मकरासन

मकरासन की विधि इस आसन को करने का तरीका बहुत आसान है। यहाँ पर इसके सरल विधि को दर्शाया गया है। तरीका पेट के बल लेट जाएं, ठोड़ी (Chin), छाती एवं पेट जमीन से स्पर्श होते रहें। पैरों के बीच में अपने योग मैट के बराबर दुरी बनाएं। अब आप सिर को उठाएं और दोनों हाथों को गाल पर लाते हुए कप का आकार बनाएं। धीरे धीरे दोनों पैरों को नीचे से ऊपर अपने हिप्स की ओर लेकर आएं और फिर धीरे धीरे नीचे लेकर जाएं। यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप दस चक्र करें।

मकरासन के लाभ

वैसे तो इस आसन के बहुत सारे लाभ है लेकिन यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे बारे में जिक्र किया जा रहा है।

  1. रीढ़ की हड्डी के लिए: यह रीढ़ की हड्डी के लिए अतिउत्तम योगाभ्यास है। यह पुरे मेरुदण्ड को स्वस्थ रखते हुए
  2. कमर दर्द: कमर दर्द के लिए यह बेहतरीन योगाभ्यास है। इसका नियमित अभ्यास से आप हमेशा हमेशा के लिए कमर दर्द से छुटकारा पा सकते हैं।
  3. डिप्रेशन के लिए: इस आसन के अभ्यास से आप डिप्रेशन में बहुत हद तक काबू  पा सकते हैं।
  4. थकावट दूर करने के लिए: यह थकावट को दूर करने में बहुत लाभप्रद है।
  5. दमा में: इसके अभ्यास से आप अपने फेफड़े की क्षमता को बढ़ा सकते हैं और साथ ही साथ अस्थमा ।
  6. अपच: यह अपच को दूर करने में मदद करता है तथा पाचनतंत्र  को ठीक रखता है।
  7. वात  रोग में : यह वात रोगियों के लिए एक अच्छा योगाभ्यास है।
  8. मानसिक रोग: यह मानसिक रोगियों के लिए एक बेहतरीन योगाभ्यास है।
  9. कंधे के अकड़न में सहायक: इससे आप अपने कंधे के अकड़न को कम कर सकते हैं।
  10. उच्च रक्तचाप: यह उच्च रक्तचाप में लाभप्रद है।
  11. स्लिप डिस्क: स्लिप डिस्क  के रोगियों के लिए एक उत्तम योगाभ्यास है।
  12. नींद के लिए: इस योग को सही तरीके से करने से आप नींद की समस्या से दूर हो सकते हैं।
  13. रक्त के संचार: शरीर में रक्त संचार को बढाता हैं|
  14. घुटनों: यह घुटनों के लिए लाभदायक है।

 

मकरासन की सावधानियां

  • कमर दर्द: अधिक कमर दर्द होने पर इस आसन का अभ्यास नहीं करनी चाहिए।
  • हर्निया: हर्निया की बीमारी में इस आसन को न करे।
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योगासन एवं आसन के मुख्य प्रकार

योगासन एवं आसनयोगासन एवं आसन पद्मासन, वज्रासन, सिद्धासन, मत्स्यासन, वक्रासन, अर्ध-मत्स्येन्द्रासन, पूर्ण मत्स्येन्द्रासन, गोमुखासन, पश्चिमोत्तनासन, ब्राह्म मुद्रा, उष्ट्रासन, योगमुद्रा, उत्थीत पद्म आसन, पाद प्रसारन आसन, द्विहस्त उत्थीत आसन, बकासन, कुर्म आसन, पाद ग्रीवा पश्चिमोत्तनासन, बध्दपद्मासन, सिंहासन, ध्रुवासन, जानुशिरासन, आकर्णधनुष्टंकारासन, बालासन, गोरक्षासन, पशुविश्रामासन, ब्रह्मचर्यासन, उल्लुक आसन, कुक्कुटासन, उत्तान कुक्कुटासन, चातक आसन, पर्वतासन, काक आसन, वातायनासन, पृष्ठ व्यायाम आसन-1, भैरवआसन,

चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को आसन कहते हैं। आसन अनेक प्रकार के माने गए हैं। योग में यम और नियम के बाद आसन का तीसरा स्थान है

आसन का उद्‍येश्य : आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल का नाश करना है। शरीर से मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर व मन में स्थिरता का अविर्भाव होता है। शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। अत: शरीर के स्वस्थ रहने पर मन और आत्मा में संतोष मिलता है।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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