पादहस्तासन की योगविधि और लाभ

पादहस्तासन की योगविधि और लाभ

हर इन्सान खुश रहना चाहता है, जीवन में ओगे बढ़ना चाहता है और चाहता है कि ये खुशी, ये यौवन हमेशा हमेशा के लिये बना रहे। परन्तु कटु सत्य ‘‘जो बना है उसे एक दिन नष्ट होना है’’ को नकारा नहीं जा सकता। हाँ इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। ऐसा ही कुछ मानव शरीर के साथ है। मानव शरीर की ठीक से देखभाल करने से, इसके ठीक रख-रखाव से युवावस्था को अधिक समय तक आगे बढ़ाया जा सकता है। इसे ठीक रखने के अनेकों उपायों में से एक सब से बढ़िया और सस्ता उपाय है ‘‘योगाभ्यास’’।

आसनों की श्रंखला में आज जिस आसन के बारे में बताया जा रहा है उसका नाम है ‘‘पादहस्तासन’’

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तनाव और सैक्सुअल हेल्थ

तनाव और सैक्सुअल हेल्थ

आजकल तनाव ने संक्रमणों को पीछे छोड़ दिया है, ऐसा माना जाता है कि आज तनाव दुनियाभर में सबसे बड़ा जानलेवा कारण बन गया है। जीवन का करीब-करीब हर दौर तनाव से प्रभावित है, सैक्सुअल हेल्थ भी इनमें से एक है। Read More : तनाव और सैक्सुअल हेल्थ about तनाव और सैक्सुअल हेल्थ

सरल आसन - गुणों की खान सेतुबन्ध आसन

सरल आसन - गुणों की खान सेतुबन्ध आसन

योग किसी भी आयु में किया जा सकता है। इतना ही नहीं योग से आयु संबंधी समस्याओं पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है। जानिए इस विचार को सेतुबंध आसन कैसे सिद्ध करता है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ वृद्धावस्था तक पहुँचते-पहुँचते पाचन शक्ति का कमज़ोर होना, स्नायु प्रणाली का असंतुलित/अनियंत्रित होना, श्वास लेने में दिक्कत, विसर्जन क्रिया, रक्त्त संचार ठीक से न होना ऐसे सत्य हैं। जिनसे बच पाना असंभव नहीं तो मुश्किल आवश्यक है। Read More : सरल आसन - गुणों की खान सेतुबन्ध आसन about सरल आसन - गुणों की खान सेतुबन्ध आसन

फटी एड़ियों के लिए आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद के अनुसार फटी एड़ियों का कारण बढ़ा हुआ वात है। एड़ियों में दर्द होना, बढ़े हुए वात दोष का लक्षण है। Read More : फटी एड़ियों के लिए आयुर्वेदिक उपचार about फटी एड़ियों के लिए आयुर्वेदिक उपचार

योग भगाये रोग

योग भगाये रोग

उष्ट्रासन पसलियों को मजबूत व फेफड़ों को स्वस्थ बनाता है तथा मधुमेह के रोगियों के लिये भी लाभकारी है।

हर व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहता है, खुश रहना चाहता है, सुखी रहना चाहता है। परन्तु भौतिक पदार्थों के प्रति अधिक लगाव और प्रकृति से बढ़ती दूरी के कारण उसका जीवन दिन प्रतिदिन नई-नई व्याधियों से घिरता चला जा रहा है।

खराब दिनचर्या, अंसतुलित खाने की आदत या फिर बाहरी वातावरण भी कुछ ऐसे कारण हैं। जिनकी वजह से शरीर में वात्, पित्त, कफ का संतुलन बिगड़ जाता है और सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। Read More : योग भगाये रोग about योग भगाये रोग

आमवात के लिए सरल घरेलू उपचार

आमवात के लिए सरल घरेलू उपचार

रूमेंटॉइड आर्थराइटिस (आर.ए.) एक ऑटोइम्यून रोग है, जो शरीर के विभिन्न अंगों के जोड़ों और उनके आसपास के ऊतकों (टिश्यूज़) को नुकसान पहुंचाता है। यदि यह स्थिति बहुत लम्बे समय तक रहती है, तो जोड़ों में विकार और जोड़ों या उनसे जुड़े अंगों में टेढ़ापन भी आ सकता है। जोड़ों पर सूजन होना, अकड़न हो जाना और दर्द रहना, इसके सामान्य लक्षण हैं। आयुर्वेद में इसे आमवात के नाम से जाना जाता हैं। Read More : आमवात के लिए सरल घरेलू उपचार about आमवात के लिए सरल घरेलू उपचार

हलासन कैसे करें?

