क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है?

क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है?

चीन में पिछले दिनों विचित्र किस्म का जीवाश्म मिला, जो अब तक मालूम मानव प्रजाति के जीवाश्म से मेल नहीं खाता. क्या यह जीवाश्म किसी नए जीव के अस्तित्व की ओर इशारा करता है?

ये जीवाश्म न तो यूरोप में 35 हजार से डेढ़ लाख साल पहले मिले आदिमानव से मेल खाता है और न आधुनिक मानव से.

यह एकदम अलग है, पर जीवाश्म किस जीव का है, इसे लेकर कुछ भी तय नहीं है.

हालांकि जीवाश्म से संकेत मिलते हैं कि कोई अज्ञात प्रजाति के मानवों का अस्तित्व 60 हज़ार से एक लाख 20 हज़ार साल पहले मौजूद था.

मुमकिन है कि ये जीवाश्म किन्हीं दो मालूम प्रजातियों के बीच रूपांतरण काल का हो सकता है. Read More : क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है? about क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है?

ये अपने बच्चों की जान क्यों ले रहे हैं?

ये अपने बच्चों की जान क्यों ले रहे हैं?

कोलंबिया, इक्वेडोर और बेलीज़ में पाया गया है कि एक ख़ास नस्ल के बांदर- स्पाइडर मंकी अपने ही नर बच्चों की हत्या कर रहे हैं.

एक नए अध्ययन के मुताबिक स्पाइडर मंकी के नर बच्चों की हत्या की वजह यौन प्रतिस्पर्धा को रोकना है.

स्पाइडर मंकी इन्हें इसलिए कहा जाता है कि ये बंदर कभी-कभार ही ज़मीन पर अपने पैर रखते हों. एक डाली से दूसरी डाली और एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर यह घंटों टंगे रहते हैं.

इस कूदने-फांदने और टहनियों से लटकने में इनकी पूंछ भी इनकी मदद करती है.

स्तनधारियों में 35 वानर प्रजातियों समेत 119 प्रजातियों में शिशुहत्या सामान्य बात है. Read More : ये अपने बच्चों की जान क्यों ले रहे हैं? about ये अपने बच्चों की जान क्यों ले रहे हैं?

'भारतीय एशिया के सबसे बड़े भुलक्कड़, कैब में टीवी तक भूल जाते हैं लोग'

भूलने की समस्या लगभग हर किसी को होती है, लेकिन हम भारतीयों में ये समस्य कुछ ज्यादा ही है। हम भारतीय कैब से यात्रा करने के दौरान ना सिर्फ अपना फोन भूलते हैं, बल्कि बच्चों की तिपहिया साइकिल, एलसीडी टीवी, बैग, झींगा मछली तक छोड़ जाते हैं। ऐसी कई कहानियां आपको मिलेंगी। एप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली उबर ने अपने एक सर्वेक्षण में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र किया है जहां भारतीय एलसीडी टीवी तक उसकी कैब में यात्रा करने के दौरान भूल गए। Read More : 'भारतीय एशिया के सबसे बड़े भुलक्कड़, कैब में टीवी तक भूल जाते हैं लोग' about 'भारतीय एशिया के सबसे बड़े भुलक्कड़, कैब में टीवी तक भूल जाते हैं लोग'

हिटलर की आत्मकथा: कॉपीराइट हटा तो क्या होगा?

हिटलर की आत्मकथा: कॉपीराइट हटा तो क्या होगा?

जर्मन तानाशाह एडोल्फ़ हिटलर की आत्मकथा माइन काम्फ़ (मेरा संघर्ष) पर 2015 के अंत में कॉपीराइट खत्म हो जाएगा.

क्या होगा जब जर्मन अधिकारी इस किताब के प्रकाशन और वितरण पर नियंत्रण नहीं रख पाएँगे.

माइन काम्फ़ पर से कॉपीराइट खत्म होने का मतलब है कि जर्मनी में कोई भी इसे छाप सकेगा. Read More : हिटलर की आत्मकथा: कॉपीराइट हटा तो क्या होगा? about हिटलर की आत्मकथा: कॉपीराइट हटा तो क्या होगा?

अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल!

अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल!

क्या हम किसी दिन अपने दिमाग़ों को इंटरनेट से जोड़ सकते हैं.

इंटरनेट कनेक्शन आज सबसे तेज़ और किसी भी अन्य संचार प्रणाली से बढ़कर हो गया है जो हमें जुड़े रखने में मदद करता है.

कभी-कभी हमें महसूस होता है कि हम अपनी इच्छा से ईमेल संचार करने की कगार पर हैं.

मैंने ईमेल भेजा, आपको मिला, आपने इसे पढ़ा और जवाब दिया- सब कुछ बस कुछ ही सेकंड में हो गया.

भले ही आप ये मानें या न मानें कि त्वरित संचार अच्छी बात है, लेकिन यह निश्चित तौर पर हो रहा है. Read More : अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल! about अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल!

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