बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा

बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा

स्टार्टअप शुरू करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उससे जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने की है। रजिस्ट्रेशन की रस्सी जकड़ने लगती है तो परमिशन का पंगा निपटाने में पसीने छूट जाते हैं। एक्सपर्ट्स की मदद से अमित मिश्रा बता रहे हैं कैसे निपटें स्टार्टअप के आड़े आने वाली लीगल अड़चनों से: बूझें स्टार्टअप की लीगल पहेली अक्सर देखने में आता है जब कोई स्टार्टअप बड़ा होने लगता है तो रजिस्ट्रेशन और परमिशन के भंवर में फंस कर रह जाता है। इससे बचने का सही तरीका यह है कि शुरुआत से ही कुछ वक्त और पैसा अपनी कंपनी के हिसाब से इनवेस्ट करें। स्टार्टअप की शुरुआत में दो तरह की कानूनी अड़चनें आती हैं: - रजिस्ट्रेशन: यह मुख् Read More : बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा about बिजनेस शुरू करने से पहले जानें कानून का फंडा

हर समय खुद के बारे में सोचना और बुदबुदाना हो सकती है मानसिक बीमारी

हर समय खुद के बारे में सोचना और बुदबुदाना हो सकती है मानसिक बीमारी

जीवन में सफलता का मूलमंत्र है आत्मनिरीक्षण यानि खुद के बारे में सोचना और अपनी कमियों को ठीक करना। मगर क्या आपको पता है कि खुद के बारे में ज्यादा सोचना भी एक तरह की मानसिक बीमारी है और इसकी वजह से आपकी सेहत पर भी असर पड़ सकता है। कुछ लोगों को ज्यादा सोचने की आदत होती है। इनमें से कुछ ऐसे लोग होते हैं जो खुद के बारे में ही सोचते रहते हैं। खुद के बारे में सोचना अच्छी बात है मगर जरूरत से ज्यादा सोचना गलत है। जब आप अपने बारे में ज्यादा सोचते हैं तो आपके अंदर अपने काम के प्रति और जीवन के प्रति नकारात्मकता बढ़ जाती है

अगर आप अंधेरे में यूज करते हैं स्मार्टफोन, सावधान !

अगर आप अंधेरे में यूज करते हैं स्मार्टफोन, सावधान !

अधिकतर लोग स्मार्टफोन का यूज करते हैं। लेकिन इनमें से कुछ ऐसे लोग हैं जो रात में सोने से पहले या अंधेरे में भी काफी देर तक स्मार्टफोन का पर काम करते हैं। इसका आंखों और ब्रेन पर काफी बुरा असर पड़ता है। इसको लेकर कई रिसर्च और स्टडीज भी हो चुकी हैं, जिनमें यह साबित हुआ है कि अंधेरे में स्मार्टफोन की स्क्रीन पर काम करना कितना खतरनाक है। इन्हीं रिसर्च और स्टडीज के आधार पर हम बता रहे हैं अंधेरे में स्मार्टफोन यूज Read More : अगर आप अंधेरे में यूज करते हैं स्मार्टफोन, सावधान ! about अगर आप अंधेरे में यूज करते हैं स्मार्टफोन, सावधान !

दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक से पाएं छुटकारा

दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक से पाएं छुटकारा

इसका परिणाम होता है दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक। यह मस्तिष्क में ब्लड क्लॉट बनने या ब्लीडिंग होने से भी हो सकता है। रक्त संचरण में रुकावट आने से कुछ ही समय में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं, क्योंकि उन्हें ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है।  हमारी जीवनशैली में आए बदलाव का सीधा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्‍य पर पड़ता है। कम उम्र में तनाव और अवसाद की बीमारियों ने हमारे जीवन में गहरी पैठ बना ली है। अधिक तनाव और अवसाद के गंभीर परिणाम दिमागी दौरे के रूप में भी देखने को मिलते हैं। इसके चलते अपने हर छोटे-बड़े काम के लिए उसकी निर्भरता किसी दूसरे व्यक्ति पर हो जाती है। अनके मरीज Read More : दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक से पाएं छुटकारा about दिमागी दौरा या ब्रेन स्ट्रोक से पाएं छुटकारा

मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है |

मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है |

जब से हम पैदा हुए हैं हमारा मस्तिष्क लगातार काम कर रहा है। आपका शरीर सोते समय आराम कर भी लेता है लेकिन मस्तिष्क कभी आराम नहीं करता वो उस समय भी सोचता है, जिस कारण आप सपने देख पाते हैं। मस्तिष्क बहुत सारे काम जैसे सोचना, संख्याओं को याद रखना, लिखने के लिए शब्द देना आदि करता है। बहुत से काम करने के लिए मस्तिष्क का स्थिर होना बहुत ज़रूरी है। आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कम समय में अधिक काम करने के लिएदिमाग का सही समय पर सही प्रतिक्रिया देना आवश्यक है।  Read More : मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है | about मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है |

अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव

अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव

बहुत से लोग अंतरिक्ष में दूर तक की सैर का ख़्वाब देखते हैं. मगर अंतरिक्ष तो अनंत है. उसका कोई ओर-छोर नहीं. इंसान ने अब तक अरबों किलोमीटर के इसके विस्तार के एक हिस्से को ही जाना है. और मौजूदा अंतरिक्ष यान से आकाश के उस कोने तक पहुंचकर वापस धरती पर आना किसी एक इंसान की ज़िंदगी में मुमकिन नहीं.

