अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ

  • हमारे शरीर की ७२,७२,१०,२१० सुक्ष्मादी सुक्ष्म नाडी शुद्ध हो जाती है।
  • हार्ट की ब्लाँकेज खुल जाते है।
  • हाय, लो दोन्हो रक्त चाप ठिक हो जायेंगे|
  • आर्थराटीस, रोमेटोर आर्थराटीस, कार्टीलेज घीसना ऐसी बीमारीओंको ठीक हो जाती है।
  • टेढे लीगामेंटस सीधे हो जायेंगे|
  • व्हेरीकोज व्हेनस ठीक हो जाती है।
  • कोलेस्टाँल, टाँक्सीनस, आँस्कीडण्टस इसके जैसे विजतीय पदार्थ शरीर के बहार नीकल जाते है।
  • सायकीक पेंशनट्स को फायदा होता है।
  • कीडनी नँचरली स्वछ होती है, डायलेसीस करने की जरुरत नहीं पडती|
  • सबसे बड़ा खतरनाक कँन्सर तक ठीक हो जाता है।
  • सभी प्रकारकी अँलार्जीयाँ मीट जाती है।
  • मेमरी बढाने की लीये|
  • सर्दी, खाँसी, नाक, गला ठीक हो जाता है।
  • ब्रेन ट्युमर भी ठीक हो जाता है।
  • सभी प्रकार के चर्म समस्या मीट जाती है।
  • मस्तिषक के सम्बधित सभि व्याधिओको मीटा ने के लिये।
  • पर्किनसन, प्यारालेसिस, लुलापन इत्यादी स्नयुओ के सम्बधित सभि व्याधिओको मीटा ने के लिये।
  • सायनस की व्याधि मीट जाती है।
  • डायबीटीस पुरी तरह मीट जाती है।
  • टाँन्सीलस की व्याधि मीट जाती है।
  • थण्डी और गरम हवा के उपयोग से हमारे शरीर का तापमान संतुलित रेहता है।
  • इससे हमारी रोग-प्रतिकारक शक्ती बढ जाती है।

दमा का रोग जड़ से चला जाता है ा

 

प्राणायाम के लाभ और कैसे करे

प्राणायाम  के लाभ

प्राण का अर्थ, ऊर्जा अथवा जीवनी शक्ति है तथा आयाम का तात्पर्य ऊर्जा को नियंत्रित करनाहै। इस नाडीशोधन प्राणायाम के अर्थ में प्राणायाम का तात्पर्य एक ऐसी क्रिया से है जिसके द्वारा प्राण का प्रसार विस्तार किया जाता है तथा उसे नियंत्रण में भी रखा जाता है.

यहाँ 3 प्रमुख प्राणायाम के बारे में चर्चा की जा रही है:-

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

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प्राणायाम दो शब्द प्राण एवं आयाम से मिलकर बना है

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प्राण शब्द जीवन का पर्यायवाची है जब तक शरीर में प्राण हैं तब तक जीवन है और जैसे ही प्राण शरीर को छोड़ देते हैं शरीर मृत्यु पर हो जाता है यहां प्राण का तात्पर्य प्राणवायू से है उपनिषद एक मान्यता के अनुसार जब प्यारी संसार में आता है तो वह निश्चित मात्रा में स्वास्थ्य लेकर आता है और उतनी ही स्वास्थ्य तक जीवित रहता है यह सत्य है कि प्राणी का जीवन 19 वर्षों तक ही सीमित है प्राणी अपने शरीर की रचना के अनुसार ही श्वास तेजी अधीर ग्रहण करता है कुछ प्राणी श्वास बहुत धीरे धीरे ग्रहण करते हैं और कुछ लंबी आयु के होते हैं तो कुछ प्यारी श्वास तेजी से ग्रहण करने के कारण अल्पायु ही प्राप्त करते हैं इस प्राण Read More : प्राणायाम दो शब्द प्राण एवं आयाम से मिलकर बना है about प्राणायाम दो शब्द प्राण एवं आयाम से मिलकर बना है

प्राणायाम से मिलने वाले समस्त सामान्य लाभ

प्राणायाम से मिलने वाले समस्त सामान्य लाभ
  1. भस्त्रिका प्राणायाम: ष्श्वास को यथाषक्ति फेफड़ो में पूरा भरना एवं बाहर छोड़ना। यह प्राणायाम एक से पाँच मिनट तक किया जा सकता है। लाभ: सर्दी, जुकाम, श्वास रोग, नजला, साइनस, कमजोरी, सिरदर्द व स्नायु रोग दूर होते है। फेफड़े एवं हृदय स्वस्थ होता है।
  1. कपालभाति प्राणायाम: ष्श्वास को यथाषक्ति बाहर छोड़कर पूरा ध्यान श्वास को बाहर छोड़ने में होना चाहिए। भीतर श्वास जितना अपने आप जाता है उतना जाने देना चाहिए। श्वास जब बाहर छोड़ंेगे तो स्वाभाविक रूप से पेट अन्दर आयेगा। यह प्राणायाम यथाशक्ति पाँच मिनट तक प्रतिदिन खाली पेट करना चाहिए।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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