जीरा की खेती कैसे करे

जीरा की खेती

हमारे मसालों में एक विशेष स्थान रखने वाला जीरा ,पेट सम्बंधित रोगों की एक रामबाण ओषधि है जिसकी खेती आज के समय में किसानो के लिए एक आय की खेती के रूप में उभर कर सामने आ रही है आइए तो जाने कैसे करे जीरे की खेती 

 

जलवायु :-

जीरे की खेती के लिए हमे शुरुवात में बीज बुवाई के समय  ठन्डे मोसम की जलवायु की आवश्यकता होती है जो की बाद में बीज के पक जाने के बाद हमे सामान्य गर्म मोसम अनिवार्य होता है

 

भूमि :-

जीरे के लिए जीवाश्म युक्त अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है

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स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय

निषाद स्वर हेतु जगती छन्द का निर्देश है। जगती छन्द पाप नाश हेतु होता है। निषाद स्वर का वार शनिवार कहा गया है। शतपथ ब्राह्मण ४.६.८.१-२ का कथन है – या वै दीक्षा सा निषत्, तत् सत्रम्। शतपथ ब्राह्मण ५.४.४.५ तथा १२.८.३.१० में वाजसनेयि माध्यन्दिन संहिता १०.२७ व २०.२ में प्रकट हुई निम्नलिखित यजु की व्याख्या की गई है-

निषषाद धृतव्रतो वरुणः पस्त्यास्वा। साम्राज्याय सुक्रतुः।। Read More : स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय about स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय

संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

कोई संगीत इसलिए सुनता है कि उसे संगीत का शौक है, तो कोई अपनी दिन भर की थकान संगीत से मिटाता है। वजह कुछ भी हो लेकिन हर किसी के जीवन से कहीं न कहीं जुड़ा है।

अगर आप भी रोज संगीत सुनकर खुदको तरोताजा करते हैं तो जा‌न लें कि यह न सिर्फ आपके मूड को बेहतर बनाता है बल्कि सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है। Read More : संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा about संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा

ध्यान : अपना मुंह बंद करो!

अपना मुंह बंद करो

“तुम इसे कर सकते हो – मुंह बन्द करना बहुत बड़ा काम नहीं है। तुम एक मूर्ति की तरह बैठ सकते हो, मुंह को पूरी तरह बन्द किये, लेकिन यह क्रियाशीलता नहीं रोकेगा। अन्दर गहरे में विचार चलते रहेंगे, और अगर विचार चल रहे हैं तो तुम ओठों पर सूक्ष्म कंपन अनुभव कर सकते हो। दूसरे इसे नहीं भी देख पाएं, क्योंकि वे बहुत सूक्ष्म हैं, लेकिन अगर तुम सोच रहे हो तो तुम्हारे ओंठ थोड़े कंपित होते हैं – एक बहुत सूक्ष्म कंपन। Read More : ध्यान : अपना मुंह बंद करो! about ध्यान : अपना मुंह बंद करो!

ध्यान :"मैं यह नहीं हूं'

ध्यान :"मैं यह नहीं हूं'

मन कचरा है! ऐसा नहीं है कि आपके पास कचरा है और दूसरे के पास नहीं है। मन ही कचरा है। और अगर आप कचरा बाहर भी फेंकते रहें, तो जितना चाहे फेंकते रह सकते हैं, लेकिन यह कभी खतम होने वाला नहीं है। यह खुद ही बढ़ने वाला कचरा है। यह मुर्दा नहीं है, यह सकि"य है। यह बढ़ता रहता है और इसका अपना जीवन है, तो अगर हम इसे काटें तो इसमें नई पत्तियां अंकुरित होने लगती हैं।

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ध्यान शरीर की आदत नहीं है

ध्यान इसलिए कठिन मालूम होता है क्योँकि शरीर की बंधी हुई आदतों को तोड़कर उसमेँ नई व्यवस्था निर्मित करनी होती है । शरीर की बंधी हुई आदतें कौन सी हैं और उन्हेँ कैसे तोड़ा जा सकता है इस पर पढ़िए ओशो का मार्गदर्शन जो उन्होँने एक ध्यान शिविर में साधकोँ को किया है। Read More : ध्यान शरीर की आदत नहीं है about ध्यान शरीर की आदत नहीं है

ध्यान : स्टॉप! (जैसे ही कुछ करने की वृत्ति हो, रुक जाओ।)

तुम कहीं भी इसका प्रयोग कर सकते हो। तुम स्नान कर रहे हो; अचानक अपने को कहो: स्टॉप! अगर एक क्षण के लिए भी यह एकाएक रुकना घटित हो जाए तो तुम अपने भीतर कुछ भिन्न बात घटित होते पाओगे। तब तुम अपने केंद्र पर फेंक दिए जाओगे। और तब सब कुछ ठहर जाएगा। तुम्हारा शरीर तो पूरी तरह रुकेगा ही, तुम्हारा मन भी गति करना बंद कर देगा।

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ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

जब कामवासना पकड़े , तब डरो मत। शांत होकर बैठ जाओ। जोर से श्वास को बाहर फेंको –उच्छवास।

भीतर मत लो श्वास को। क्योंकि जैसे भी तुम भीतर गहरी श्वास को लोगे, भीतर जाती श्वास काम-ऊर्जा को नीचे की तरफ धकाती है। जब तुम्हें काम-वासना पकड़े, तब एक्सहेल करो। बाहर फेंको श्वास को। नाभि को भीतर खींचो, पेट को भीतर लोग और श्वास को बाहर फेंको जितनी फेंक सको। Read More : ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ? about ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

ध्यान : अपने विचारों से तादात्मय तोड़ें

 तादात्मय तोड़ें

अपनी आंखें बंद करें, फिर दोनों आंखों को दोनों भवों के बीच में एकाग्र करें, ऐसे जैसे तुम दोनों आंखों से देख रहे हों। अपनी संपूर्ण एकाग्रता वहां ले जाएं। 

एक सही बिंदु पर तुम्हारी आंखें स्थिर हो जाएंगी। और अगर तुम्हारी एकाग्रता वहां है तो तुम्हें अजीब सा अनुभव होगा: पहली बार तुम्हारा साक्षात्कार तुम्हारे विचारों से होगा; तुम साक्षी हो जाओगे। यह चित्रपट की तरह है: विचार दौड़ रहे हैं और तुम साक्षी हो।  Read More : ध्यान : अपने विचारों से तादात्मय तोड़ें about ध्यान : अपने विचारों से तादात्मय तोड़ें

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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