मोदी जी से जलन देखिए, अमेरिका में ही वीडियो बनाकर अपनी जलन निकालता इमरान खान

अपनी अपनी बीमारी - हरिशंकर परसाई

लेखक: 
हरिशंकर परसाई

हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप गए। चंदा माँगनेवाले और देनेवाले एक-दूसरे के शरीर की गंध बखूबी पहचानते हैं। लेनेवाला गंध से जान लेता है कि यह देगा या नहीं। देनेवाला भी माँगनेवाले के शरीर की गंध से समझ लेता है कि यह बिना लिए टल जाएगा या नहीं। हमें बैठते ही समझ में आ गया कि ये नहीं देंगे। वे भी शायद समझ गए कि ये टल जाएँगे। फिर भी हम दोनों पक्षों को अपना कर्तव्य तो निभाना ही था। हमने प्रार्थना की तो वे बोले - आपको चंदे की पड़ी है, हम तो टैक्सों के मारे मर रहे हैं। सोचा, यह टैक्स की बीमारी कैसी होती है। बीमारियाँ बहुत दे Read More : अपनी अपनी बीमारी - हरिशंकर परसाई about अपनी अपनी बीमारी - हरिशंकर परसाई

बीजोपचार का खेती मे महत्व

बीजोपचार का खेती मे महत्व

कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता उत्पादकता को बनाये रखने तथा बढ़ाने मे बीज का महत्वपूर्ण स्थान है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए उत्तम बीज का होना अनिवार्य है। उत्तम बीजों के चुनाव के बाद उनका उचित बीजोपचार भी जरूरी है क्यों कि बहुत से रोग बीजो से फैलते है। अतः रोग जनको, कीटों एवं असामान्य परिस्थितियों से बीज को बचाने के लिए बीजोपचार एक महत्वपूर्ण उपाय है।

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ओशो – ध्यानी का आहार

ओशो – ध्यानी का आहार

मनुष्य एक अकेली प्रजाति है जिसका आहार अनिश्चित है। अन्य सभी जानवरों का आहार निश्चित है। उनकी बुनियादी शारीरिक जरूरतें और उनका स्वभाव फैसला करता है के वे क्या खाते हैं और क्या नहीं; कब वे खाते हैं और कब उन्हें नहीं खाना होता है। किन्तु मनुष्य का व्यवहार बिलकुल अप्रत्याशित है, वह बिल्कुल अनिश्चितता में जीता है। न ही तो उसकी प्रकृति उसे बताती है कि उसे कब खाना चाहिए, न उसकी जागरूकता बताती है कि कितना खाना चाहिए, और न ही उसकी समझ फैसला कर पाती है कि उसे कब खाना बंद करना है|
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प्रश्न:-क्या हम अपने अतीत के जन्‍मों को जान सकते है ?

प्रश्न:-क्या हम अपने अतीत के जन्‍मों को जान सकते है ?

ओशो—निश्‍चित ही जान सकते है। लेकिन अभी तो आप इस जन्‍म को भी नहीं जानते है, अतीत के जन्‍मों को जानना तो फिर बहुत कठिन है। निश्‍चित ही मनुष्‍य जान सकता है। अपने पिछले जन्‍मों को। क्‍योंकि जो भी एक बार चित पर स्‍मृति बन गई है, वह नष्‍ट नहीं होती। वह हमारे चित के गहरे तलों में अनकांशस हिस्‍सों में सदा मौजूद रहती है। हम जो भी जान लेते है कभी नहीं भूलते।

     अगर मैं आपसे पुछूं कि उन्‍नीस सौ पचास में एक जनवरी को आपने क्‍या किया था? तो शायद आप कुछ भी न बता सके, आपको कुछ भी याद न हो। आप कहेंगे की मुझे तो कुछ भी याद नहीं है? एक जनवरी उन्‍नीस सौ पचास, कुछ भी ख्‍याल में नहीं आता। Read More : प्रश्न:-क्या हम अपने अतीत के जन्‍मों को जान सकते है ? about प्रश्न:-क्या हम अपने अतीत के जन्‍मों को जान सकते है ?

