साइकिल चलाने के चमत्कारी फायदे

यदि आप वज़न घटाने की कोशिशों में लगे हुए हैं तो हमारी सलाह पर एक बार साइक्लिंग करके देखें. जल्द ही आप अपनी जान-पहचान के सबसे फ़िट लोगों में शुमार हो जाएंगे. 
आइए जानते हैं नियमित रूप से साइकिल चलाने के 7 फ़ायदे 

1. रोगप्रतिरोधक क्षमता होगी स्ट्रॉन्ग 
नियमित रूप से साइक्लिंग करने से इम्यून सिस्टम मज़बूत बनता है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैरोलाइना में एक रिसर्च के बाद पाया गया कि जो लोग सप्ताह में कम से कम पांच दिन आधा घंटा साइकिल चलाते हैं, उनके बीमार पड़ने की संभावना 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है.  Read More : साइकिल चलाने के चमत्कारी फायदे about साइकिल चलाने के चमत्कारी फायदे

कैसे बढ़ाओगे कॉन्सन्ट्रेशन पावर?

कैसे बढ़ाओगे कॉन्सन्ट्रेशन

जब तुम अपनी पसंद की फिल्म देखने जाते हो तो तीन घंटे उसी में आंखें गड़ाए बैठे रहते हो। उसी तरह क्रिकेट मैच में खाना-पीना छोड़कर एकटक उसे देखते रहते हो। तुम खुद को उसी में लगा देते हो, लेकिन पढ़ाई करते हुए ध्यान बंटने में ज्यादा टाइम नहीं लगता। अगर मीलों दूर म्यूजिक बज रहा हो तो जैसे पढ़ाई से ध्यान हटाने का बहाना मिल गया हो, तुम्हारा ध्यान तुरंत पढ़ाई से हट जाता है।

बेटे क्या यह हमारी संस्कृति है ?

एक लड़का पार्क में पेड़ के पीछे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ खड़ा था।

एक आदमी पास से गुज़रा और बोला:

बेटे क्या यह हमारी संस्कृति है ?

लड़का:
नहीं, अंकल यह तो मल्होत्रा अंकल की रीना है।
आप दूसरे पेड़ के पीछे चेक कीजिये।

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टिड्डियों के कुछ रोचक तथ्य

टिड्डियों के कुछ रोचक तथ्य

जानते हैं टिड्डियों के बारे में कुछ रोचक तथ्य :-

टिड्डियों को अंग्रेजी में Locusts कहा जाता है।

टिड्डियों की दुनिया भर में 10 हज़ार से ज़्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन भारत में मुख्य तौर से चार प्रजातियां रेगिस्तानी टिड्डा, प्रव्राजक टिड्डा, बम्बई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा ही पाई जाती है।

जब हरे भरे घास के मैदान में रेगिस्तानी टिड्डे इकठ्ठे होते हैं तो जुंड में भयानक हो जाते हैं, और वे हर भरे घास के मैदान को साफ कर सकते हैं।

इसलिए इन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक कीट कहा जाता है।

आसमान में उड़ते टिड्डी दलों में दस अरब टिड्डे तक हो सकते हैं। Read More : टिड्डियों के कुछ रोचक तथ्य about टिड्डियों के कुछ रोचक तथ्य

प्राचीन भारत की आश्चर्यजनक यौन संबंधी मान्यताएं क्या थी?

प्राचीन भारत की आश्चर्यजनक यौन संबंधी मान्यताएं रही हैं। यौन संबंधी पर लिखी सबसे मशहूर किताब भारत की ही है, इसलिए इसे कामसूत्र की धरती के नाम से जाना जाता है। हालांकि, आज भी हमारे समाज में सेक्स शब्द को एक टैबू ही माना जाता है, लेकिन आप अगर भारत का इतिहास देखेंगे तो आपको हैरानी होगी कि हमारे पूर्वज हमसे ज़्यादा आज़ाद ख्यालों वाले थे। सदियों पहले भारत में सेक्स टैबू नहीं था, बल्कि ज़िंदगी के जश्न मनाने का, ज़िंदगी को आनंद के साथ जीने का तरीका था। Read More : प्राचीन भारत की आश्चर्यजनक यौन संबंधी मान्यताएं क्या थी? about प्राचीन भारत की आश्चर्यजनक यौन संबंधी मान्यताएं क्या थी?

