सिफलिस (उपदंश) क्‍या है

सिफलिस टी पैलिडम (T. Pallidum) बैक्‍टीरिया के संक्रमण से होता है जिसका पहला संकेत त्‍वचा पर हल्‍का दर्द होना होता है। यह यौन अंगों, गुदाशय या मुंह के अंदर हो सकता है। इसके मौखिक, गुदा या योनि संभोग जैसी यौन गतिविधि के दौरान फैल जाने की संभावना बहुत अधिक होती है।

इस बीमारी के सबसे पहले संकेत जननांग, गुदाशय, मुंह या त्‍वचा की सतह पर दर्द रहित फफोले उत्‍पन्‍न होते हैं। Read More : सिफलिस (उपदंश) क्‍या है about सिफलिस (उपदंश) क्‍या है

सिफलिस (उपदंश) के कारण लक्षण और उपचार

सिफलिस (उपदंश) एक यौन संक्रमित बीमारी है जो जीवाणु संक्रमण से होती है। शुरुआती चरणों में इसका इलाज संभव है। लेकिन यदि उपचार समय पर न कराया जाए तो यह बहुत से खतरों को जन्‍म दे सकता है, यह हमारे शरीरिक क्षमता में कमी और तंत्रिका संबंधी विकारों का कारण बन सकता है। यह रोग एक प्रकार के जीवाणु के द्वारा होता है जिसे ट्रेपेनेमा पैलिडम (Treponema pallidum) कहा जाता है। यह रोग, प्राथमिक, माध्‍यमिक और तृतीयक तीन चरणों में होता है। Read More : सिफलिस (उपदंश) के कारण लक्षण और उपचार about सिफलिस (उपदंश) के कारण लक्षण और उपचार

ट्राइकोमोनिएसिस से बचाव

जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि ट्राइकोमोनिएसिस यौन संचारित(sexually transmitted) बीमारी है इसलिए कुछ सावधानियां बरतकर इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह बचा जा सकता है।
ट्राइकोमोनिएसिस के संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छ और सुरक्षित सेक्स करें। सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करें ताकि जननांगों में किसी तरह का इंफेक्शन न होने पाये।
शारीरिक संबंध बनाने से पहले कंडोम सही तरीके से पहने ताकि यौन संबंध बनाने के दौरान कंडोम खिसके या निकले नहीं। (और पढ़े – कंडोम को निकालने का सही तरीका…)
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ट्राइकोमोनिएसिस का इलाज

इस बीमारी के लिए पीड़ित मरीज को एंटीबायोटिक्स दिया जाता है जिससे ट्राइकोमोनिएसिस बहुत आसानी से ठीक हो जाता है। आमतौर पर मोट्रोनिडाजोल (metronidazole) और टिनिडाजोल (tinidazole) ये दो एंटीबायोटिक्स ट्राइकोमोनिएसिस के इलाज के लिए मरीज को दिया जाता है। मेट्रोनिडाजोल लेने के 24 घंटे और और टिनोडाजोल लेने के 72 घंटे बाद तक मरीज को एल्कोहल का सेवन करने के लिए मना किया जाता है। अन्यथा इससे मरीज को भयंकर उल्टी हो सकती है या जी मिचला सकता है। Read More : ट्राइकोमोनिएसिस का इलाज about ट्राइकोमोनिएसिस का इलाज

ट्राइकोमोनिएसिस का निदान

ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण अन्य यौन संचारित संक्रमण (STI) की तरह ही होता है। लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर ही इस समस्या का निदान नहीं किया जा सकता है। संक्रमण का खतरा महसूस होने पर डॉक्टर सबसे पहले मरीज का शारीरिक परीक्षण करते हैं इसके बाद प्रयोगशाला में भी सैंपल लेकर कुछ विशेष जांच की जाती है। (और पढ़े – सबसे सामान्य योन संचारित रोग की जानकारी…)

इस बीमारी के निदान के लिए डॉक्टर योनि, जननांगों या मूत्रमार्ग से निकलने वाले तरल पदार्थों का सैंपल लेते हैं और उसका माइक्रोस्कोप की सहायता से परीक्षण करते हैं। Read More : ट्राइकोमोनिएसिस का निदान about ट्राइकोमोनिएसिस का निदान

पुरुषों में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण

मूत्रमार्ग (urethra) से स्राव होना।
पेशाब के दौरान जलन या स्खलन के दौरान जलन का अनुभव होना।
बार-बार पेशाब का अनुभव होना।
जननांगों में तेज खुजली और जलन होना। Read More : पुरुषों में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण about पुरुषों में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण

महिलाओं में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण

योनि से सफेद, भूरा, पीला, हरा और असामान्य गंध के साथ स्राव होना। 
योनि से खून बहना और जननांगों में स्पॉट पड़ जाना।
जननांगों में लालिमा और सूजन होना।
बार-बार पेशाब महसूस होना।
पेशाब के दौरान और शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द होना। Read More : महिलाओं में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण about महिलाओं में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण

ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण

आमतौर पर ज्यादातर महिलाओं एवं पुरुषों में ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण शुरूआत में नहीं पाये जाते हैं। एक स्टडी में पाया गया है कि ट्राइकोमोनिएसिस से पीड़ित सिर्फ 30 प्रतिशत लोगों में ही इस बीमारी के लक्षण दिखायी देते हैं। महिलाओं एवं पुरुषों को ट्राइकोमोनिएसिस का संक्रमण होने के करीब 5 से 28 दिनों बाद इसके लक्षण विकसित होने शुरू होते हैं। हालांकि कुछ लोगों में इससे भी ज्यादा समय के बाद लक्षण दिखायी देना शुरू होते हैं। आइये जानते हैं कि ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण क्या हैं। Read More : ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण about ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण

ट्राइकोमोनिएसिस से होने वाली जटिलताएं

  • इकोमोनिएसिस होने पर महिलाओं को कई जोखिम उठाना पड़ता है।
  • इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में समय से पहले डिलीवरी होने,
  • जन्म के बाद बच्चे का वजन सामान्य से अधिक कम होने और बच्चे में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
  • जन्म के बाद बच्चे का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है और बच्चे का शारीरिक विकास रूक जाता है।
  • इसके अलावा इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को एचआईवी एड्स होने की संभावना भी अधिक होती है।

ट्राइकोमोनिएसिस के कारण

ट्राइकोमोनिएसिस ट्राइकोमोनास वैजाइनालिस (Trichomonas vaginalis) नामक एक कोशिकीय प्रोटोजोआ जीव (protozoan organism) के कारण होता है। यह प्रोटोजोआ सेक्स के दौरान जननांगों के संपर्क में आने एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह रोग बहुत तेजी से होता है। ट्राइकोमोनिएसिस 14 वर्ष से 49 वर्ष तक की महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है। महिलाओं की योनि एवं मूत्रमार्ग में यह जीव संक्रमण उत्पन्न कर देता है। जबकि पुरुषों के सिर्फ मूत्रमार्ग में ही इंफेक्शन होता है। एक बार जब इंफेक्शन हो जाता है तो यह असुरक्षित रूप से जननांगों (genitals) के संपर्क में Read More : ट्राइकोमोनिएसिस के कारण about ट्राइकोमोनिएसिस के कारण

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