तो आख़िर कौन सा ज़रिया हो सकता है जिससे अंतरिक्ष में अरबों किलोमीटर का सफ़र हम जल्द से जल्द तय कर सकें? फिर वहां से आकर बाक़ी लोगों को इस सफ़र की दास्तां सुना सकें. Read More : अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव about अरबों किलोमीटर का सफ़र संभव

कमर की चर्बी कम करने के लिये पीजिये ढेर सारा पानी

कमर की चर्बी कम करने के लिये पीजिये ढेर सारा पानी

प्रमुख लेखक तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, यूएसए के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर टैमी चंग के अनुसार 'हमेशा हाईड्रेट रहना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है तथा हमारे अध्ययन से इस बात का पता चलता है कि इसका संबंध स्वस्थ व नियंत्रित वज़न से भी है।" 

चंग ने बताया कि 'हमारे अध्ययन के अनुसार जब हम जनसंख्या के स्तर पर मोटापे को संबोधित करते हैं तब हाइड्रेशन की तरफ अधिक ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है। निष्कर्षों से पता चला कि वे लोग जो मोटे हैं तथा जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अधिक है उनमें पर्याप्त हाइड्रेशन नहीं पाया जाता। Read More : कमर की चर्बी कम करने के लिये पीजिये ढेर सारा पानी about कमर की चर्बी कम करने के लिये पीजिये ढेर सारा पानी

आपके बैंक को बदल रहा है सोशल मीडिया!

बैंक को बदल रहा है सोशल मीडिया!

किसी भी बड़े बैंक के साथ अब अगर अपना अकाउंट खोलना है तो टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम हो गई है.
अब बैंक नए ग्राहकों से फोटो नहीं मांगते बल्कि सेल्फी से ही काम चल जाता है. फेसबुक और ट्विटर की मदद से भी अब कई तरह के बैंकिंग ट्रांज़ेक्शन किये जा सकते हैं.
फ़ेडरल बैंक ने एक ऐप लॉन्च किया है जिसे डाउनलोड करके बस सेल्फी लीजिए, अपने आधार कार्ड को स्कैन कीजिये और सेविंग अकाउंट तुरंत खुल जाएगा. फॉर्म भरने का चक्कर ही ख़त्म.
फेसबुक पर यदि आपकी प्रोफाइल है तो आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और दूसरे बैंक भी आपको पैसे ट्रांसफर करने की इजाज़त देते हैं.
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सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

महागुजरात गाांधर्व सांगीत सममतत
गायन और वादन का अभ्यासक्रम
सांगीत अलांकार (1).

क्रक्रयात्मक – कुल 600 अांक (क्रक्रयात्मक परीक्षा – 500 अांक + सभागायन 100 अांक), लेखित – 100 अांक, कुल अांक – 700.
समय: - सांगीत वर्शारद के बाद 1 साल (कम से कम 200 घांटे का प्रमशक्षण).
परीक्षा समय: - ज्यादा से ज्यादा 120 ममतनट (2 घांटे) और सभागायन का समय अलग.

क्रक्रयात्मक - 600 अांक : -
1) अभ्यासक्रम के बड़े ख्याल के राग: - कुल 10 राग करने है. Read More : सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति about सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति

अलग-अलग ग्रहों से आए हैं पुरुष और महिलाएं?

अलग-अलग ग्रहों से आए हैं पुरुष और महिलाएं?

अंग्रेज़ी में एक कहावत है कि 'मैन आर फ़्रॉम मार्स, वीमेन आर फ़्रॉम वीनस' यानी पुरुष मंगल ग्रह से और महिलाएं शुक्र से आई हैं. लेकिन इन दोनों के मस्तिष्क पर हुए एक अध्ययन का मानना है कि एक मायने में यह सही हो सकता है.

एक ताज़ा अध्ययन में पाया गया है कि पुरुषों और महिलाओं के मस्तिष्क की बुनावट इस क़दर भिन्न है कि लगता है कि दोनों ही अलग-अलग ग्रह की प्रजातियां हैं.

पुरुषों के मस्तिष्क की बुनावट आगे से पीछे की ओर होती है और दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिए कुछ ही तंतु होते हैं जबकि महिलाओं के मस्तिष्क में तंतु बाएं से दाहिने और दाहिने से बाएं तिरछे एकदूसरे से जुड़े रहते हैं. Read More : अलग-अलग ग्रहों से आए हैं पुरुष और महिलाएं? about अलग-अलग ग्रहों से आए हैं पुरुष और महिलाएं?

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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