गोली खाइए, और शुक्राणुओं को 'नजरबंद' कीजिए

गोली खाइए, और शुक्राणुओं को 'नजरबंद' कीजिए

वो वक्त नजदीक आ रहा है जब पुरुष अपनी महिला साथी के गर्भ ठहर जाने की आशंका से परे सेक्स जीवन का भरपूर आनंद उठा पाएंगे.

इस बात की संभावना इसलिए जताई जा रही है क्योंकि आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोज लिया है, जिससे सेक्स संबंध पर असर डाले बगैर वीर्य स्खलन को कुछ देर के लिए स्थगित किया जा सकेगा.

जानवरों के साथ किए गए परीक्षण में पाया गया कि सेक्स के दौरान बन रहे शुक्राणुओं का "भंडारण" किया जा सकता है.

इस शोध के परिणाम राष्ट्रीय विज्ञान एकेडमी की पत्र-पत्रिकाओं में छपें. Read More : गोली खाइए, और शुक्राणुओं को 'नजरबंद' कीजिए about गोली खाइए, और शुक्राणुओं को 'नजरबंद' कीजिए

गमले में लगाई जाने वाली सब्जियों के लिए खाद व मिट्टी कैसे तैयार करते हैं?

गमले में लगाई जाने वाली

गमले में कुछ भी उगाना हो दो बातें विशेष ध्यान देने योग्य होती हैं ; एक तो यह कि गमला बहुत छोटा न हो ( कम से कम साईज़ 12 इंच हो) तथा दूसरी बात यह कि उसमें पर्याप्त ड्रेनेज होल हों। पानी तो ठहरना ही नहीं चाहिए गमले में। गमले में भरने के लिए नारियल का छिलका ( जटाएँ) , लकड़ी का बुरादा , कोकोपीट, लकड़ी का कोयला , थर्मोकूल के टुकड़े, ईंट का मोटा चूरा, साधारण मिट्टी, रेत ( बालू),गोबर की खाद ( या पत्तों कि खाद अथवा केंचुआ खाद ) , कोई अच्छा फंगीसाइड पाउडर , नीम कि खली , जिप्सम ( पी ओ पी पाउडर ) इत्यादि प्रयोग में लाये जा सकते हैं। Read More : गमले में लगाई जाने वाली सब्जियों के लिए खाद व मिट्टी कैसे तैयार करते हैं? about गमले में लगाई जाने वाली सब्जियों के लिए खाद व मिट्टी कैसे तैयार करते हैं?

ध्यान : संतुलन ध्यान

संतुलन ध्यान

तिब्बत में एक बहुत छोटी सी विधि है--बैलेंसिंग, संतुलन उस विधि का नाम है। कभी घर में खड़े हो जाएं सुबह स्नान करके, दोनों पैर फैला लें और खयाल करें कि आपके बाएं पैर पर ज्यादा जोर पड़ रहा है कि दाएं पैर पर ज्यादा जोर पड़ रहा है। अगर बाएं पर पड़ रहा है तो फिर आहिस्ते से जोर को दाएं पर ले जाएं। दो क्षण दाएं पर जोर को रखें, फिर बाएं पर ले जाएं।

 

एक पंद्रह दिन, सिर्फ शरीर का भार बाएं पर है कि दाएं पर, इसको बदलते रहें। और फिर यह तिब्बती प्रयोग कहता है कि फिर इस बात का प्रयोग करें कि दोनों पर भार न रह जाए, आप दोनों पैर के बीच में रह जाएं।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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