चाय की खेती कैसे करें

चाय की खेती कैसे करें

चाय (अंग्रेज़ी:Tea) एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ है और संसार के अधिकांश लोग इसे पसन्द करते हैं। चाय मुलायम एवं नयी पत्ती, बन्द वानस्पतिक कली आदि से तैयार की जाती है। चाय में मुख्यतः कैफ़ीन का अंश पाया जाता है। इसकी ताज़ी पत्तियों में टैनिन की मात्रा 25.1% पायी जाती है, जबकि संसाधित पत्तियों में टैनिन की मात्रा 13.3% तक होती है। सर्वोत्तम चाय कलियों से बनायी जाती है। चाय की खेती में 'लाल किट्ट' तथा 'शैवाल' जनित 'चित्ती रोग' का प्रकोप होता है। चाय के लिए न्यूनतम वर्षा 125 से 150 सेमी होना चाहिए तथा तापमान 21°C से 27°C तक उपयुक्त होता है। विश्व में चाय के उत्पादन में भारत का पहला स्थान है। विश्व उत्पादन का 27 प्रतिशत और विश्व के निर्यात का 11 प्रतिशत भारत से प्राप्त होता है।

चाय की कृषि

असम के बाग़ान में चाय की पत्तियाँ चुनती लड़कियाँ

चाय को अक्टूबर-नवम्बर में बोया जाता है तथा पत्तियाँ चुनने का मौसम वर्ष में तीन से चार बार चलता है। पहली बार अप्रैल से जून तक, दूसरी बार जुलाई से अगस्त तक और तीसरी बार सितम्बर से अक्टूबर तक। पौधों को पहले छोटी क्यारियों में उगाया जाता है। फिर कुछ बड़ा होने पर अन्यत्र रोप दिया जाता है। समय-समय पर झाड़ी की छंटाई की जाती है, जिससे कोमल पत्तियाँ मिलती हैं तथा झाड़ी 1.5 मीटर से अधिक ऊंची नहीं होने से पत्ती चुनने में सुविधा रहती है। भारत में चाय का प्रति हेक्टेअर उत्पादन अच्छे से अच्छे उद्यान में भी 1800 किलोग्राम से अधिक नहीं है। देश में क्षेत्रवार प्रति हेक्टेअर उत्पादन इस प्रकार है- असम 1537, पश्चिम बंगाल 1411, त्रिपुरा 623, उत्तर प्रदेश 382, हिमाचल प्रदेश 132, तमिलनाडु 2002 कर्नाटक1886 और केरल 1484 । सम्पूर्ण भारत का औसत अब बढ़कर 1800 किलोग्राम हो 

उत्पादन एवं व्यापार

चाय का यह निर्यात कोलकाता, मुम्बई, कोच्चि, चेन्नईऔर मंगलौर बन्दरगाहों से होता है। देश के उत्पादन के लगभग 25 प्रतिशत निर्यात किया जाता है। देश में 75 प्रतिशत चाय खप जाती है, क्योंकि देश में पिछले चार दशकों में चाय की खपत में निरन्तर वृद्धि हुई है। अतः कुल उत्पादन के प्रतिशत के रूप में निर्यात में कमी हुई है। फिर भी भारत में चाय की खपत प्रति व्यक्ति पीछे कम ही है। संयुक्त राज्य अमरीका में 0.4 किलोग्राम चाय प्रति व्यक्ति पीछे पी जाती है

चाय के फ़ायदे

  • चाय में मौजूद एल-थियेनाइन नामक अमीनो-एसिड दिमाग़ को ज़्यादा सक्रिय लेकिन शांत रखता है।
  • चाय में एंटीजन होते हैं, जो इसे एंटी-बैक्टीरियल क्षमता प्रदान करते हैं।
  • इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और कई बीमारियों से बचाव करते हैं।
  • चाय में फ्लोराइड होता है, जो हड्डियों को मज़बूत करता है और दांतों में कीड़ा लगने से रोकता है
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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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