कैराना का किराना घराने से नाता

जाने माने गायक अजय पोहनकर भी किराना घराने से ताल्लुक रखते हैं.
शायद वास्तविक कैराना वह जगह है, जहां उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक महान और सर्वाधिक रागमय परंपरा का जन्म हुआ था. किराना कहे जाने वाले इस घराने के संस्थापक उस्ताद अब्दुल करीम खां और उनके मामूजाद भाई उस्ताद अब्दुल वहीद खां थे. अब्दुल करीम खां की आवाज़ असाधारण रूप से सुरीली और मिठास-भरी थी और उसमें इतना विस्तार था कि वह तीनों सप्तकों –मंद्र, मध्य और तार-से भी परे चली जाती थी. Read More : कैराना का किराना घराने से नाता about कैराना का किराना घराने से नाता

स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय

ऐतरेय ब्राह्मण ४.२९ में पृष्ठ्य षडह नामक सोमयाग के प्रथम दिवस के लक्षणों का उल्लेख है। इन लक्षणों में से एक है – करिष्यत्, अर्थात् जो भविष्य में किया जाने वाला अथवा होने वाला है। जो कुछ भविष्य में होने वाला है, जैसे आज जो गर्भ रूप में है, कल वह जन्म लेगा। गर्भ को बाहर से प्रभावित किया जा सकता है। यह षड्ज स्वर का उद्देश्य हो सकता है। करिष्यत् लक्षण के साथ-साथ अन्य लक्षणों का भी उल्लेख है – जैसे एति और प्रेति, युक्तवत्, रथवत्, आशुमत्, पिबवत्, अभ्युदित, राथन्तर, गायत्र, मन्त्र के प्रथम पद में देवता का उल्लेख आदि। एति से तात्पर्य है कि बाहर से, ब्रह्माण्ड से, सूर्य से ऊर्जा का ग्रहण किया जाता ह Read More : स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय about स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय

समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है?

समाधि का पहला

होगा तो ही जानोगे। कहा जा सके, ऐसा नहीं है। कुछ-कुछ इशारे किये जा सकते हैं। जैसे अंधेरे में अचानक दीया जल जाये, ऐसा होता है। या जैसे बीमार मरता हो और अचानक कोई दवा लग जाये...मरते-मरते कोई दवा लग जाये; और जीवन की लहर, जीवन की पुलक फिर फैल जाये--ऐसा होता है। जैसे कोई मुर्दा जिंदा हो जाये--ऐसा होता है समाधि का पहला अनुभव। Read More : समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है? about समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है?

मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं

भगवान, मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं

*प्रेम में थे या स्त्री पर कब्जा करने की आकांक्षा में थे? क्योंकि तुम्हारी भाषा कहती है कि वह मुझे धोखा दे गई और किसी और की हो गई! प्रेम को इससे क्या फर्क पड़ता है!*

*अगर वह युवती किसी और के साथ ज्यादा सुखी है, तो तुम्हें प्रसन्न होना चाहिए। क्योंकि प्रेम तो यही चाहता है कि जिसे हम प्रेम करते हैं, वह ज्यादा सुखी हो, वह आनंदित हो। अगर वह युवती तुम्हारे बजाय किसी और के पास ज्यादा आनंदित है, तो इसमें रस खो देने का कहां कारण है!* Read More : मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं about मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं

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