हलासन कैसे करें?

हलासन शरीर के अधिकांश अंगों को स्वस्थ एवं मजबूत रखने में सहायक है। इस आसन के साथ सांसों का संयोजन इसे अधिक लाभप्रद बनाता है। हलासन या हल की मुद्रा। इसमें शरीर को हल का आकार दिया जाता है। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इस आसन के अभ्यास से मेरूदंड, पीठ की मांसपेशियां लचीली और क्रियाशील बनती हैं। जैसे हल कठोर जमीन को हल्का करके कृषि योग्य बनाता है उसी प्रकार यह आसन भी नसों और मांसपेशियों को लचीला बनाता है। Read More : हलासन कैसे करें? about हलासन कैसे करें?

भुजंगासन कैसे करें?

भुजंगासन कैसे करें?

कुण्डलिनी ऊर्जा के जागरण की अत्यन्त गोपनीय विधियों में से एक है भुजंगासन पूर्ण सूर्य नमस्कार की पांचवीं स्थिति, भुजंगासन, संस्कृत के शब्द ‘भुजंग’ से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ होता है ‘सर्प’ और आसन का अर्थ है ‘स्थिति’। इसे कोबरा सर्प की स्थिति (सर्पासन) भी कहा जाता है, यह आसन अधिक झुकाव की प्राथमिक नींव है। इस आसन में, पूरा शरीर कोबरा के सिर की तरह उठ जाता है, जो सर्पाकार कुण्डलिनी-मेरुदण्ड के आधार में कुण्डली के रूप में स्थित विभव ऊर्जा के जागरण का प्रतीकात्मक रूप होता है। अगर यह ठीक से किया जाये तो यह हमारी मेरुदण्ड और कमर के निचले भाग को शक्ति देता है। Read More : भुजंगासन कैसे करें? about भुजंगासन कैसे करें?

पवनमुक्तासन कैसे करें?

पवनमुक्तासन कैसे करें?

कमर दर्द, स्लिप डिस्क व हृदय रोग को दूर करता है पवन मुक्तासन । आइए जानते हैं पवन मुक्तासन को करने की विधि तथा लाभों के बारे में।

तैयारी -

सर्वप्रथम ऋतु अनुकूल आसन बिछाँए जिस पर पूरा शरीर हाथ-पैर फैलाने के बाद ठीक से आ सके तथा शुद्ध वायु का आवागमन भी हो। आसन करने से पहले कुछ हल्के सूक्ष्म व्यायाम करके शरीर को गर्मा लें। Read More : पवनमुक्तासन कैसे करें? about पवनमुक्तासन कैसे करें?

अर्धमत्सेंद्र आसन कैसे करें?

अर्धमत्सेंद्र आसन कैसे करें?

शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये, कुदरत ने ऐसी व्यवस्था की है कि हमारा शरीर अपने आप ठीक ढंग से काम करता रहे। व्यक्ति सही जीवनशैलीं का पालन कर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकता है। परंतु कई बार गलत खान-पान, तनाव तथा अन्य किसी कारण से ये सिस्टम बिगड़ जाता है। विकार पूर्ण रुप से शरीर से बाहर नही निकल पाते व विष रुपी मल शरीर में संचित होने लगता है। शरीर के अंदर कई बीमारियाँ पैदा हो जाती है। Read More : अर्धमत्सेंद्र आसन कैसे करें? about अर्धमत्सेंद्र आसन कैसे करें?

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
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