स्वास्थ्य एवम् चिकित्सा विज्ञान

क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?

क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में हर काम फ़टाफ़ट होना चाहिए. तो, खान-पान ही तसल्ली से क्यों हो? फल खाने में वक़्त क्यों ज़ाया किया जाए?

फलों का जूस निकाला, पिया और चल पड़े काम पर. समय भी बचेगा और सेहत का भी भला होगा.

वाक़ई?

क्या फलों का रस निकालकर पीना वाक़ई सेहतमंद है?

आज कामकाजी लोगों के बीच फलों का रस पीने का बहुत चलन है. व्यस्तता के बीच चबाकर खाने के लिए वक़्त जो नहीं है. Read More : क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है? about क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?

क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

जब किसी आदमी को नया दिल लगाया जाता है, तो उसका दिमाग़ भी असामान्य रूप से बदल जाता है. क्यों?

इससे हमारे पूरे शरीर के बारे में हैरान करने वाले तथ्यों का पता चला.

कार्लोस (बदला हुआ नाम) के शरीर में एक छोटा यांत्रिक पंप (दूसरा दिल) लगाया गया था ताकि उसके दिल की कमज़ोर हो चुकी मांसपेशियों का बोझ कम किया जा सके.

कार्लोस को अपने पेट पर एक हल्की 'टक्कर' महसूस होती थी जो उनके दूसरे दिल की धड़कन थी.

ऐसा लगता था कि मशीन की थाप ने उनकी नब्ज की जगह ले ली हो. जब नाभि के ऊपर मशीन धड़कती तो कार्लोस को ऐसा लगता कि उनके दिल को पेट के निचले हिस्सा में गिरा दिया गया है. Read More : क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़? about क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

आप 'टालूराम' हैं तो ये ज़रूर पढ़ें

आप 'टालूराम' हैं तो ये ज़रूर पढ़ें

क्या आपको काम टालने की आदत है? काम पूरा करने में अक्सर देर हो जाती है? मैं तो अक्सर काम टालती थी, काम पूरा करने में देर लगाती थी.

इसलिए मैने तय किया है कि मैं दिमाग़ी प्रशिक्षण लूँगी ताकि भटकते मन से पैदा होने वाली समस्याओं से निजात पा सकूँ. लेकिन क्या ये संभव है?

अपनी एकाग्रता बढ़ाने और मन को भटकने से रोकने के लिए मैं अमरीका की बोस्टन अटेंशन एंड लर्निंग लैब में पहुँची. दिमाग़ पर शोध करने वाले वैज्ञानिक माइक ईस्टरमैन और जो दीगुटिस ने पिछले सात साल में दिमाग़ का प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है जो एकाग्रता बढ़ाता है. Read More : आप 'टालूराम' हैं तो ये ज़रूर पढ़ें about आप 'टालूराम' हैं तो ये ज़रूर पढ़ें

दिल को बीमार करने वाला ख़तरनाक जीन

तनाव के लिए ज़िम्मेदार एक जीन को हृदयघात या दिल की बीमारी में मौत का ख़तरा बढ़ाने वाला क़रार दिया गया है.

हृदय के जिन मरीजों में जीन संबंधी ऐसे बदलाव होते हैं, उनमें दिल के दौरे का खतरा 38 फ़ीसदी बढ़ जाता है. ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन का कहना है कि इस अध्ययन से सीधे तौर पर तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियों का ख़तरा बढ़ने का प्रमाण और पुख़्ता होता है.

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अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल!

अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल!

क्या हम किसी दिन अपने दिमाग़ों को इंटरनेट से जोड़ सकते हैं.

इंटरनेट कनेक्शन आज सबसे तेज़ और किसी भी अन्य संचार प्रणाली से बढ़कर हो गया है जो हमें जुड़े रखने में मदद करता है.

कभी-कभी हमें महसूस होता है कि हम अपनी इच्छा से ईमेल संचार करने की कगार पर हैं.

मैंने ईमेल भेजा, आपको मिला, आपने इसे पढ़ा और जवाब दिया- सब कुछ बस कुछ ही सेकंड में हो गया.

