क्यों पंडित रविशंकर ने एक ही गायिका से गवा दिए थे फिल्म के सभी गाने?

Vani Jairam

गुलजार की फिल्म मीरा भले ही सफल नहीं रही लेकिन उसका संगीत लाजवाब था. सत्तर का दशक आते-आते गुलजार साहब का फिल्म इंडस्ट्री में काफी नाम हो चुका था. बतौर गीतकार वो तमाम हिट फिल्में दे चुके थे. खामोशी, आनंद, बावर्ची जैसी कामयाब फिल्मों के डायलॉग्स भी गुलजार साहब की कलम से ही निकले थे. उनके पास फिल्मों से जुड़े तमाम पहलुओं का तजुर्बा हो चुका था. इसी दशक में उन्होंने फिल्म निर्देशन भी शुरू किया था.

बतौर डायरेक्टर मौसम, खुशबु, आंधी और घरौंदा जैसी कामयाब फिल्में उनकी झोली में थीं. 1979 का साल था. गुलजार साहब ने फिल्म- मीरा बनाई. फिल्म की कहानी के केंद्र में कृष्ण की भक्ति में दीवानी मीरा जरूर थीं लेकिन संदेश था कि किस तरह हमारे समाज में नारी को आजादी, स्वाभिमान की लड़ाई लड़नी होती है. फिल्म में मीरा का किरदार हेमा मालिनी ने निभाया था. विनोद खन्ना और शम्मी कपूर जैसे कलाकार भी फिल्म में थे. इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भले ही बड़ी कामयाबी नहीं मिली लेकिन फिल्म समीक्षकों ने इसकी काफी सराहना की थी. फिल्म का खास पक्ष था इसका संगीत. जो गुलजार की फिल्मों का मजबूत पक्ष हमेशा से रहा है. गुलजार ने इस फिल्म के लिए एक बहुत ही महान कलाकार को संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी थी. एक ऐसे महान कलाकार को जिसका सत्तर के दशक तक देश विदेश में डंका बज चुका था. वो पहले ऐसे कलाकार थे जिन्होंने विदेशी फिल्मों का संगीत तैयार किया था. वो महान कलाकार थे- सितार सम्राट पंडित रविशंकर. इस फिल्म के संगीत के कई खास पहलू थे. आप इस फिल्म के सभी गाने इस लिंक पर देख सकते हैं.

दरअसल पंडित रविशंकर का हिंदी फिल्मों से हल्का फुल्का नाता ही रहा. उन्होंने एक आलाप को छोड़कर इस फिल्म के सभी गाने वाणी जयराम से गवाए. वाणी जयराम की आवाज में एक सुरीली जिंदादिली थी. फिल्म मीरा पर थी लिहाजा सभी पद मीरा के ही लिखे हुए थे. वाणी जयराम को उस वक्त करीब एक दशक का तजुर्बा हो चुका था.

 

गुलजार साहब फिल्म गुड्डी में वाणी जयराम की गायकी को सुन भी चुके थे. लिहाजा उन्हें भी इस बात से कोई परेशानी नहीं थी कि फिल्म के सभी गाने एक ही गायिका से क्यों गवाए जा रहे हैं. ये प्रयोग कामयाब भी रहा. फिल्म के एक भजन ‘मेरे तो गिरधर गोपाल’ के लिए वाणी जयराम को उस साल का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. इस फिल्म में उन्होंने सभी के सभी भजन कमाल के गाए थे. बाद में उन्हें आधुनिक भारत की मीरा कहा भी जाने लगा था. हम आपको इसी फिल्म का एक और भजन सुनाते हैं. जिसमें आज के हमारे राग की कहानी भी छिपी हुई है.

