नई राष्ट्रीय जल नीति जरुरी

देश में पिछले 70 सालों में तीन राष्ट्रीय जल नीतियां बनी। पहली नीति 1987 में बनी जबकि 2002 में  दूसरीऔर 2012 में तीसरी जल नीति बनी। इसके अलावा 14 राज्‍यों ने अपनी जलनीति बना ली है। बाकी राज्य तैयार करनेकी प्रक्रिया में हैं। इस राष्ट्रीय नीति में "जल को एक प्राकृतिक संसाधन मानते हुए इसे जीवन, जीविका, खाद्य सुरक्षाऔर निरंतर विकास का आधार माना गया है।" नीति में जल के उपयोग और आवंटन में समानता तथा सामाजिकन्याय का नियम अपनाए जाने की बात कही गई है। मंत्रालय का कहना है कि भारत के बड़े हिस्से में पहले ही जलकी कमी हो चुकी है। जनसंख्यावृद्धि, शहरीकरण और जीवनशैली में बदलाव से जल की मांग तेजी से बढने के कारणजल सुरक्षा के क्षेत्र में  गंभीर चुनौतियों खडी हो गयी है। जल स्रोतों में बढता प्रदूषण पर्यावरण तथा स्वास्थ्य के लिएखतरनाक होने के साथ ही स्वच्छ पानी की उपलब्धता को भी प्रभावित कर रहा है। जल नीति में इस बात पर बल दिया गया है कि खाद्य सुरक्षा, जैविक तथा समान और स्थाई विकास के लिए राज्य सरकारों को सार्वजनिक धरोहर केसिद्धांत के अनुसार सामुदायिक संसाधन के रूप में जल का प्रबंधन करना चाहिए। हालाँकि, पानी के बारे में नीतियां,कानून तथा विनियमन बनाने का अधिकार राज्यों का है फिर भी जल संबंधी सामान्य सिद्धातों का व्यापक राष्ट्रीय जलसंबंधी ढाँचागत कानून तैयार करना समय की मांग है। ताकि राज्यों में जल संचालन के लिए जरूरी कानून बनाने औरस्थानीय जल स्थिति से निपटने के लिए निचले स्तर पर आवश्यक प्राधिकार सौंपे जा सकें। तेजी से बदल रहे हालतको देखते हुए नयी जल नीति बनाई जानी चाहिए। इसमें हर जरूरत के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता और जलप्रदूषित करने वाले को कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। 

 

जल की समस्या, आपूर्ति, प्रबंधन तथा दोहन के लिए सरकारी स्तर पर कई संस्थांऐं काम कर रही हैं। राष्ट्रीयजल मिशन तथा जल क्रांति अभियान अपने अपने स्तर पर अच्छा काम कर रहे हैं। मिशन का उद्देश्य जल संरक्षण,दुरुपयोग में कमी लाना और विकसित  समन्वित जल संसाधन और प्रबंधन द्वारा सभी को समान रूप से जल आपूर्तिसुनिश्चित करना है। अभियान गांवों और शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन, जन जागरण और आपूर्ति के काम में लगा है। 

कई देशों में आयोजित होते हैं ऐसे ही कार्यक्रम 

पानी के महत्व को सभी देशों ने पहचाना है। कनाडा, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, अमेरिका जैसे विकसित देश भीजल सप्‍ताह आयोजित करते हैं। सिंगापुर में तो यंग वाटर लीडर्स - 2016 के आयोजन में तीस देशों से आए 90 सेअधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और पानी के मुद्दे पर गहन चर्चा की। भारत में 10 से 14 अक्तूबर, 2017 के दौरान होने वाले भारत जल सप्‍ताह - 2017 मे इस बार सहयोगी देश के रूप में हालैंड शामिल हो रहा है। उम्मीद की जानीचाहिए कि जल क्षेत्र में हालैंड का लाभ भारत को आने वाले दिनों में जरुर मिलेगा। 

http://www.pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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