स्मरण शक्ति बढ़ाए हलासन, भस्त्रिका, ध्यान

शक्ति बढ़ाए हलासन

जीवन की सफलता में स्मरण शक्ति की खास भूमिका होती है। यह अगर कमजोर हो जाए तो कई बार अपमान का भी सामना करना पड़ता है। आप उसे बेहतर करने के लिए यौगिक क्रियाओं को अपनाएं। बता रहे हैं योगाचार्य कौशल कुमार

आज के इस भौतिक युग में हम बिल्कुल मशीन बनते जा रहे हैं। भौतिकता की इस अंध दौड़ में खुद को शामिल कर हमने अपने ऊपर मानसिक तनाव तथा अवसाद को हावी कर लिया है। इनका बुरा प्रभाव हमारी स्मरण शक्ति पर भी पड़ा है। इसके अतिरिक्त आरामतलब जीवणशैली, व्यायाम का अभाव, अप्राकृतिक भोजन तथा अति महत्वाकांक्षा ने व्यक्ति को असमय बूढ़ा बना दिया है। हमारी इस जीवणशैली ने युवा और बूढ़ों के साथ अब कम उम्र के बच्चें को भी अपने चंगुल में लेना प्रारम्भ कर दिया है। योग के नियमित अभ्यास तथा यौगिक जीवनशैली अपना कर न केवल अपनी याददाश्त क्षमता को पुनर्जीवित किया जा सकता है, बल्कि इसमें तीव्र वृद्धि भी की जा सकती है। इन उपायों को अपनाएं।

आसन
स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए सबसे प्रमुख उपाय है आसनों का अभ्यास। इनके अभ्यास से रक्त संचालन, पाचन क्षमता में वृद्धि, नसों तथा मांसपेशियों में पर्याप्त खिंचाव उत्पन्न होता है, जिनसे मस्तिष्क को शुद्ध रक्त मिलता है। इस हेतु महत्वपूर्ण आसन है सूर्य नमस्कार, सूक्ष्म व्यायाम, शीर्षासन, सर्वागासन, हलासन, पश्चिमोत्तानासन, उष्ट्रासन, अर्धमत्स्येन्द्र आसन आदि।

हलासन की अभ्यास विधि
जमीन पर दरी बिछा कर उसके ऊपर सीधा लेट जाएं। दोनों हाथ शरीर के बगल में जमीन पर रखें तथा पैरों को आपस में जोड़ दें। अब दोनों पैरों को धीरे से जमीन के ऊपर उठा कर नितम्ब को भी हल्का जमीन से ऊपर उठाएं। हाथों से कमर को सहारा देते हुए धीरे-धीरे दोनों पैरों को सिर के पीछे जमीन पर लाएं। पैर घुटनों से सीधे रखें तथा हाथ नितम्ब के अगल-बगल में जमीन पर रखें। थोड़ी देर तक इस स्थिति में रुकने के बाद वापस पूर्व स्थिति में आएं।

सीमा
उच्च तथा निम्न रक्तचाप एवं हृदय की समस्या से पीडित लोगों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

प्राणायाम
स्मरण शक्ति की तीव्र वृद्धि में प्राणायाम के अभ्यास का महत्वपूर्ण स्थान है। इस के लिए मुख्यतया भस्त्रिका तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम का नियमित अभ्यास करना चाहिए। उज्जायी प्राणायाम भी बहुत अच्छा होता है। इसका अभ्यास कोई भी कर सकता है।

योगनिद्रा एवं ध्यान
मानसिक तनाव, अवसाद, क्रोध, भय, चिंता, निराशा, असुरक्षा का भाव आदि ऐसे अनेक मानसिक कारण हैं, जो व्यक्ति को सीधे-सीधे खोखला कर देते हैं। योग निद्रा एवं ध्यान के नियमित अभ्यास से इन सभी नकारात्मक भावों पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। केवल इनके भी नियमित अभ्यास से आप अपनी स्मरण शक्ति को आजीवन तीव्र तथा नियमित बनाएं रख सकते हैं।

आहार
सुपाच्य, हल्का, संतुलित तथा पौष्टिक आहर नियमित समय पर लें। उनमें हरी सब्जियां, सलाद, फल, सूखे मेवे शामिल करें।

 

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