Funny side up: Life of engineers

Watch out for stand-up comic Appurv Gupta as he takes you with his tongue-in-cheek humour. With engineer's simple life fundas, quirky email ids of the IITians and funny-techy Indian smartphones user stories, this witty episode is a sure shot entertainer for all. Also on the show, Appurv Gupta spills the beans on why people send out impersonal invites nowadays, why the Indian Education system emphasizes on rattafication and what is wrong with the IITians?

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वादी - संवादी

वादी और संवादी की परिभाषा, अनुवादी स्वर, विवादी स्वर, संवादी विश्लेषण, संवादी, राग वादी स्वर, samvadi swar, ठाट

राग एक माहौल या वातावरण विशेष का नाम है जो रंजक भी है। स्पष्ट रूप से इस वातावरण निर्मिती के केंद्र में वह स्वरावली है जो रागवाचक है इसे रागांग कहते हैं। इस रागांग का केंद्र बिंदु होता है वादी स्वर। इसे राग का जीव या प्राण स्वर भी कहा गया है। राग को राज्य की संज्ञा देकर वादी स्वर को उसका राजा कहा जाता है। स्पष्टतः वादी का प्रयोग अन्य स्वरों की अपेक्षा सर्वाधिक होता है तथा इस पर ठहराव भी अधिक होता है।
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रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे शीला का काला सच

रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे  शीला का काला सच

मां आनंद शीला 1981 से 1985 तक ओशो रजनीश की सचिव थी। इन चार साल में उसने ओशो को कई बार मारने का प्रयास किया। यही नहीं, ओशो तक पहुंच बनाने और कम्यून की सर्वेसर्वा बनने के लिए उसने ओशो संन्यासियों को धीमा जहर देकर मारने का भी प्रयास किया।

सत्ता और ध्यान मिलने की अपने लालच को छोड़कर शीला का एक अन्य प्रयोजन भी था ओशो रजनीश का खात्मा करने के लिए सरकार की मदद करना। लेकिन रजनीश के खात्मे तक भी शीला के कम्यून की सर्वेसर्वा बने रहने की योजना सफल नहीं हो पाई। Read More : रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे शीला का काला सच about रजनीशपुरम के बर्बाद होने के पीछे शीला का काला सच

प्राणायाम से मिलने वाले समस्त सामान्य लाभ

प्राणायाम से मिलने वाले समस्त सामान्य लाभ
  1. भस्त्रिका प्राणायाम: ष्श्वास को यथाषक्ति फेफड़ो में पूरा भरना एवं बाहर छोड़ना। यह प्राणायाम एक से पाँच मिनट तक किया जा सकता है। लाभ: सर्दी, जुकाम, श्वास रोग, नजला, साइनस, कमजोरी, सिरदर्द व स्नायु रोग दूर होते है। फेफड़े एवं हृदय स्वस्थ होता है।
  1. कपालभाति प्राणायाम: ष्श्वास को यथाषक्ति बाहर छोड़कर पूरा ध्यान श्वास को बाहर छोड़ने में होना चाहिए। भीतर श्वास जितना अपने आप जाता है उतना जाने देना चाहिए। श्वास जब बाहर छोड़ंेगे तो स्वाभाविक रूप से पेट अन्दर आयेगा। यह प्राणायाम यथाशक्ति पाँच मिनट तक प्रतिदिन खाली पेट करना चाहिए।

गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है

गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है

गूलर  फिकस कुल  का एक विशाल वृक्ष है। इसे संस्कृत में उदुम्बर, बांग्ला में हुमुर, मराठी में उदुम्बर, गुजराती में उम्बरा, अरबी में जमीझ, फारसी में अंजीरे आदम कहते हैं। इस पर फूल नहीं आते। इसकी शाखाओं में से फल उत्पन्न होते हैं। फल गोल-गोल अंजीर की तरह होते हैं और इसमें से सफेद-सफेद दूध निकलता है। इसके पत्ते लभेड़े के पत्तों जैसे होते हैं। नदी के उदुम्बर के पत्ते और फूल गूलर के पत्तों-फल से छोटे होते हैं ।
गूलर, २ प्रकार का होता है- नदी उदुम्बर और कठूमर। कठूमर के पत्ते गूलर के पत्तों से बडे होते हैं। इसके पत्तों को छूने से हाथों में खुजली होने लगती है और पत्तों में से दूध निकलता है। Read More : गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है about गूलर लंबी आयु वाला वृक्ष है