भले ही आप ये मानें या न मानें कि त्वरित संचार अच्छी बात है, लेकिन यह निश्चित तौर पर हो रहा है. Read More : अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल! about अब 'भेजा-टू-भेजा' भेज सकेंगे ईमेल!

क्या आप जानते है कि कुत्ते मुस्कुराते भी हैं

क्या आप जानते है कि कुत्ते मुस्कुराते भी हैं

इंसान के सबसे वफ़ादार दोस्त कहे जाने वाले कुत्तों के बारे में आप कितनी बातें जानते हैं?

प्राणी शास्त्री और मानवविज्ञानी जॉन ब्रैडशॉ इंसानों और जानवरों के बीच के संपर्क और आपसी व्यवहार का अध्यायन करते हैं.

'इन डिफ़ेंस ऑफ़ डॉग्स' और 'एनिमल्स अमंग अस' किताबों के लेखक जॉन ब्रैडशॉ ने कुत्तों के अब तक के इतिहास का भी गहरा अध्ययन किया है.

उन्हीं से जानिए इंसान के पक्के और प्यारे से दोस्त से जुड़ीं 10 ऐसी बातें, जिनके बारे में शायद आपको पता न हो: Read More : क्या आप जानते है कि कुत्ते मुस्कुराते भी हैं about क्या आप जानते है कि कुत्ते मुस्कुराते भी हैं

मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है |

मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है |

जब से हम पैदा हुए हैं हमारा मस्तिष्क लगातार काम कर रहा है। आपका शरीर सोते समय आराम कर भी लेता है लेकिन मस्तिष्क कभी आराम नहीं करता वो उस समय भी सोचता है, जिस कारण आप सपने देख पाते हैं। मस्तिष्क बहुत सारे काम जैसे सोचना, संख्याओं को याद रखना, लिखने के लिए शब्द देना आदि करता है। बहुत से काम करने के लिए मस्तिष्क का स्थिर होना बहुत ज़रूरी है। आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कम समय में अधिक काम करने के लिएदिमाग का सही समय पर सही प्रतिक्रिया देना आवश्यक है।  Read More : मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है | about मरने से ठीक पहले दिमाग क्या सोचता है |

आपको डेंटिस्‍ट की जरूरत नहीं पड़ेगी

आपको डेंटिस्‍ट की जरूरत नहीं पड़ेगी

लंदन। क्या कभी सोचा है कि दांतों को ब्रश करने जैसी एक सामान्य आदत मजेदार भी बन सकती है? नहीं न! पर यह संभव है।

दरअसल, एक नई स्टडी के अनुसार एक ऐसा ऐप है, जो आपके दांत साफ करने की प्रक्रिया यानि ब्रशिंग टीथ को नौजवानों के लिए न केवल रोचक बनाता है, बल्कि यूजर्स की डेंटल हायजीन को भी इम्प्रूव करता है।

'ब्रश डीजे' नामक इस टूथब्रश टाइमर ऐप से जब आप ब्रश करते हैं, तो यह ऐप 2 मिनट तक आपकी ब्रशिंग के दौरान सबसे अच्छा म्युजिक बजाता है, जोकि यूजर्स की अपनी डिवाइस या फिर क्लाउड की प्लेलिस्ट से लिया गया होता है। Read More : आपको डेंटिस्‍ट की जरूरत नहीं पड़ेगी about आपको डेंटिस्‍ट की जरूरत नहीं पड़ेगी

क्‍या जीवनसीमा का पूण विकास हो चुका है

क्‍या जीवनसीमा का पूण विकास हो चुका है

चुनौतियां सिद्धांतों का कहना है कि मानव जीवन काल एक सीमा तक पहुंच रहा है, शोधकर्ताओं ने पाया है कि अभी कोई भी प्रमाण नहीं मिला है कि मानव जीवन की सीमा बढ़ना बंद हो गई है। इस बारे में कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता है।

पिछले अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि मानव उम्र की उच्‍चतम सीमा करीब 115 वर्ष है।

हालांकि, नेचर जर्नल में प्रकाशित हुए नए अध्‍ययन में, एक निष्‍कर्ष निकला था कि ऐसी कोई लिमिट निर्धारित नहीं किया गया है। Read More : क्‍या जीवनसीमा का पूण विकास हो चुका है about क्‍या जीवनसीमा का पूण विकास हो चुका है

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