 

इस भजन को पंडित रविशंकर ने शास्त्रीय राग पूर्वी की जमीन पर तैयार किया था. जो भारतीय फिल्मी संगीत में ज्यादा प्रचलित रागों में शामिल नहीं है. ये अलग बात है कि राग पूर्वी से मिलते जुलते राग पूरिया धनाश्री की जमीन पर कई फिल्मी गाने तैयार किए गए हैं. पूर्वी दरअसल गंभीर किस्म का राग है. चूंकि आज बात महान कलाकार पंडित रविशंकर की हुई है इसलिए उनके बजाए राग पूर्वी को सुन लेते हैं इसके बाद आज के राग के शास्त्रीय पक्ष की बात करेंगे.

आइए अब आपको राग पूर्वी के शास्त्रीय पक्ष के बारे में बताते हैं. ये राग पूर्वी थाट का राग है. राग पूर्वी की जाति संपूर्ण है. इस राग में ‘रे’ और ‘ध’ कोमल लगते हैं. इसके अलावा ‘ग’ और ‘नी’ शुद्ध लगते हैं. साथ ही दोनों ‘म’ का प्रयोग किया जाता है. राग पूर्वी में वादी ‘ग’ और संवादी स्वर ‘नी’ है.

वादी संवादी स्वर किसी भी राग में वही महत्व निभाते हैं जो शतरंज के खेल में बादशाह और वजीर का होता है. राग पूर्वी को गाने बजाने का समय शाम है. राग पूर्वी के आरोह में हमेशा तीव्र मध्यम इस्तेमाल किया जाता है. जबकि अवरोह में दोनों ‘म’ एक साथ इस्तेमाल किए जाते हैं. जैसा हमने आपको पहले बताया था कि राग पूर्वी गंभीर किस्म का राग है इसलिए इसमें ठुमरी नहीं गाई जाती है. राग पूर्वी में छोटा ख्याल और बड़ा ख्याल गाया जाता है. इस राग के पूर्वांग में ये परज और उत्तरांग में पूरिया धनाश्री जैसी राग है. आइए अब आपको राग पूर्वी का आरोह अवरोह और पकड़ बताते हैं.

आरोह - ऩी सा रे ग, म (तीव्र) प, म (तीव्र) ध नी सां अवरोह- सां, रे नी ध प, म (तीव्र) प ग म ग, रे सा पकड़- ऩी सा रे ग, रे ग रे म ग, म (तीव्र) ग रे सा इस राग के बारे में और विस्तार से जानने के लिए आप एनसीईआरटी का राग पूर्वी पर बनाया गया ये वीडियो देख सकते हैं.

आइए अब आपको हमेशा की तरह शास्त्रीय राग की प्रस्तुतियां दिखाते हैं. हम आपको दो क्लिप दिखा रहे हैं जिससे आपको राग पूर्वी की शास्त्रीय प्रस्तुति का अंदाजा लग जाएगा. पहली क्लिप में किराना घराने के महान कलाकार पंडित भीमसेन जोशी का गाया राग पूर्वी है. दूसरी क्लिप में आज के दौर के परिपक्व शास्त्रीय गायक माने जाने वाले संजीव अभयंकर का गाया राग पूर्वी है. संजीव अभयंकर ने फिल्मों के लिए भी गायकी की है. साथ ही मौजूदा दौर के शास्त्रीय संगीत में उनका नाम बड़ी प्रमुखता से लिया जाता है.

राग पूर्वी के शास्त्रीय वादन पक्ष को समझने के लिए आप ये क्लिप देखिए. इसमें सारंगी के जबरदस्त कलाकार मुराद अली और अजराड़ा घराने के दिग्गज तबला वादक उस्ताद अकरम खान की राग पूर्वी में जुगलबंदी है. ये क्लिप गोवा में 2016 में आयोजित एक बेहद खास कार्यक्रम की है जो आपको देखने के बाद समझ आ जाएगी.

आज की रागदारी में बस इतना ही. अगले हफ्ते एक और शास्त्रीय राग लेकर आएंगे. उस शास्त्रीय राग की तमाम कहानियों से आपको परिचित कराएंगे.

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