खाँसी

खाँसी

सामान्य रूप से हर व्यक्ति प्रति मिनट लगभग 6-7 लीटर वायु साँस के द्वारा शरीर के अंदर लेता और बाहर छोड़ता है। मतलब प्रतिदिन करीब 11,000 लीटर वायु के सहारे एक सामान्य व्यक्ति खाने के बिना 10 दिनों तक जीवित रह सकता है परंतु प्राणवायु के बिना वह 1 मिनट भी नहीं जी सकता तो सोचिए आपने अपने जीवन काल में कितनी वायु का शरीर में आदान-प्रदान किया होगा। जब इस वायु द्वारा कोई भी ऐसी चीज़ जैसे कीटाणु, धूल, धुआँ आदि विकृत पदार्थ हमारे गले, श्वास नलिका या फेफड़ों में फँस जाते हैं तब हमारा शरीर उसे बाहर फेंकने के लिए सहज प्रतिक्रिया के रूप में खाँसी उत्पन्न करता है। उसी तरह जब इन बाहî चीज़ों के कारण हमारे गले Read More : खाँसी about खाँसी

शलभासन

शलभासन

मौसम कोई भी हो, चाहें गर्मी, सर्दी या बरसात, हमारी गलत दिनचर्या, गलत खान-पान, रहन-सहन, गलत श्वास-प्रश्वास प्रक्रिया, कमज़ोर पाचन शक्ति इत्यादि ऐसे कई कारण हैं जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर कर बीमारियों को आमंत्रित करते रहते हैं।

शरीर रूपी गाड़ी ठीक से चलती रहे और हम जि़ंदगी के सफर का आनन्द लेते रहें इसके लिए अति आवश्यक है कि हमारी श्वास-प्रश्वास प्रक्रिया जन्मपर्यन्त ठीक तरह से चलती रहे। श्वास प्रक्रिया को ठीक चलाने के लिए श्वसन प्रणाली, जिसमें नाक, श्वासनाल, श्वास नलिकाएं और फेफड़ों का महत्वपूर्व योगदान रहता है, का स्वस्थ होना अति आवश्यक है। Read More : शलभासन about शलभासन

घमोरियाँ

घमोरियाँ

गर्मियों के दिन शुरू होते ही ‘प्रिकली हीट‘ अर्थात् घमौरियों के कई विज्ञापन हमें टीवी पर देखने व सुनने को मिलते हैं। जैसे आया मौसम ठंडे ठंडे डर्मी कूल का और इनमें कई सारे विज्ञापन ‘टैल्कम पाउडर‘ संबंधी रहते हैं। प्रिकली हीट अर्थात् हमारी त्वचा में कई छोटी-छोटी स्वेद ग्रन्थियों के मुहँ बंद होने के कारण स्वेद (हीट) बाहर नहीं निकल पाती और यह छोटी-छोटी फुन्सियों का रूप धारण कर लेती है। Read More : घमोरियाँ about घमोरियाँ

विपरीतकरणी

विपरीतकरणी

रोग कोई भी हो, चाहे आँख का, कान का, गले का या फिर शरीर के किसी अन्य भाग से सम्बन्धित, ये हमारे गलत खान-पान, रहन-सहन व प्रदूषित वातावरण के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता के अभाव के फलस्वरूप ही होते हैं। Read More : विपरीतकरणी about विपरीतकरणी

घटते वजन के साथ घटती जिंदगी

घटते वजन के साथ घटती जिंदगी

अति हर चीज की बुरी होती है, फिर चाहे वो किसी भी चीज की हो। जिस प्रकार बढ़ता वजन सेहत के लिए नुकसानदायक है, उसी प्रकार वजन का हद से ज्यादा घटना भी जिंदगी के लिए घातक है। लेकिन आजकल के इस युग में जहां स्लिम-ट्रिम नज़र आना फैशन सिम्बल बन गया है, वहां दुबलेपन को इग्नोर करके चारों तरफ बस मोटापे से लड़ने व उससे जीतने के उपाय बताए जा रहे हैं।

