ठण्डी पट्टी

जब ठंडे पानी की पट्टी की जाती है तब उस पट्टी के ऊपर दूसरा सूखा कपड़ा आदि नहीं लपेटा जाता है। ठंडे पानी की पट्टी को हर 2 से 5 मिनट पर बदला जाता है या पट्टी के ऊपर ठंडे पानी को छिड़का जाता है। यदि रोग ऐसे अंग में हो जिसे पानी में डुबोया जा सके, तो रोगी के अंग पर पट्टी बांधने की आवश्यकता नहीं होती। इसका लाभ पट्टी के समान ही होता है।
 

ठंडे पानी के पट्टी से रोग में लाभ-
          ठंडे पानी की पट्टी से सभी प्रकार के दर्द, जलन आदि दूर होते हैं। यह पट्टी मोच, सूजन, टपकन, आग से जलने पर, जहरीले जानवरों के काटने पर, हड्डी आदि टूटने पर, चोट लगने पर तथा जख्मों पर लाभकारी होती है। हथियार से किसी अंग के कटने पर ठंडे पानी से पट्टी करने पर दर्द आदि दूर होते हैं। फोड़े आदि के दर्द में भी यह लाभकारी है। पट्टी करते समय ध्यान रखें कि दर्द जितना अधिक हो पट्टी उतनी अधिक मोटी लगानी चाहिए। यदि हड्डी के टूटने पर दर्द हो रहा है, तो पहले दर्द वाले स्थान पर पट्टी करके दर्द ठीक करें, फिर टूटी हुई हड्डी को लकड़ी की तख्ती के साथ बांधकर दोबारा हड्डी की पट्टी करें। यदि दर्द अधिक तेज हो तो पट्टी लगे हुए ही टूटी हड्डी वाले अंग को ठंडे पानी में डुबोकर हिलाएं। साथ ही थोड़ी-थोड़ी देर पर पट्टी को दबाकर उसका पानी निचोड़ते रहें। इससे पट्टी में साफ पानी पहुंचता है और दर्द में जल्द आराम मिलता है। जलपट्टी में अधिक ठंडे पानी का प्रयोग करें। परन्तु ध्यान रखें कि इसके लिए बर्फ वाली पट्टी का प्रयोग न करें। यदि दर्द जल्दी ठीक न हो तो पट्टी को अधिक देर तक बांधे और बार-बार उस पट्टी पर ठंडा पानी डालते रहें। कभी-कभी अधिक कसकर पट्टी बांधने से दर्द तेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में पट्टी ढीली करके ही रखें। यदि दर्द में कमी न आए तो पट्टी पर लगातार ठंडे पानी की धार छोड़नी चाहिए। इससे अधिक से अधिक तेज दर्द भी जल्दी से ठीक होता है। अधिक तेज दर्द को ठीक करने के लिए दर्द वाले स्थान पर पट्टी बांधकर उस पर गर्म व ठंडे पानी की धार बारी-बारी से छोड़ें। इससे किसी भी प्रकार का दर्द ठीक हो जाता है।
          ठंडे पानी की पट्टी लगाकर उपचार करने पर यदि रोग या दर्द आदि ठीक हो जाता है, तो उस पट्टी को खोल लेना चाहिए। ऐसा न करने पर उस अंग में खून का बहाव रुकने लगता है, जिससे अंग में सुन्नता आ सकती है। यदि पट्टी को लम्बे समय तक रोगों को दूर करने के लिए लगाया गया हो तो पट्टी को बीच-बीच में खोलकर उस पूरे अंग में खून का संचार होने दें। पट्टी को रोग वाले स्थान से खोलने के बाद उस स्थान को रगड़ कर या 2 से 3 मिनट सिंकाई करके गर्म कर देना चाहिए। फिर पट्टी को लगभग 6 मिनट के लिए खुला रखें, इसके बाद पुन: पट्टी बांध दें। साधारण दर्द में पट्टी दर्द वाले स्थान के अतिरिक्त आस-पास के कुछ स्थान पर रखें। ध्यान रखें कि पट्टी लगाते समय पट्टी की मोटाई आधा इंच रहें। इससे पट्टी अपने स्थान से खिसकती नहीं। यदि घाव या कटे हुए अंग पर पट्टी करनी हो तो पहले उस जख्म पर नारियल या अन्य मीठे तेल से भीगा हुआ कपड़ा रख दें, फिर उस पर पट्टी करें। यदि कोई रोगी कमजोर हो और उसका शरीर ठंडा पड़ गया हो या उसका स्वाभाविक शारीरिक तापमान कम हो तो ठंडे पानी की गीली पट्टी के स्थान पर गुनगुने पानी की पट्टी की जा सकती है। चोट लगने पर यदि खून अधिक निकल रहा हो तो ठंडे पानी की पट्टी लगाने से खून तुरन्त बंद हो जाता है।

 

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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