क्या विटामिन-डी की गोलियां सभी को लेनी चाहिए

सर्दियों में जब दिन छोटे होने लगते हैं, तो धूप हमें कम मिलती है. इसका नतीजा ये होता है कि हमें सूरज की रोशनी से मिलने वाला अहम तत्व यानी विटामिन डी कम मिलता है. शरीर में इसकी कमी होने की आशंका जताई जाने लगती है. इसके एवज़ में हमें विटामिन डी की गोलियां लेने की सलाह दी जाती है. विटामिन डी2 और डी3 को आप किसी भी दवा की दुकान से ख़रीद सकते हैं. इसके लिए डॉक्टर के पर्चे की ज़रूरत नहीं होती. Read More : क्या विटामिन-डी की गोलियां सभी को लेनी चाहिए about क्या विटामिन-डी की गोलियां सभी को लेनी चाहिए

जापानी प्रोफेसर ने आश्चर्यजनक शोध किया।

जापानी प्रोफेसर ने आश्चर्यजनक शोध किया।

1. अम्लता न केवल आहार त्रुटियों के कारण होती है, बल्कि तनाव के कारण अधिक प्रभुत्व होती है।

2. उच्च रक्तचाप न केवल नमकीन खाद्य पदार्थों की बहुत अधिक खपत के कारण होता है, बल्कि मुख्य रूप से भावनाओं के प्रबंधन में त्रुटियों के कारण होता है।

3. कोलेस्ट्रॉल न केवल फैटी खाद्य पदार्थों के कारण होता है, बल्कि अत्यधिक आलस्य अधिक जिम्मेदार होता है।

4. अस्थमा न केवल फेफड़ों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति में व्यवधान की वजह से, बल्कि अक्सर उदास भावनाएं फेफड़ों को अस्थिर बनाती हैं। Read More : जापानी प्रोफेसर ने आश्चर्यजनक शोध किया। about जापानी प्रोफेसर ने आश्चर्यजनक शोध किया।

जल्द घसीटना शुरू कर देते है शीतकाल में जन्म लेने वाले बच्चे

इस शोध के मुताबिक बच्चे का जन्म किस मौसम में हुआ है यह उसके जीवन के पहले साल में संचालन विकास को प्रभावित करता है। इजरायल के हाइफा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस बात का पता लगाया है।

इस शोध के मुताबिक जाड़े के मौसम [दिसंबर से मई के बीच] जन्म लेने वाले बच्चे गर्मी के मौसम [जून से नवंबर के बीच] जन्म लेने वाले बच्चों की तुलना में जल्द घिसटना और चलना शुरू कर देते हैं। 47 बच्चे जिनका विकास पैटर्न एक जैसा था को दो ग्रुप में बांट कर यह शोध किया गया। Read More : जल्द घसीटना शुरू कर देते है शीतकाल में जन्म लेने वाले बच्चे about जल्द घसीटना शुरू कर देते है शीतकाल में जन्म लेने वाले बच्चे

प्रेग्नेंट होने,पर दूर रहें माइक्रोवेव और मोबाइल से

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प्रेग्नेंट महिलाओं को न केवल माइक्रोवेव से, बल्कि मोबाइल से भी दूर रहना चाहिए। हैरत होगी यह जानकर कि गर्भ में पल रहा बच्चा इन चीजों से डरता है। बात करें मोबाइल की, तो फोन की घंटी या वाइब्रेशन गर्भ में पल रहे बच्चे को डराती है। इससे कई बार उसकी नींद टूटती है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। रिसर्च में यह बात सामने आई है। न्यूयॉर्क : के  विकोफ हाइट्स मेडिकल सेंटर के  शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि छठे से नौंवे माह का गर्भस्थ शिशु मोबाइल की घंटी बजने पर एकदम चौंकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि मोबाइल ऐसी जगह रखें जहां से उसकी घंटी की आवाज गर्भस्थ बच् Read More : प्रेग्नेंट होने,पर दूर रहें माइक्रोवेव और मोबाइल से about प्रेग्नेंट होने,पर दूर रहें माइक्रोवेव और मोबाइल से

