अर्धहलासन

कैसे करें अर्ध हलासन, पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। हथेलियां जमीन की ओर रहेंगी और जांधों के बगल में रहेंगी। ध्‍यान रखें उन्‍हें पैरों के नीचे न दबाएं। पैरों को आपस में मिला लें और धीरे धीरे उठाते हुए नब्‍बे डिग्री तक ले आएं। जिन लोगों का पेट बाहर है उन्‍हें 80 डिग्री के बाद मशक्‍कत करनी पड़ती है। बेशक यह देखने में आसान लगता है मगर शुरुआत में नब्‍बे डिग्री तक पैर को टिकाए रखना भी चैलेंज बन जाता है। सांस की गति सामान्‍य रखें और इसी तरह से तीन मिनट तक ठहरने का अभ्‍यास करें। हाथों से ताकत न लें कमर और पेट की ताकत का इस्‍तेमाल करें। ध्‍यान रहे सांस की गति सामान्‍य रहेगी क्‍योंकि अगर आप बीच बीच में सांस रोकते रहेंगे तो आपके पैर डगमगाने लगेंगे। अगर तीन मिनट तक टिक गए तो अच्‍छी बात है नहीं तो जब तक टिक पाएं ठीक है उसके बाद धीरे से वापस आ जाएं। थोड़ा रुक कर फिर करें। तीन बार ऐसा करें। अगर हो ही नहीं पा रहा तो इसे दीवार का सहारा लेकर करें और धीरे धीरे दीवार से मदद लेने की आदत छोड़ दें। अर्ध हलासन से लाभ, आंतों को ताकतवर बनाता है। कब्‍ज के रोगियों को इसे करने से लाभ मिलता है। यह खाना पचाने की ताकत को बढ़ाता है और मोटापे से लड़ने में मदद करता है। जिन लोगों को गैस की दिक्‍कत है वो इस आसन का नियमित अभ्‍यास करें, आराम मिलता है। अगर नाभि टल गई तो दो से तीन मिनट तक इस आसन को करना चाहिए, नाभि अपनी जगह बैठ जाती है। कमर में दर्द रहता है तो इस आसन को बारी बारी एक एक पैर से करना चाहिए। कमर को ताकत मिलती है। इस आसन के नियमित अभ्‍यास से रीढ़ की हड्डी और भीतर की मसल्‍स ताकतवर बनती हैं। पैरों का सो जाना और उनका झनझनाना कम हो जाता है।

योगासन एवं आसन के मुख्य प्रकार

योगासन एवं आसनयोगासन एवं आसन पद्मासन, वज्रासन, सिद्धासन, मत्स्यासन, वक्रासन, अर्ध-मत्स्येन्द्रासन, पूर्ण मत्स्येन्द्रासन, गोमुखासन, पश्चिमोत्तनासन, ब्राह्म मुद्रा, उष्ट्रासन, योगमुद्रा, उत्थीत पद्म आसन, पाद प्रसारन आसन, द्विहस्त उत्थीत आसन, बकासन, कुर्म आसन, पाद ग्रीवा पश्चिमोत्तनासन, बध्दपद्मासन, सिंहासन, ध्रुवासन, जानुशिरासन, आकर्णधनुष्टंकारासन, बालासन, गोरक्षासन, पशुविश्रामासन, ब्रह्मचर्यासन, उल्लुक आसन, कुक्कुटासन, उत्तान कुक्कुटासन, चातक आसन, पर्वतासन, काक आसन, वातायनासन, पृष्ठ व्यायाम आसन-1, भैरवआसन,

चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को आसन कहते हैं। आसन अनेक प्रकार के माने गए हैं। योग में यम और नियम के बाद आसन का तीसरा स्थान है

आसन का उद्‍येश्य : आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल का नाश करना है। शरीर से मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर व मन में स्थिरता का अविर्भाव होता है। शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। अत: शरीर के स्वस्थ रहने पर मन और आत्मा में संतोष मिलता है।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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