मौलसरी औषधीय गुण

मौलसरी औषधीय गुण

– इसकी छाल को पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा में आधा लीटर पानी में उबालकर चतुर्थांश शेष रहने पर प्राप्त काढ़े से कुल्ला करने पर हिलते दांत स्थिर हो जाते हैं I

– इसके फलों को नियमित रूप से चबाने मात्र से दांतों को मजबूती प्राप्त होती है I

-छाल को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर मंजन करने से दांत बज्र के समान मजबूत होते हैं I

-इसकी छाल को पचास से एक सौ ग्राम की मात्रा में ढाई ग्राम पीपल एवं दो चम्मच शहद के साथ समान मात्रा में देशी घी मिलाकर मुख में रखकर चलाने से दाँतों के दर्द में बड़ा आराम मिलता है I Read More : मौलसरी औषधीय गुण about मौलसरी औषधीय गुण

विश्वकप में भारत द्वारा पाकिस्तान की धुलाई के बाद इमरान खान

Funny video: 

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संगीत के लिए सब छोड़ा : सोनू निगम

संगीत के लिए सब छोड़ा : सोनू निगम

सोनू निगम को बहुआयामी प्रतिभा का धनी माना जाता है. उन्होंने छोटी उम्र से ही गाना प्रारंभ कर दिया था. इनकी प्रतिभा को देख कर कई लोगों ने उनके भविष्य को उज्जवल बताया.

सनम बेवफा के गाने से सब की नज़र में आए सोनू ने फिर पीछे मुड़ के नहीं देखा.फिल्म बॉर्डर से ले कर जोधा अकबर तक के गानों के लिए इन्होंने बहुत से अवॉर्ड जीते. अमरीका आए सोनू निगम से रचना श्रीवास्तव ने बात की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश. Read More : संगीत के लिए सब छोड़ा : सोनू निगम about संगीत के लिए सब छोड़ा : सोनू निगम

सुधार - हरिशंकर परसाई

लेखक: 
हरिशंकर परसाई

एक जनहित की संस्‍था में कुछ सदस्‍यों ने आवाज उठाई, 'संस्‍था का काम असंतोषजनक चल रहा है। इसमें बहुत सुधार होना चाहिए। संस्‍था बरबाद हो रही है। इसे डूबने से बचाना चाहिए। इसको या तो सुधारना चाहिए या भंग कर देना चाहिए।

संस्‍था के अध्‍यक्ष ने पूछा कि किन-किन सदस्‍यों को असंतोष है।

दस सदस्‍यों ने असंतोष व्‍यक्‍त किया।

अध्‍यक्ष ने कहा, 'हमें सब लोगों का सहयोग चाहिए। सबको संतोष हो, इसी तरह हम काम करना चाहते हैं। आप दस सज्‍जन क्‍या सुधार चाहते हैं, कृपा कर बतलावें।'

और उन दस सदस्‍यों ने आपस में विचार कर जो सुधार सुझाए, वे ये थे - Read More : सुधार - हरिशंकर परसाई about सुधार - हरिशंकर परसाई

पौध संरक्षण

पौध संरक्षण

की अपेक्षा जैव कीटनाशकों का प्रयोग करें।

  • कोई भी कीट नाशक प्रयोग करने से पहले कीटों के रोग प्रतिरोधक के अनुपात का पता लगाना चाहिए। समेकित कीट प्रबंधन आधारित कृषि पर्यावरण परिस्थिति (एईएसए) पद्धति विश्लेषण अपनाना चाहिए।
  • मुख्य फसल (अर्न्तफसलीय/बार्डर फसलीय) के आस-पास ऐसी फसलें उगानी चाहिए जो किसान मित्र कीटों को आकर्षित करें जो हानिकारक कीटों से बचाव करें/कीटों को मार दें।
  • गर्मी के मौसम में खेतों की गहरी जुताई करें।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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