बोल कर टाइप किया है कभी?

बोल कर टाइप किया है कभी?बोल कर टाइप किया है कभी?

अपने स्मार्टफोन पर अगर आपको टाइपिंग करने में अधिक समय लगता है तो आपके पास दो विकल्प हैं. आप चाहें तो अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करके उसको लिखित शब्दों में बदल लें या फिर हैंडराइटिंग टूल का इस्तेमाल करें.

बोले हुए शब्दों की मदद से टाइपिंग आसान नहीं है, ख़ास तौर पर हिंदी में. अंग्रेजी में भी बोले हुए शब्दों के उच्चारण को समझने में आपका फ़ोन गड़बड़ियाँ करता है.

अगर गूगल वॉइस आपके काम नहीं आता है तो अपनी हैंडराइटिंग से टाइपिंग कर सकते हैं. Read More : बोल कर टाइप किया है कभी? about बोल कर टाइप किया है कभी?

व्यायाम से बढ़ता है दिमाग़

व्यायाम से बढ़ता है दिमाग़

कैब्रिज़ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के ताज़ा शोध में पता चला है कि नियमित व्यायाम से मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.

शोध के नतीज़े नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस की पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं. इसके मुताबिक़ चूहों पर किए गए स्मृति परीक्षण में व्यायाम का काफ़ी असर पड़ा.

जिन चूहों ने व्यायाम किया उनके मस्तिष्क के एक ख़ास हिस्से में नई कोशिकाएँ विकसित हुईं जबकि व्यायाम न करने वाले चूहों में ऐसा नहीं हुआ.

नई कोशिकाएँ

अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि चीज़ों को पहचानने की क्षमता में आए सुधार के पीछे इन नई कोशिकाओं का ही हाथ है. Read More : व्यायाम से बढ़ता है दिमाग़ about व्यायाम से बढ़ता है दिमाग़

पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज़ हो जाता है?

औरतों में माहवारी एक बुनियादी अमल है. यही क़ुदरती अमल उसे समाज में औरत का दर्जा दिलाता है. कहना ग़लत नहीं होगा कि इंसानी कायनात का दारोमदार इसी पर टिका है.

माहवारी से पहले और उसके दौरान महिला की अपने शरीर और ख़ुद से लड़ाई चलती रहती है. उसके मिज़ाज में बहुत से बदलाव नज़र आने लगते हैं. प्राचीन काल में इसे औरत को पड़ने वाले दौरे के तौर पर देखा जाता था.

यहां तक कि मिस्र से लेकर ग्रीस के दार्शनिकों का मानना था कि हर महीने औरत के मन में सेक्सुअल डिज़ायर का उफ़ान उठता है. जब ये डिज़ायर पूरी नहीं होती तो उसके शरीर से ख़ून का रिसाव शुरू हो जाता है. Read More : पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज़ हो जाता है? about पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज़ हो जाता है?

अगर हम सब दिमाग़ बढ़ाने वाली गोली लेने लगें तो क्या होगा?

अगर हम सब दिमाग़ बढ़ाने वाली गोली लेने लगें तो क्या होगा?

फ़्रांस के मशहूर उपन्यासकार होनोरे डि बाल्ज़ाक मानते थे कि कॉफ़ी दिमाग़ को खोल देता है.

बाल्ज़ाक हर शाम पेरिस की गलियों को छानते हुए उस कैफे तक पहुंचते थे जो आधी रात के बाद तक खुला रहता था. कॉफ़ी पीते हुए वे सुबह तक लिखते रहते थे.

कहा जाता है कि बाल्ज़ाक एक दिन में 50 कप कॉफ़ी पी जाते थे.

भूख लगने पर बाल्ज़ाक चम्मच भर कॉफ़ी के दानों को चबा लेते थे. उन्हें लगता था कि ऐसा करने से उनके दिमाग़ में विचार ऐसे कौंधते हैं जैसे जंग के खाली मैदान में सेना की बटालियन मार्च करते हुए चली आ रही हो. Read More : अगर हम सब दिमाग़ बढ़ाने वाली गोली लेने लगें तो क्या होगा? about अगर हम सब दिमाग़ बढ़ाने वाली गोली लेने लगें तो क्या होगा?

