लकवा के लक्षण ,कारण और इलाज

पक्षाघात या लकवा मारना (Paralysis) एक या एकाधिक मांसपेशी समूह की मांसपेशियों के कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ होने की स्थिति को कहते हैं। पक्षाघात से प्रभावी क्षेत्र की संवेदन-शक्ति समाप्त हो सकती है या उस भाग को चलना-फिरना या घुमाना असम्भव हो जाता है। यदि दुर्बलता आंशिक है तो उसे आंशिक पक्षाघात कहते हैं।  Read More : लकवा के लक्षण ,कारण और इलाज about लकवा के लक्षण ,कारण और इलाज

क्या है आई वी एफ की प्रक्रिया, जानें

आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, यह किसी भी समस्या के कारण लाइलाज निसंतान दंपति को बच्चे का तोहफा देने की ऐसी प्रक्रिया है जो दिन प्रतिदिन लोकप्रिय होती जा रही है। आई वी एफ में मां को अंडा बनाने का इंजेक्‍शन दिया जाता है। इंजेक्‍शन लगाने का उद्देश्‍य यह होता है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा अंडे बनाए जा सकें। और अल्‍ट्रासाउट के जरिये इसकी निगरानी की जाती है कि अंडा बन रहा है या नहीं। जब उनकी ग्रोथ हो जाती है और वह परिपक्‍व हो जाते हैं तो उनमें से अंडे निकाल लिये जाते हैं और इसके बाद इन्हें प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार पति के स्‍पर्म के साथ मिलाकर निषेचन के लिए रख दिया जाता है। यह सब अल्ट्र Read More : क्या है आई वी एफ की प्रक्रिया, जानें about क्या है आई वी एफ की प्रक्रिया, जानें

चेहरे का ऐसा दर्द देता है इस गंभीर बीमारी के संकेत, जानें लक्षण और बचाव

नर्व्स में होने वाले दर्द को ट्राइजेमाइनल न्यूरॉल्जिया कहते हैं। इसके कारण ही चेहरे के नर्व्स में दर्द देता है। यह चेहरे के दर्द की एक सामान्य वजह है। यह सामान्यतः मध्य आयु या वृद्धावस्था में होता है। ट्राइजेमाइनल न्यूरॉल्जिया का दर्द अनिश्चित तरीके से होता है और इसमें तेज धार वाली या नुकीली चीज के चुभने जैसा या बिजली के झटकों के लगने जैसा तेज दर्द होता है, जो कुछ सेकेंड से कुछ मिनट तक रह सकता है। ट्राइजेमाइनल न्यूरॉल्जिया के रोगी को तेज दर्द के दौरे पड़ सकते हैं जो उसकी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके विशिष्ट मांसपेशीय संकुचन और दर्द के कारण इस स्थिति को टिक डॉउलोरयुक्स कहते Read More : चेहरे का ऐसा दर्द देता है इस गंभीर बीमारी के संकेत, जानें लक्षण और बचाव about चेहरे का ऐसा दर्द देता है इस गंभीर बीमारी के संकेत, जानें लक्षण और बचाव

कब्‍ज, मोटापा और मधुमेह का खात्‍मा करता है कच्‍चा केला खाने का ये तरीका

केला सबसे सस्ता फल है और हर मार्केट में आसानी से मिल भी जाता है। मतलब कि इसको खोजने के लिए ज्यादा आपको कहीं विशेष जगह जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसके फायदे भी काफी हैं।

लेकिन क्या आपको ये मालुम है कि कच्चा केला भी काफी फायदेमंद होता है। अगर आप रोज कच्चा केला खाते हैं तो आपके हजारों रुपये बच सकते हैं। तो आज इस लेख में हम जानते हैं कि कैसे कच्चा केला आपके हजारों रुपये बचाएगा।

पोटैशियम का खजाना Read More : कब्‍ज, मोटापा और मधुमेह का खात्‍मा करता है कच्‍चा केला खाने का ये तरीका about कब्‍ज, मोटापा और मधुमेह का खात्‍मा करता है कच्‍चा केला खाने का ये तरीका

डिप्रेशन या किसी मानसिक विकार के कारण

यूं तो अंधेरे में थोड़ा बहुत डर लगना सामान्य बात है लेकिन अगर ये डर ज्यादा बढ़ जाए तो ये एक तरह का मानोरोग बन जाता है, जिसे मनोविज्ञान की भाषा में निक्टोफोबिया कहते हैं। मनुष्य का अज्ञान से डर स्वाभाविक है और अंधेरे में भी हमें किसी चीज का ज्ञान नहीं हो पाता इसलिए डर लगता है। लेकिन कुछ लोगों को अंधेरे में ही कई तरह की आकृतियां दिखने लगती हैं या किसी इंसान के होने का आभास होता है, तो ये एक तरह का मनोविकार है।

 