आइये जाने कुटकी के फायदे और नुकसान के बारे में

कुटकी का सही समय : यह बरसात में होनेवाला छोटा पौधा है। कुटकी के पत्ते 2-4 इंच लम्बे, अण्डाकार, जड़ की अपेक्षा आगे की ओर कुछ चौड़े, चिकने, झालरदार होते हैं। पौधे के बीच से निकले डंठल पर नीले या सफेद रंग के अनेक फूल लगते हैं। कुटकी के फल आकार और रंग में कुछ जौ से मिलते-जुलते होते हैं। कुटकी का जड़ बहुत कड़वी, 6-7 इंच तक लम्बी, अंगुली की तरह मोटी, खुरदरी, सूक्ष्म ग्रन्थियुक्त और भूरे रंग की होती है। Read More : आइये जाने कुटकी के फायदे और नुकसान के बारे में about आइये जाने कुटकी के फायदे और नुकसान के बारे में

आयुर्वेद में गुनगुना पानी पीने के कई फायदे बताए गए हैं

आयुर्वेद में गुनगुना पानी पीने के कई फायदे बताए गए हैं

आयुर्वेद में गुनगुना पानी पीने के कई फायदे बताए गए हैं। अगर हम रोज सुबह एक गिसाल गुनगुना पानी पीते हैं तो इससे पेट तो कम होता ही है साथ ही और भी कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स दूर होती हैं। 
गुनगुना पानी बॉडी में जाकर गर्मी पैदा करता है। इससे बॉडी में मौजूद बैक्टीरिया खत्म होेते हैं, साथ ही वायरल इन्फेक्शन से बचाव होता है। अगर हम रोज सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पिएं तो इससे कब्ज की प्रॉब्लम कंट्रोल होती है। अगर खाना खाते समय भी हम गुनगुने पानी का यूज करें तो खाने का डाइजेशन बेहतर तरीके से होता है। Read More : आयुर्वेद में गुनगुना पानी पीने के कई फायदे बताए गए हैं about आयुर्वेद में गुनगुना पानी पीने के कई फायदे बताए गए हैं

क्या है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर?

अमरीकी हेल्थ वेबसाइट 'हेल्थलाइन' के मुताबिक़, "ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर (OLD) एक तरह की 'साइकोलॉजिकल कंडीशन' है जिसमें लोग किसी एक शख़्स पर असामान्य रूप से मुग्ध हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि वो उससे प्यार करते हैं. उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उस शख़्स पर सिर्फ़ उनका हक़ है और उसे भी बदले में उनसे प्यार करना चाहिए. अगर दूसरा शख़्स उनसे प्यार नहीं करता तो वो इसे स्वीकार नहीं कर पाते. वो दूसरे शख़्स और उसकी भावनाओं पर पूरी तरह काबू पाना चाहते हैं." Read More : क्या है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर? about क्या है ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर?

इस मौसमी सीताफल के फायदे जानकर आप रह जाएगे हैरान

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 ठंड के शुरूआत में इसका सेवन करने से कई हेल्थ फायदे भी हैं। सीताफल से कमजोरी तो दूर होती है साथ मोटापा बढ़ने से रोकने में सहायक है। इस फल के जरिए शरीर को कई स्वास्थ्य लाभदायक चीजें मिलती हैं। आइए जानते हैं आखिर इस स्वादिष्ट फल के कितने फायदे हैं हल्की ठंड की शुरुआत के साथ ही बाजार में सीताफल भी बिकना शुरू हो गया है।

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कितना विटामिन डी सप्लीमेंट ठीक है?

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रोज़ाना विटामिन डी सप्लीमेंट की 25 नैनोमॉल मात्रा लेना नुक़सानदेह नहीं है. न्यूज़ीलैंड के एक्सपर्ट इयान रीड कहते हैं कि आज 62.5 माइक्रोग्राम की मात्रा भी आराम से बिना डॉक्टर के पर्चे के ली जा सकती है. ये ठीक नहीं है.

इससे शरीर में विटामिन डी की मात्रा ज़्यादा होने का डर है. इसके भी साइड इफेक्ट हो सकते है. उल्टी और चक्कर आ सकते हैं.

कई बार नवजातों में विटामिन डी की भारी कमी पायी जाती है, जिन्हें फ़ौरन सप्लीमेंट की ज़रूरत होती है.

कुल मिलाकर मेडिकल साइंस के जानकार विटामिन डी सप्लीमेंट को लेकर बंटे हुए हैं. Read More : कितना विटामिन डी सप्लीमेंट ठीक है? about कितना विटामिन डी सप्लीमेंट ठीक है?

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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