डीएनए के धागों से वंश की तलाश

डीएनए

बीबीसी को पता चला है कि अमरीका और पश्चिमी यूरोप में गोद लिए गए पुरुष डीएनए जाँच से अपने वंशजों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और वाई क्रोमोसोम की मदद से इसमें सफलता भी पा रहे हैं.

ये लोग इस तथ्य का सहारा ले रहे हैं कि एक जैसे उपनाम रखने वाले लोगों के बीच कभी-कभी आनुवांशिक समानताएँ मिल जाती हैं.

डीएनए के 'डाटाबेस' से ये उन पुरुषों की पहचान करते हैं जिनकी आनुवांशिक पहचान उनसे भी मेल खाती हों और तब वो यह देखते हैं कि क्या उनके अंतिम नाम भी एक हैं. Read More : डीएनए के धागों से वंश की तलाश about डीएनए के धागों से वंश की तलाश

अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा कचरा किसने फैलाया

अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा कचरा किसने फैलाया

नासा (द नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) ने भारत की एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण से निकले मलबे से इंटरनेशनल स्पेस सेंटर (आईएसएस) को पैदा हुए ख़तरे को भयानक बताया है.

नासा प्रमुख जिम ब्राइडेन्स्टाइन ने कहा कि भारत ने जिस उपग्रह को निशाने पर लिया वो कई टुकड़ों में टूट गया.

उनका कहना है कि इनकी संख्या 400 से भी अधिक है और इससे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ख़तरा पैदा हो गया है.

नासा टाउनहॉल में ब्राइडेन्स्टाइन ने बताया कि इससे पैदा हुए ज़्यादातर टुकड़े बड़े हैं. उन्होंने कहा कि नासा ने छोटे टुकड़ों को ट्रैक किया है और बड़े टुकड़ों को खोज की जा रही है. Read More : अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा कचरा किसने फैलाया about अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा कचरा किसने फैलाया

'ऑरगैनिक खाने से ख़ास फ़ायदा नहीं'

ऑरगैनिक खाने से ख़ास

एक स्वतंत्र शोध के मुताबिक़ आम भोजन के बजाय अगर आप ऑरगैनिक यानी जैविक भोजन खाते हैं तो वह कुछ ख़ास स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता.

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं की मानें तो दोनों तरह के भोजन की पौष्टिकता में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है और इस बात के सुबूत नहीं है कि ऑरगैनिक खाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद होगा.

ब्रिटेन की खाद्य मानक एजेंसी ने यह शोध करवाया है. एजेंसी के मुताबिक इस शोध की रिपोर्ट लोगों को सही फ़ैसला लेने में मदद करेगी.

शोधकर्ताओं ने पिछले 50 वर्षों में पौष्टिकता और स्वास्थ्यवर्धन से जुड़े सुबूतों का अध्ययन किया. Read More : 'ऑरगैनिक खाने से ख़ास फ़ायदा नहीं' about 'ऑरगैनिक खाने से ख़ास फ़ायदा नहीं'

Pages

जवाब विशेषज्ञ से लें

Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
  • सेक्स टाइम कैसे बढ़ाएं
  • लिंग का साइज कैसे बढ़ाएं
  • लिंग को बड़ा लम्बा और मोटा करने के घरेलू उपाय
  • सेक्स की फीलिंग को कैसे बढ़ाए
  • ओरल सेक्स कैसे करें

इस प्रकार सवालों का जवाब विशेषज्ञ से लें

सलाह शुल्क ₹500 है जिसमें आप हर सप्ताह व्हाट्सएप पर बात करके अपनी समस्या को व्यवस्थित तरीके से हल कर सकते हैं

A/c Name: Pradeep Kumar
A/c No: 5547297104
IFSC : kkbk0005321
Bank: Kotak Mahindra Bank

 
1 Start 2 Complete
Files must be less than 2 MB.
Allowed file types: gif jpg jpeg png bmp tif pict txt rtf pdf doc docx.