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मखाना के फायदे

मखाना। निजी पलों को मजबूत बनाने में कारगर है।
3. एक से तीन ग्राम मखानों को गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से पेशाब के रोग दूर हो जाते हैं।
4. मसल्स को फिट रखना है, तो मखाना खाएं। इसमें प्रोटीन होता है।
5. तनाव रहता हो या फिर नींद कम आती हो, तो रात को सोने से पहले मखाने का सेवन करें। सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।
6. लंबे समय तक जवां दिखना है, तो एंटीऑक्सीडेंट़्स से भरपूर मखाने खाएं। दरअसल ये एंटी एजिंग डाइट है। कैल्शियम से भरपूर मखाना जोड़ों के दर्द में लाभकारी है। गठिया में भी इसे खाने आराम मिलता है।
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आयुर्वेद के अनुसार त्वचा तीन प्रकार कि होती है।

आयुर्वेद के अनुसार त्वचा तीन प्रकार कि होती है।

स्किन या त्वचा हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा होती है। जिसे हम बाह्यत्वचा के नाम से भी जानते हैं। स्किन हमारे शरीर पर एक चादर की तरह लिपटी हुई होती है। यह वेष्टन प्रणाली का बड़ा और सबसे मुख्य अंग होता है, जो ऊतकों की कई परतो द्वारा निर्मित होती है और यह हमारे शरीर के कई अंगों की रक्षा करती है जैसे कि मांसपेशियां, अस्थियों और अन्य अंग।

आयुर्वेद के अनुसार त्वचा तीन प्रकार कि होती है।

1  वात त्वचा
2  पित्त त्वचा
3  कफ त्वचा Read More : आयुर्वेद के अनुसार त्वचा तीन प्रकार कि होती है। about आयुर्वेद के अनुसार त्वचा तीन प्रकार कि होती है।

साबुन या फ़ेसवॉश से त्वचा रूखी होती है

साबुन या फ़ेसवॉश से त्वचा रूखी होती है

इस मौसम में आप जितनी बार साबुन या फ़ेसवॉश का इस्तेमाल कर अपनी त्वचा को क्लीन करती हैं, वह उतनी ही रूखी और बेजान हो जाती है। चूँकि क्लींजिंग करने से त्वचा का नैचुरल मॉइश्चर यानि प्राकृतिक नमी कम होती है। हाँ, इसकी जगह  आप त्वचा की देखभाल के लिए लेप का प्रयोग करें। लेप बनाने के लिए 2 चम्मच मिल्क पाउडर, दो चम्मच चोकर और थोड़ा पानी मिलायें, साबुन की जगह इस लेप का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी नहीं होगी। सरसों, बादाम या ऑलिव ऑयल के तेल से बॉडी की मसाज कर थोड़ी देर धूप सेककर गुनगुने पानी से नहा लेने न सिर्फ़ बॉडी की खुश्की दूर होती है, बल्कि ड्रायनेस भी ख़त्म होती है।

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क्रीम का कम प्रयोग करने से त्वचा रूखी हो जाती है

क्रीम का कम प्रयोग करने से त्वचा रूखी हो जाती है

क्रीम का कम व ज़्यादा प्रयोग करने से त्वचा की ड्रायनेस पर कुछ ख़ास प्रभाव नहीं पड़ता है। ठंड के कारण स्किन के भीतर ब्लड सर्कुलेशन स्लो हो जाता है, इससे बॉडी का टेंप्रेचर कम हो जाता है और बॉडी सीवम का प्रॉडक्शन कम करने लगती है। सीवम हमारी तेल ग्रंथियों से निकलने वाली एक ऑयली चीज़ है, जो हमारी स्किन को शाइनी और सॉफ़्ट बनाने में मदद करती है। सर्दियों में बॉडी टेंप्रेचर कम होने से सीवम डार्क हो जाता है और वह स्किन की आउटलेयर पर नहीं आ पाता, जिससे स्किन ड्राय हो जाती है। त्वचा की देखभाल के लिए इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए। Read More : क्रीम का कम प्रयोग करने से त्वचा रूखी हो जाती है about क्रीम का कम प्रयोग करने से त्वचा रूखी हो जाती है

सर्दी के ख़त्म होनें के बाद डैन्ड्रफ़ ख़त्म हो जाता है

मौसम चाहे सर्दी का हो या गर्मी का, अगर बालों की उचित देखभाल न की जाए तो डैन्ड्रफ़ ख़त्म नहीं होता बल्कि और बढ़ता जाता है। बालों को डैन्ड्रफ़ फ्री रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी हैं।

बालों को धोने के बाद बार बार कंघी न करें, क्योंकि ऐसा करते हुए तेल ग्रन्थियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं और इनसे अतिरिक्त तेल निकलता है। जो रूसी की वजह बनता है। सर्दियों में नारियल तेल के उपयोग से बचे क्योंकि यह सर्दियों में जम जाता है।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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