ओशो अनुभव

कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़

कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़

सहज-योग का अर्थ होता है — कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़ , आदर्श पाखंड लाते हैं ।

आदर्शों के कारण विकृति पैदा होती है ,क्योंकि कुछ तुम होते हो , कुछ तुम होने की चेष्टा करते हो , तनाव पैदा हो जाता है ।

फिर तुम जो हो वह दब जाता है , उसमें जो तुम होना चाहते हो ।

इसी का नाम पाखंड है ।
सरहपा कहता है ; तुम जैसे हो वैसे ही जीयो ।

जरा सोचो , जरा इस पर ध्यान करो ।

तुम जैसे हो वैसे ही जीयो , जो परिणाम हो । धोखा न दो । Read More : कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़ about कृत्रिम न होओ , स्वाभाविक रहो अपने ऊपर आदर्श मत ओढो़

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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