भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है

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भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। सामवेद में संगीत के बारे में गहराई से चर्चा की गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत गहरे तक आध्यात्मिकता से प्रभावित रहा है, इसलिए इसकी शुरुआत मनुष्य जीवन के अंतिम लक्ष्य 'मोक्ष' की प्राप्ति के साधन के रूप में हुई। संगीत की महत्ता इस बात से भी स्पष्ट है कि भारतीय आचार्यों ने इसे 'पंचम वेद' या 'गंधर्व वेद' की संज्ञा दी है। भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' पहला ऐसा ग्रंथ था, जिसमें नाटक, नृत्य और संगीत के मूल सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया था। Read More : भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है about भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है

अजवाइन के फायदे

अजवाइन के फायदे

अजवाइन (Ajwain) को हमने हमेशा ही घरों में मसाले के रूप में उपयोग करते हुए देखा है। लेकिन इसमें मौजूद कैल्शियम, पोटैशियम, फास्फोरस, आयोडीन, केरोटिन जैसे तत्व हमें कई हेल्थ बेनिफिट्स देते हैं। अगर नियमित रूप से सुबह आधा चम्मच अजवाइन उबालकर पिएंगे तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओ को दूर किया जा सकता है अगर आपको अपना बचपन याद हो तो आपने कभी ना कभी पेट का समस्या होने पर अजवाइन का सेवन जरुर किया होगा अजवाइन के फायदे बहुत है जिनका उपयोग कर आप बहुत सारी समस्याओ से बच सकते है Read More : अजवाइन के फायदे about अजवाइन के फायदे

कद्दू के औषधीय गुण

कद्दू के औषधीय

कद्दू का रस भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह मूत्रवर्धक होता है और पेट संबंधी गड़बड़ियों में भी लाभकारी रहताहै। यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और अग्नयाशय को भी सक्रिय करता है। इसी वजह से चिकित्सक मधुमेह के रोगियों को कद्दू के सेवन की सलाह देते हैं। Read More : कद्दू के औषधीय गुण about कद्दू के औषधीय गुण

अजवायन की खेती कैसे करे

अजवायन की खेती कैसे करे

भूमि अजवाइन एक रबी की मसाला फसल हैं। इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिटटी सर्वोत्तम होती हैं। सामान्यतः बलुई दोमट मिटटी जिसका पि.एच. मान 6.5 से 8.2 तक है, में अजवाइन सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। जहां भूमि में नमी कम हो वहां सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक हैं।

 
खेती की तैयारी: खेत तैयार करने के लिए मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करें तथा इसके बाद 2 जुताई देशी हल से कर खेत को भली-भांति तैयार करें। अजवाइन का बीज बारीक़ होता हैं। अतः खेत की मिट्टी को अच्छी तरह भरभूरा होने तक जुताई करें। Read More : अजवायन की खेती कैसे करे about अजवायन की खेती कैसे करे

शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं

शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं

शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं जिसका घटक सिर्फ एक बीज ही हैं और वो हैं ब्रयोनोप्सिस लेसिनियोसा का बीज जिसे समान्यतया शिवलिंगी कहा जाता हैं। शिवलिंगी बीज का प्रयोग पुरे देश में प्रजनन क्षमता बढ़ाने और स्त्रियों के रोग विकारो को दूर करने के लिए किया जाता हैं,इसका प्रयोग स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए भी किया जाता हैं। इसके अलावा शिवलिंगी बीज लिवर, श्वसन, पाचन तंत्र, गठिया, चयापचय विकारों और संक्रामक रोगों के लिए भी लाभदायक हैं,साथ में इसके सेवन से इम्युनिटी भी बढ़ती हैं। महिलायो में बाँझपन की समस्या मुख्यता हार्मोन्स के असन्तुलन की वजह से होती हैं पर शिवलिंगी बीज हार्मोन्स का संतुलन बनाये रखन Read More : शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं about शिवलिंगी बीज एक आयुर्वेदिक औषधि हैं

नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन

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सुप्त का अर्थ होता है सोया हुआ अर्थात वज्रासन की स्थिति में सोया हुआ। इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है, इसिलिए इस आसन को सुप्त-वज्रासन कहते है, जबकि वज्रासन बैठकर किया जाता है

विधिः 

१.      वज्रासन में बैठकर हाथों को पाश्व भाग में रखकर उनकी सहायता से शरीर को पीछे झुकाते हुए भूमि पर सर को टिका दीजिये। घुटने मिले हुए हों तथा भूमि पर ठीके हुए हों। 
२.      धीरे-धीरे  कंधो,ग्रीवा एवं पीठ को भूमि पर टिकाने का प्रयत्न कीजिये।  हाथों को जंघाओं पर सीधा रखे। 
३.      आसन को छोड़ते समय कोहनियों एवं हाथों का सहारा लेते हुये वज्रासन में बैठ जाइए।  Read More : नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन about नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन

तिल तेल अमृत

तिल तेल अमृत

तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... 
आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... 
लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. Read More : तिल तेल अमृत about तिल तेल अमृत

नदी में बसे सहस्त्रलिंगो का रहस्य

नदी में बसे सहस्त्रलिंगो का रहस्य

इतिहास में पहली बार -भारतीय नदी में  छिपे रहस्ये !
भारत के कर्नाटक राज्य की शिकरी नदी का जल स्तर नीचा हो जाने से नदी में बसे हजारों शिवलिंगों का उदभव हुआ.
हजारो लिंगो को नदी का जल स्तर कम होने पर देखा गया
शिव जो हिन्दुओ में सबसे लोक प्रिये और परिचित देव हैं. अधिकतर मंदिरों में शिवलिंग स्थापित हैं. यह शक्ति और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। 
शिवलिंग की पूजा केवल भारत तक ही सीमित नहीं था। शिवलिंग रोमन जो यूरोपीय देशों के लिए शिवलिंग की पूजा की जाती है
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प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा

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इस थेरेपी के अनुसार, भोजन प्राकृतिक रूप में लिया जाना चाहिए। ताज़े मौसमी फल, ताज़ी हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित भोजन बहुत ही लाभकारी हैं। ये आहार मोटे तौर पर तीन प्रकार में विभाजित हैं जो इस प्रकार हैं: Read More : प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा about प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा

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शशकासन योग के फायदे

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शशक का का अर्थ होता है खरगोश। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की खरगोश जैसी आकृति बन जाती है इसीलिए इसे शशकासन कहते हैं। इस आसन को कई तरीके से किया जाता है यहां प्रस्तुत है सबसे सरल तरीका।

आसन विधि : सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें। कंधों को कानों से सटा हुआ महसूस करें। फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें। फिर माथा भी भूमि पर टिका दें। कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर पुनः वज्रासन की‍ स्थिति में आ जाइए। Read More : शशकासन योग के फायदे about शशकासन योग के फायदे

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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