प्रतिश्‍याय

यह रोग अधिक ठंड लगने, मीठी वस्तुओं को खाने के बाद पानी पीने से, मौसम परिवर्तन आदि के कारण उत्पन्न होता है। इस रोग में रोगी को हल्का बुखार, शरीर में दर्द, भूख का न लगना, शारीरिक कमजोरी तथा सिर दर्द आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। इस रोग में कभी-कभी खांसी भी उत्पन्न होती है। इस रोग के पुराने हो जाने पर रोगी को अधिक कष्ट होता है। इस रोग में शरीर  में कमजोरी तथा शीत और गर्मी के प्रति असहनशीलता उत्पन्न होती है। इस रोग में मन्दाग्नि (भूख न लगना) जैसे लक्षण भी प्रकट होते हैं।
जल चिकित्सा द्वारा जुकाम का उपचार-
          जुकाम को दूर करने के लिए पहले शरीर को धीरे-धीरे खुली हवा को को बर्दाश्त करने की आदत बनानी चाहिए। ठंड और गर्मी के प्रति शारीरिक क्षमता बनाए रखनी चाहिए।
• जुकाम को दूर करने के लिए शरीर से पसीने निकालने वाली क्रिया करनी चाहिए। 
• जुकाम में ´गीली चादर का लपेट´ करने से तुरन्त लाभ मिलता है।
• जुकाम में लाभ के लिए ´सम स्नान´ सप्ताह में 1 से 2 बार रात को सोते समय करना चाहिए।
• जुकाम होने पर सुबह उठकर ठंडे जल से स्नान करना चाहिए। 
• सर्दी के मौसम में धूप में बैठकर शरीर पर तेल की मालिश करनी चाहिए।
• जुकाम को दूर करने के लिए कुछ शारीरिक व्यायाम जैसे- टहलना, तैरना आदि करने चाहिए। 
• जुकाम में अधिक ठंडे पदार्थों का सेवन न करें तथा संयमित पौष्टिक और आसानी से पचने वाले भोजन का सेवन करें।
• चेहरे और नाक की जकड़न को दूर करने के लिए चेहरे पर गर्म-ठंडे पानी की पट्टी करें। रीढ़ पर भी गर्म-ठंडे जल की पट्टी करनी चाहिए।
• जुकाम में जल्द लाभ के लिए ´जलनेति´ क्रिया करनी चाहिए। परन्तु ध्यान रखें कि इस क्रिया को सावधानी से चिकित्सक की सलाह लेकर करें।
सावधानी-
          जुकाम सामान्य रूप से फेफड़ों के विकार को निकालकर फेफड़ों को साफ करता है। अत: उस विकार को रोकने से रोग बढ़ सकता है। इसलिए जुकाम उत्पन्न होने पर 1-2 दिन के बाद उसे दूर करने का उपचार करें तथा जुकाम शुरू होने पर पहले ठंडे पानी से स्नान करें और खुली हवा में घूमने की आदत बनाएं।

जुकाम (प्रतिश्याय) का शर्तिया इलाज़ एक चम्मच मधु लेकर उसे गुनगुना कर उसमे एक चौथाई चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन तीन बार चाटने से किसी भी प्रकार का जुकाम ठीक हो जाता है | इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की पुरानी खांसी , जुकाम थोड़ी ही देर में ठीक हो जाता है तथा जुकाम के कारण गला सूखता हो तो भी आराम मिलता है | -

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा शुद्धि कर्म, जल चिकित्सा, ठण्डी पट्टी, मिटटी की पट्टी, विविध प्रकार के स्नान, मालिश्‍ा प्राकृतिक चिकित्सक, पोषण चिकित्सा, भौतिक चिकित्सा, वानस्पतिक चिकित्सा, आयुर्वेद आदि पौर्वात्य चिकित्सा, होमियोपैथी, छोटी-मोटी शल्यक्रिया, मनोचिकित्सा,  जल चिकित्सा, होमियोपैथी, सूर्य चिकित्सा, एक्यूपंक्चर, एक्यूप्रेशर, मृदा चिकित्सा, उष्ण टावल से स्वेदन, कटि स्नान, टब स्नान, फुट बाथ, परिषेक, वाष्प स्नान, कुन्जल, नेति आदि का प्रयोग वात जन्य रोग पक्षाद्घात राधृसी, शोध, उदर रोग, प्रत

इस थेरेपी के अनुसार, भोजन प्राकृतिक रूप में लिया जाना चाहिए। ताज़े मौसमी फल, ताज़ी हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित भोजन बहुत ही लाभकारी हैं। ये आहार मोटे तौर पर तीन प्रकार में विभाजित हैं जो इस प्रकार हैं: Read More : प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा about प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली खुराक चिकित्सा

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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