उपदंश (सिफलिस) का उपचार

प्राथमिक और माध्‍यमिक सिफलिस का उपचार पेनिसिलिन इंजेक्‍शन (penicillin injection) के द्वारा किया जा सकता है। पेनिसिलिन सबसे व्‍यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले एंटीबायोटिक्‍स में से एक है और आमतौर पर सिफलिस के इलाज में प्रभावी होते हैं। जो लोग पेनिसिलिन (penicillin) के लिए एलर्जी रखते हैं, उनके उपचार के लिए अन्‍य एंटीबायोटिक का उपयोग किया जाता है जैसे कि डॉक्‍सीसाइक्लिन (doxycycline), अजिथ्रोमाइसिन (azithromycin) और सेफटरियक्षोणें (ceftriaxone) आदि। Read More : उपदंश (सिफलिस) का उपचार about उपदंश (सिफलिस) का उपचार

सिफलिस (उपदंश) का परिक्षण कब किया जाए

बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता है कि उन्‍हें यौन संक्रमण (STI) है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए डॉक्‍टर से संपर्क करना ज्‍यादा बेहतर होता है। सामान्‍य रूप से आप इन परिक्षणों (testing) को उस समय करा सकते हैं जब Read More : सिफलिस (उपदंश) का परिक्षण कब किया जाए about सिफलिस (उपदंश) का परिक्षण कब किया जाए

सिफलिस (उपदंश) की जांच और निदान

सिफलिस की पुष्टि करने के लिए नैदानिक परीक्षण करने से पहले एक डॉक्‍टर शारीरिक परिक्षण (physical examination) करता है और रोगी के यौन संबंधों के बारे में पूछता है। यदि एसा लगता है कि आपको सिफलिस (syphilis) हो सकता है तो जितनी जल्‍दी हो सके डाक्‍टर के पास जाए। डाक्‍टर यह निर्धारित करने के लिए कुछ परिक्षण करेगा कि आपके शरीर में सिफलिस बैक्‍टीरिया (Bacteria) मौजूद है या नहीं। इन परिक्षणों में शामिल हैं :

रक्‍त परिक्षण (Blood tests) : वर्तमान या पिछले संक्रमण का पता लगाने के लिए रक्‍त परिक्षण किया जाता हैं, क्‍योंकि बीमारी के लिए एंटीबॉडी कई सालों तक आपके शरीर में उपस्थित रहते हैं। Read More : सिफलिस (उपदंश) की जांच और निदान about सिफलिस (उपदंश) की जांच और निदान

जन्‍मजात सिफलिस

आपके जीवन के लिए जन्‍मजात सिफलिस बहुत ही गंभीर हो सकता है। जन्‍म प्रक्रिया के दौरान मां इस संक्रमण को प्‍लेसेंटा के माध्‍यम से अपने भ्रूण में स्‍थानांतरित कर सकती है।

रिकार्डों से पता चलता है‍ कि स्‍क्रीनिंग और उपचार के बिना, सिफलिस 70 प्रतिशत महिलाओं में गर्भावस्‍था के समय प्रतिकूल प्रभाव छोड़ता है।

नवजात बच्‍चों (newborns) मे सिफलिस के लक्षणों में शामिल हैं : Read More : जन्‍मजात सिफलिस about जन्‍मजात सिफलिस

सिलफिस के तृ‍तीयक लक्षण

संक्रमण की शुरुआत के बाद तृतीयक सिफलिस 10 से 30 साल बाद हो सकता है, आमतौर पर इस अवधि के बीच इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

इसके लक्षणों में शामिल हैं :

दिल, रक्‍त वाहिकाओं, यकृत, हड्डियों और जोड़ों को नुकसान
गुमा (gummas) या ऊतकों में सूजन जो शरीर पर कहीं भी हो सकती है।
यह शरीर के अंगों को नुकसान भी पहुंचा सकता है मतलब तृतीयक सिफलिस अक्‍सर घातक हो सकता है। Read More : सिलफिस के तृ‍तीयक लक्षण about सिलफिस के तृ‍तीयक लक्षण

सिफलिस के प्राथमिक लक्षण

सिफलिस के प्राथमिक लक्षण

 प्राथमिक सिफलिस के लक्षण में चांसर्स (chancres) नामक एक या कई सिफिलिटिक घाव होते हैं। ये प्रारंभ होने के लगभग 3 सप्‍ताह बाद दिखाई देते हैं।

चांसर्स 3 से 6 सप्‍ताह के अंदर खुद ही गायब हो जाते हैं, लेकिन उपचार के बिना, यह रोग अपने अगले चरण में प्रगति कर सकता है। Read More : सिफलिस के प्राथमिक लक्षण about सिफलिस के प्राथमिक लक्षण

उपदंश (सिफलिस) के लक्षण

उपदंश (सिफलिस) के लक्षण

इसे चांसर्स (chancres) के नाम से भी जाना जाता है। सिफलिस (उपदंश) जो कि घावों के माध्‍यम से फैलता है। सिफलिस को प्रत्‍येक चरण से जुड़े विभिन्‍न लक्षणों के साथ तीन चरणों द्वारा वर्गीकृत किया जाता है।

  • हालांकि कुछ मामलों में कई सालों तक इसके कोई लक्षण (symptoms) नहीं दिखाई देते हैं।
  • संक्रामक चरणों (Infectious stages) में प्राथमिक, माध्‍यमिक और तृतियक चरण होते हैं।
  • तृ‍तीयक सिफलिस संक्रामक नहीं है, लेकिन इसमें सबसे ज्‍यादा खतरा होता है।
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सिफलिस होने का खतरा किन लोगों को है

यौन सक्रिय (Sexually active) लोगों को सिफलिस का खतरा होता है। इससे होने वाले खतरों में शामिल हैं :

जो लोग असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं।
वे पुरुष जो पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं।
एचआईवी संक्रमित लोगों के साथ संबंध बनाने से
कई साथीयों यौन भागीदारों वाले लोग
सिफलिटिक घाव भी एचआईवी के जोखिम में वृद्धि करते हैं Read More : सिफलिस होने का खतरा किन लोगों को है about सिफलिस होने का खतरा किन लोगों को है

उपदंश (सिफलिस) होने का कारण

सिफलिस रोग होने के बहुत से कारण है जिन्‍हें हम अक्‍सर नजर अंदाज कर देते हैं जो आगे चल कर हमारे लिए बहुत सी समस्‍याओं को बढ़ाने का कारण बनते हैं। Read More : उपदंश (सिफलिस) होने का कारण about उपदंश (सिफलिस) होने का कारण

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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