट्टी पसंद करते हैं, इसलिए मिट्टी का पीएच 6.5 समायोजित करना आवश्यक होता है।

हम कैसे मिट्टी का पीएच माप सकते हैं? Read More : मिट्टी का पीएच और पोषक तत्वों की उपलब्धता about मिट्टी का पीएच और पोषक तत्वों की उपलब्धता

आलू की वैज्ञानिक खेती करें और लाखो कमायें

आलू एक अर्द्धसडनशील सब्जी वाली फसल है। इसकी खेती रबी मौसम या शरदऋतु में की जाती है। इसकी उपज क्षमता समय के अनुसार सभी फसलों से ज्यादा है इसलिए इसको अकाल नाशक फसल भी कहते हैं। इसका प्रत्येक कंद पोषक तत्वों का भण्डार है, जो बच्चों से लेकर बूढों तक के शरीर का पोषण करता है। अब तो आलू एक उत्तम पोष्टिक आहार के रूप में व्यवहार होने लगा है। बढ़ती आबादी के कुपोषण एवं भुखमरी से बचाने में एक मात्र यही फसल मददगार है।

खेत का चयन Read More : आलू की वैज्ञानिक खेती करें और लाखो कमायें about आलू की वैज्ञानिक खेती करें और लाखो कमायें

जायफल की खेती कैसे करें

जायफल की खेती कैसे करें

जायफल (संस्कृत: जातीफल) एक सदाबहार वृक्ष है जो इण्डोनेशिया के मोलुकास द्वीप (Moluccas) का देशज है। इससे दो मसाले प्राप्त होते हैं - जायफल (nutmeg) तथा जावित्री (mace)। यह चीन, ताइवान, मलेशिया, ग्रेनाडा, केरल, श्रीलंका, और दक्षिणी अमेरिका में खूब पैदा होता है। मिरिस्टिका नामक वृक्ष से जायफल तथा जावित्री प्राप्त होती है। मिरिस्टका की अनेक जातियाँ हैं परंतु व्यापारिक जायफल अधिकांश मिरिस्टिका फ्रैग्रैंस से ही प्राप्त होता है। मिरिस्टिका प्रजाति की लगभग ८० जातियाँ हैं, जो भारत, आस्ट्रेलिया तथा प्रशंत महासागर के द्वीपों में उपलब्ध हैं। यह पृथग्लिंगी (डायोशियस, dioecious) वृक्ष है। इसके पुष्प छोटे Read More : जायफल की खेती कैसे करें about जायफल की खेती कैसे करें

कैसे करें आम की खेती

कैसे करें आम की खेती

परिचय

आम की खेती लगभग पूरे देश में की जाती हैI यह मनुष्य का बहुत ही प्रीय फल मन जाता है इसमे खटास लिए हुए मिठास पाई जाती हैI जो की अलग अलग प्रजातियों के मुताबिक फलो में कम ज्यादा मिठास पायी जाती हैI कच्चे आम से चटनी आचार अनेक प्रकार के पेय के रूप में प्रयोग किया जाता हैI इससे जैली जैम सीरप आदि बनाये जाते हैI यह विटामीन ए व् बी का अच्छा श्रोत हैI

जलवायु और भूमि Read More : कैसे करें आम की खेती about कैसे करें आम की खेती

गेंदा की खेती इनकम का अच्छा स्रोत

गेंदा के कुछ प्रजातियों जैसे- हजारा और पांवर प्रजाति की फसल वर्ष भर की जा सकती है. एक फसल के खत्म होते ही दूसरी फसल के लिए पौध तैयार कर ली जाती है. इस खेती में जहां लागत काफी कम होती हैं, वहीं आमदनी काफी अधिक होती है. गेंदा की फसल ढाई से तीन माह में तैयार हो जाती है. इसकी फसल दो महीने में प्राप्त की जा सकती है. यदि अपना निजी खेत हैं तो एक बीघा में लागत एक हजार से डेढ़ हजार रुपये की लगती है, वहीं सिंचाई की भी अधिक जरूरत नहीं होती. मात्र दो से तीन सिंचाई करने से ही खेती लहलहाने लगती है, जबकि पैदावार ढाई से तीन कुंटल तक प्रति बीघा तक हो जाती है. Read More : गेंदा की खेती इनकम का अच्छा स्रोत about गेंदा की खेती इनकम का अच्छा स्रोत

जैंविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है?

मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने वाले रसायनिक उर्वरक काफी महंगे होते हैं और इनका उत्पादन अनवीकरणीय पेट्रोलियम फीडस्टॉक से किया जाता है जो धीरे-धीरे कम हो रहा है। रसायनिक खादों का निरंतर उपयोग मृदा के लिए हानिकारक होता है। उदाहरण के लिए, नाइट्रोजनी खाद यूरिया का अत्यधिक उपयोग मृदा की संरचना को नष्ट कर देता है। इस प्रकार मृदा, वायु और जल जैसे अपरदनकारी कारकों से क्षरण के प्रति संवेदनशील हो जाती है। रसायनिक खादें सतह और भूमिगत जल प्रदूषण के लिए भी उत्तरदायी होती हैं। इसके अतिरिक्त, नाइट्रोजनी खादों के प्रयोग से फसलोंं पर रोग और नाशीजीवों के प्रकोप की भी संभावना रहती है। रसायनिक खादों के निरंतर प Read More : जैंविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है? about जैंविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है?

खरबूजा की खेती करें और भी उन्नत तरीके से जानें इसको किस प्रकार करना चाहिए

खरबूजा की खेती करें और भी उन्नत तरीके से जानें इसको किस प्रकार करना चाहिए

नदियों के किनारे कछारी भूमि में खरबूजे की खेती की जाती है मैदानी क्षेत्रों में उचित जल निकास वाली रेतीली दोमट भूमि सर्वोतम मानी गई है पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें इसके बाद 2-3 बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएँ |

जलवायु का प्रयोग 

इसके लिए उच्च तापमान और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है इसकी सफल खेती के लिए 44-22सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम माना गया है खरबूजे की फसल को पाले से अधिक हानी होती है फल पकने के समय यदि भूमि में अधिक नमी रहेगी तो फलों की मिठास कम हो जाती है |

उन्नत किस्मे निम्न प्रकार  है  Read More : खरबूजा की खेती करें और भी उन्नत तरीके से जानें इसको किस प्रकार करना चाहिए about खरबूजा की खेती करें और भी उन्नत तरीके से जानें इसको किस प्रकार करना चाहिए

Pages

जवाब विशेषज्ञ से लें

Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
  • सेक्स टाइम कैसे बढ़ाएं
  • लिंग का साइज कैसे बढ़ाएं
  • लिंग को बड़ा लम्बा और मोटा करने के घरेलू उपाय
  • सेक्स की फीलिंग को कैसे बढ़ाए
  • ओरल सेक्स कैसे करें

इस प्रकार सवालों का जवाब विशेषज्ञ से लें

सलाह शुल्क ₹500 है जिसमें आप हर सप्ताह व्हाट्सएप पर बात करके अपनी समस्या को व्यवस्थित तरीके से हल कर सकते हैं

A/c Name: Pradeep Kumar
A/c No: 5547297104
IFSC : kkbk0005321
Bank: Kotak Mahindra Bank

 
1 Start 2 Complete
Files must be less than 2 MB.
Allowed file types: gif jpg jpeg png bmp tif pict txt rtf pdf doc docx.