मुनक्का स्वस्थ के लिए ज़रूरी

मुनक्का (Dry Grapes) अंगूर को सुखाकर बनाया जाता है, इसमें बीज पाये जाते है। मुनक्का दो प्रकार का होता है – लाल और काला। मुनक्का का इस्तेमाल बहुत तरह के घरेलू उपचारों में किया जाता है, भारत में आज के समय में काफी जगह जैसे- कुमाऊ, नासिक, देहरादून, पूना और औरंगाबाद आदि पर मुख्य रूप से इनकी खेती की जाती है। मुनक्का हमारे शरीर के लिए भी बहुत ही फायदेमंद और शक्तिवर्धक होता है तो आईये आज हम मुनक्के से होने वाले लाभों के बारे में बात करेंगें। Read More : मुनक्का स्वस्थ के लिए ज़रूरी about मुनक्का स्वस्थ के लिए ज़रूरी

खजूर खाने के फायदे

 खजूर के पेड़ों की खेती सदियों से की जा रही है. खासतौर से मध्‍य पूर्व के देशों में तो खजूर हमेशा से भोजन का अहम हिस्‍सा रहा है. खजूर की खासियत यह है कि इसे आप फ्रेश भी खा सकते हैं और सुखाकर भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं. एक खजूर की लंबाई तीन से सात सेंटीमीटर तक हो सकती है. जहां पके हुए खजूर का रंग गहरे पीले और लाल रंग का होता है वही सूखा खजूर ज्‍यादातर भूरे रंग का होता है. मिठास के आधार पर खजूर को तीन हिस्‍सों में बांटा जाता है- नरम खजूर, हल्‍का सूखा खजूर और पूरी तरह से सूखा हुआ खजूर. Read More : खजूर खाने के फायदे about खजूर खाने के फायदे

माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि

माइकल जैक्सन

माइकल जैक्सन की निधन की ख़बर आते ही शोक संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया है.

माइकल जैक्सन के परिजनों, मित्रों, सहयोगियों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है. जरमेन जैक्सन, भाई मेरे भाई, किंग ऑफ़ पॉप माइकल जैक्सन का 25 जून 2009 को दोपहर 2.26 बजे निधन हो गया. माना जा रहा है कि उन्हें घर पर दिल का दौरा पड़ा था. मेरा परिवार मीडिया से अनुरोध करता है कि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें अकेला छोड़ दे. अल्लाह हमेशा आपके साथ रहे माइकल. हमसब आपको प्यार करते हैं.मैडोना, गायिका Read More : माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि about माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि

वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति

वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति

वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति जिसका अर्थ है श्रोताओं को मन के अनुसार बांध कर सामान भाव से संतुष्ट कर देना. उन्होंने ठुमरी को नीचे से ऊपर पहुँचाया और अगर उन्हें संगीत का वाज्ञेयकार कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

"मुझे याद है 1972 में टाउनहॉल मैदान में एक कार्यक्रम के दौरान वो मंच पर आईं और उन्होंने राग यमन, मालकौंस के बाद कई बंदिशें सुनाई लेकिन उसके बाद जब ठुमरी शुरू हुई तो उपस्थित जनसमूह ने उन्हें कुछ देर और गाने का आग्रह किया. बड़े ही मीठे स्वर में उन्होंने कहा 'आप लोग जाए न देबा’ और वे एक घंटे तक अनवरत जाती रहीं. Read More : वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति about वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति

ध्यान -:पूर्णिमा का चाँद

पूर्णिमा का चाँद

रात पूरे चाँद के नीचे बैठकर देखा, कभी टकटकी लगाकर आकाश में पूर्णिमा के चाँद को देखा।कुछ तुम्हारे भीतर भी आंदोलित होने लगता है।वैज्ञानिक कहते हैं कि मनुष्य सबसे पहले समुद्र में ही पैदा हुआ। पहला रूप जीवन का मछली है।हिन्दुओं की बात ठीक मालूम होती है कि परमात्मा का पहला अवतार मत्स्य अवतार,मछली का अवतार।वैज्ञानिक विकासवाद भी इसे स्वीकार करता है। और उसके आधार हैं।अब भी मनुष्य के शरीर में जल का अनुपात अस्सी प्रतिशत है।उसमे वे ही रासायनिक द्रव्य हैं जो सागर के जल में हैं।
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ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह

ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह

ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह, वह नारे लगाते हुए नहीं आता । वह बहुत ही चुपचाप आता है.... यदि हम व्यस्त हैं,तो वह प्रतीक्षा करता है । और लौट जाता है । Read More : ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह about ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह

सिरविहीन होने के प्रयोग को--करके देखो

क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है?

क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है?

शिक्षाशास्त्र से भी मेरी दृष्टि भिन्न और विरोधी हो सकती है। मैं न तो शिक्षाशास्त्री ही हूं और न समाजशास्त्री ही। किंतु यह सौभाग्य की बात है। क्योंकि जो जितना अधिक शास्त्र को जानते हैं, उनके लिए जीवन को जानना उतना ही कठिन हो जाता है। शास्त्र सदा ही सत्य के जानने में बाधा बन जाते हैं। शास्त्र से भरे हुए चित्त में चिंतन समाप्त हो जाता है। चिंतन के लिए तो निर्भार और पक्षपात मुक्त चित्त चाहिए न! Read More : क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है? about क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है?

कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़

कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़

सहज-योग का अर्थ होता है — कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़ , आदर्श पाखंड लाते हैं ।

आदर्शों के कारण विकृति पैदा होती है ,क्योंकि कुछ तुम होते हो , कुछ तुम होने की चेष्टा करते हो , तनाव पैदा हो जाता है ।

फिर तुम जो हो वह दब जाता है , उसमें जो तुम होना चाहते हो ।

इसी का नाम पाखंड है ।
सरहपा कहता है ; तुम जैसे हो वैसे ही जीयो ।

जरा सोचो , जरा इस पर ध्यान करो ।

तुम जैसे हो वैसे ही जीयो , जो परिणाम हो । धोखा न दो । Read More : कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़ about कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़

मानसिक क्षमताओं का विकास

मानसिक क्षमताओं

स्मरण शक्ति एवं बौद्धिक क्षमता जीवन में प्रगति के लिए प्रमुख साधन माने जाते हैं. योग से मानसिक क्षमताओं का विकास होता है और स्मरण शक्ति पर भी गुणात्मक प्रभाव होता है. योग मुद्रा और ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक होता है. एकाग्र मन से स्मरण शक्ति का विकास होता है. प्रतियोगिता परीक्षाओं में तार्किक क्षमताओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं. योग तर्क शक्ति का भी विकास करता है एवं कौशल को बढ़ता है. योग की क्रियाओं द्वारा तार्किक शक्ति एवं कार्य कुशलता में गुणात्मक प्रभाव होने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है

 

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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