फैशन की मार ने आज साइज जीरो को स्टाइलिश हीरो बना दिया है। इसके साथ ही बढ़ते वजन पर प्रचार-प्रसार ने भी दुबलेपन की समस्या को कहीं गुम कर दिया है। Read More : घटते वजन के साथ घटती जिंदगी about घटते वजन के साथ घटती जिंदगी

शीघ्रपतन

शीघ्रपतन

संभोग करते समय कम समय में शुक्र स्खलन हो जाना, मन में बुरी भावनाएँ उत्पन्न होने से शुक्र-वीर्य स्खलन होना मतलब शीघ्रपतन इन दिनों यह बीमारी बहुत ज्यादा प्रभाव दिखाने लगी है। Read More : शीघ्रपतन about शीघ्रपतन

मर्जरी आसन

मर्जरी आसन

जीवन के किसी भी पड़ाव में, चाहे बचपन हो, जवानी हो या फिर बुढ़ापा, इंसान खुशी व आनन्द की अनुभूति तब तक ही प्राप्त कर सकता है जब तक वो शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ है। शारीरिक क्षमता व मानसिक संतुलन बनाये रखने में योगाभ्यास काफी सहायक है। आसन व प्राणायाम शरीर को सक्रिय, शक्तिशाली एवं ऊर्जावान बना जीवन के हर क्षेत्र में सुन्दर प्रभाव डालते हैं। यौगिक क्रियाएँ शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से शरीर को ताकतवर, सुदृढ़ व सुन्दर बनाती हैं। आईये जाने इसे करने की विधि व लाभों के बारे में। Read More : मर्जरी आसन about मर्जरी आसन

अधोमुख श्वान आसन की योग विधि और लाभ

अधोमुख श्वान आसन की योग विधि और लाभ

बच्चे, नौजवान, व्यस्क, प्रौढ़ नर हों या नारी सभी को चाहत रहती है कि बाल काले, घने और चमकीले हों और ऐसा होना स्वाभाविक भी है। सुन्दर हेयर स्टाईल से ही तो चेहरे की रौनक बढ़ती है और व्यक्तित्व में निखार आता है।

छोटी उम्र में ही जब बाल टूटने और झड़ने शुरु हो जायें तो सही उपचार से बालों का टूटना, झड़ना रोक चेहरे की रौनक को बरकरार रखा जा सकता है।

बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं। जैसे-तनाव, पूर्ण-दिनचर्या, असंतुलित आहार, किसी बिमारी के चलते दवाईयों का प्रभाव, वंशानुगत या फिर अधिक गुस्सा करना भी बाल झड़ने का कारण हो सकता है। Read More : अधोमुख श्वान आसन की योग विधि और लाभ about अधोमुख श्वान आसन की योग विधि और लाभ

तनाव और इसके दुष्प्रभाव

आयुर्वेद के अनुसार स्ट्रेस, चिन्ता व तनाव को रसवह स्रोतस विकृति का कारण बताया गया है।

रसवाहिनी दुष्यन्ति चातिचिन्तनात (च.वि.5/13)

अर्थात : अत्यधिक चिंतन करने से रसवाही स्रोतस की विकृति होती है। रसवह स्रोतस का मूल हृदय और रसवाहिनी धमनियों को बताया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि इस स्रोतस में विकार उत्पन्न होने से हृदय व अन्य कई प्रकार के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। Read More : तनाव और इसके दुष्प्रभाव about तनाव और इसके दुष्प्रभाव

बालासन की योग विधि और लाभ

योग अनुशासित जीवन जीने की कला है, जिस में आसन, प्राणायाम, ध्यान इत्यादि ऋषियों-मुनियों द्वारा बताई गई वो कलायें हैं जिन को ठीक ढंग से दिनचर्या का अंग बना शरीर, मन व मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखा जा सकता है व मनुष्य तनाव रहित जिन्दगी जी सकता है।

योगाभ्यास के नियमित अभ्यास से तनाव के अतिरिक्त कई अन्य शारीरिक व मानसिक रोगों को भी दूर किया जा सकता है। प्रतिदिन योगाभ्यास करने से एक तरफ जहाँ तनाव कम होता है वहीं दूसरी ओर शरीर प्रसन्न व प्रफुल्लित रहता है। Read More : बालासन की योग विधि और लाभ about बालासन की योग विधि और लाभ

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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