ज़्यादा ड्रिंकिंग की लत से कैसे निजात पाएं

ज़्यादा ड्रिंकिंग करना जानलेवा हो सकता है क्‍योंकि यह आपके अंगों को अंदर से ख़राब कर देती है। आइए इस विडियो में सीनियर साइकोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर मधुमती सिंह से जानें कि ड्रिंकिंग की लत से आप कैसे निजात पा सकते हैं। डॉक्‍टर मधुमती का कहना है कि शाम का टाइम जब आप ड्रिंक करते हो, उसे समय अपना ध्‍यान किसी ओर एक्टिविटी में लगाएं। यानि ड्रिंक की जगह आप कोई हॉबी या स्‍पोर्ट्स शुरु करें। दूसरी चीज कुछ ऐसे नए दोस्‍त बनाएं जो ड्रिंक न करते हो। अपना सोशल सर्कल चेंज करने की कोशिश करो। तीसरा आध्‍यात्मिक चीजों के बारे में पढ़ें और कुछ लिखना शुरू करें। लिखने से आपके अंदर मौजूद निराशा बाहर आ जायेगी। पार्टियों म Read More : ज़्यादा ड्रिंकिंग की लत से कैसे निजात पाएं about ज़्यादा ड्रिंकिंग की लत से कैसे निजात पाएं

योग क्या है योग के फायदे

योग और प्राणायाम दिखने में तो सरल लगते हैं परंतु उनका संपूर्ण लाभ लेने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरुरी है। अगर आप इन नियमो का पालन नहीं करते हैं तो योग से होने वाले फायदे तो नहीं ही मिलते हैं अपितु हानि भी हो सकती है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर हम नए रोगियों के लिए इन विशेष नियमों को एक बार फिर से लेकर आए हैं Read More : योग क्या है योग के फायदे about योग क्या है योग के फायदे

थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या

बिलावल ठाट, कल्याण ठाट, खमाज ठाट, आसावरी ठाट, काफ़ी ठाट, भैरवी ठाट, भैरव ठाट, मारवा ठाट, पूर्वी ठाट, तोड़ी ठाट

सप्तक के 12 स्वरों में से 7 क्रमानुसार मुख्य स्वरों के उस समुदाय को थाट कहते हैं, जिससे राग उत्पन्न होते है। स्वरसप्तक, मेल, थाट, अथवा ठाट एक ही अर्थवाचक हैं। प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में मेल शब्द ही प्रयोग किया गया है। अभिनव राग मंजरी में कहा गया है– मेल स्वर समूह: स्याद्राग व्यंजन शक्तिमान, अर्थात् स्वरों के उस समूह को मेल या ठाट कहते हैं, जिसमें राग उत्पन्न करने की शक्ति हो।

थाट के लक्षण Read More : थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या about थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या

राग रागिनी पद्धति

राग रागिनी पद्धति

रागों के वर्गीकरण की यह परंपरागत पद्धति है। १९वीं सदी तक रागों का वर्गीकरण इसी पद्धति के अनुसार किया जाता था। हर एक राग का परिवार होता था। सब छः राग ही मानते थे, पर अनेक मतों के अनुसार उनके नामों में अन्तर होता था। इस पद्धति को मानने वालों के चार मत थे।

शिव मत
इसके अनुसार छः राग माने जाते थे। प्रत्येक की छः-छः रागिनियाँ तथा आठ पुत्र मानते थे। इस मत में मान्य छः राग-

1. राग भैरव, 2. राग श्री, 3. राग मेघ, 4. राग बसंत, 5. राग पंचम, 6. राग नट नारायण।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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