ह्यूमस की प्राप्ति के दो स्रोत हैं

किसी एक भूमि में बारबार फसल के उगाने और उसमें खाद न देने से कुछ समय के बाद भूमि अनुत्पादक और ऊसर हो जाती है। भूमि की उर्वरता के नाश होने का प्रमुख कारण भूमि से उस पदार्थ का निकल जाना है जिसका नाम 'ह्यूमस (Humus) दिया गया है। ह्यूमस कार्बनिक या अखनिज पदार्थ है जिसकी उपस्थिति से ही भूमि उर्वर होती है। वस्तुतः ह्यूमस वानस्पतिक और जांतव पदार्थों के विघटन से बनता है। सामान्य हरी खाद, गोबर, कंपोस्ट इत्यादि खादों और पेड़ पौधों, जंतुओं और सूक्ष्म जीवाणुओं से यह बनता है। ह्यूमस के अभाव में मिट्टी मृत और निष्क्रिय हो जाती है और उसमें कोई पेड़ पौधे नहीं उगते।

ह्यूमस में पेड़-पौधों के आहार ऐसे रूप में रहते हैं कि उनसे पेड़ पौधे अपना आहार जल्द ग्रहण कर लेते हैं। उसके अभाव में पेड़-पौधे अच्छे फलते-फूलते नहीं हैं। मिट्टी के खनिज अंश में भी कुछ ह्यूमस रह सकता है पर वह सदा ही ऐसे रूप में नहीं रहता कि पौधे उससे लाभ उठा सकें ह्यूमस से मिट्टी की भौतिक दशा अच्छी रहती है ताकि वायु और जल उसमें सरलता से प्रवेश कर जाते हैं इससे मिट्टी भुरभुरी रहती है। एक और जहाँ ऐसी मिट्टी नमी का अवशोषण कर उसको रोक रखती है वहाँ दूसरी ओर आवश्यकता से अधिक जल को निकाल देने में भी समर्थ होती है। ह्यूमस से मिट्टी में बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीवाणुओं के बढ़ने और सक्रिय होने की अनुकूल स्थिति उत्पन्न हो जाती है और इस प्रकार पौधों के पोषक तत्व की प्राप्ति में सहायता मिलती है। वस्तुत: पौधों के आहार प्रस्तुत करने का ह्यूमस एक प्रभावकारी माध्यम होता है। बलुआर मिट्टी में इसके रहने से पानी रोक रखने की क्षमता बढ़ जाती है जिससे बलुआर मिट्टी का सुधार हो जाता है और मटियार मिट्टी में इसके रहने से उसका कड़ापन कम होकर उसे भुरभुरी होने में इससे सहायता मिलती है।

ह्यूमस की प्राप्ति के दो स्रोत हैं, एक प्राकृतिक और दूसरा कृत्रिम। प्राकृतिक स्रोत मं वायु और वर्षा के जल से कुछ ह्यूमस मिट्टी को प्राप्त हो सकती है। कृत्रिम स्रोत है मिट्टी में हरी खाद, गोबर खाद, कंपोस्ट आदि डालना। खनिज उर्वरकों से ह्यूमस नहीं प्राप्त होता। अत: केवल कृत्रिम उर्वरक डालकर खेतों को उपजाऊ नहीं बनाया जा सकता। उर्वरकों के साथ-साथ ऐसी खाद भी कुछ अवश्य रहनी चाहिए जिससे मिट्टी में ह्यूमस आ जाए। ह्यूमसवाली मिट्टी काले या भूरे रंग की, भुरभुरी एवं सछिद्र होती है और उसमें जल अवशोषण की क्षमता अधिक रहती है। (फूलदेव सहाय वर्मा)

 

 

 

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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