कंप्यूटर का अविष्कार किसने किया

किसने बनाया कंप्यूटर?

थोमास एडिसन ने बिजली के बल्ब का आविष्कार किया, विलबर और ऑरविल राइट ने पहली बार हवाई जहाज़ से उड़ने का प्रयोग किया, लेकिन कंप्यूटर कहां से आया? किसने पहला कंप्यूटर बनाया?

वैसे तो ऐबेकस के रूप में सदियों से कैलकुलेटर जैसा एक औजार था, लेकिन डाटा स्टोरिंग की मशीन किसने बनाई? पेटेंट दफ़्तर में इस सिलसिले में चार्ल्स बैबेज का नाम दर्ज है. वे इंगलैंड के थे और उन्नीसवीं सदी में ही उन्होंने इसके शुरुआती सिद्धांत बनाए थे. लेकिन जर्मनी के कॉनराड त्सूज़े ने पहली बार 1941 में एक मशीन तैयार की, जिसे आजके कंप्यूटर का जनक कहा जा सकता है. इसमें बस 64 शब्द स्टोर किए जा सकते थे. त्सूज़े इतना ही चाहते थे कि उन्हें किसी तरह हिसाब के झमेले से निजात मिल जाए. 1992 में इस सिलसिले में उन्होंने कहा था -

मैंने सिविल इंजिनीयरिंग की पढ़ाई की थी. सिविल इंजिनीयर को हिसाब लगाने होते हैं, जिनमें काफ़ी माथापच्ची करनी पड़ती है. मैं चाहता था कि ये हिसाब ऑटोमेटिक ढंग से हों, फिर मुझे एक तरीका सूझा और यह मशीन बनी, जिसे हम आज कंप्यूटर कहते हैं. आप कह सकते हैं कि मेरे पेशे की मजबूरी से इसका जन्म हुआ. - कॉनराड त्सूज़े

नाम की जो मशीन तैयार की, उसमें चारों ओर छड़ों और हैंडिलों की भरमार ती. यह प्रयोग के लिए एक मॉडल था, और इसमें अभी बहुत सी ख़ामियां थीं. इसके बाद उन्होंने ज़ेड 2 नाम का एक और मॉडल तैयार किया, जिसमें एक टेलिफ़ोन रीले सिस्टेम था. फिर 1941 में तैयार हुआ दुनिया का पहला कामकाजी कंप्यूटर ज़ेड 3 यह देखने में एक विशाल अलमारी जैसा था और इसमें 600 टेलिफ़ोन रीले सिस्टेम शामिल थे. आज इस मशीन को म्युनिख के जर्मन संग्रहालय में रखा गया है. हाइंत्ज़ मोएलर यहां दर्शकों को ज़ेड 3 की बारीकियों का परिचय देते हैं और उनके सवालों का जवाब देते हैं. वे कहते हैं -
लोग इस मशीन के सामने खड़े रहते हैं और हैरत से इसे देखते रहते हैं. उन्हें समझ में नहीं आता कि यह क्या है. काफ़ी दिलचस्प सवाल भी पूछे जाते हैं. अभी पिछले हफ़्ते एक कंप्यूटर प्रेमी ने मुझसे पूछा कि क्या इसे इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है? मैंने उनसे कहा, क्यों नहीं, अगर आपके पास बूट करने के लिए 28 हज़ार साल का वक्त हो. - हाइंत्ज़ मोएलर

कॉनराड त्सूज़े ने सिर्फ़ वही नहीं तैयार किया, जिसे आज की भाषा में हार्डवेयर कहते हैं. उन्हें एक प्रोग्राम, यानी सॉफ़्टवेयर भी तैयार करना पड़ा, ताकि कंप्यूटर काम कर सके. उनकी भाषा में हिसाब की प्रणाली. इसमें पंच सिस्टेम के ज़रिये निर्देश व संख्याएं दी गई थीं, जिनके आधार पर यह मशीन काम करती थी.

यह नाज़ियों का ज़माना था, द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था. हालांकि त्सूज़े ने नाज़ी सरकार के निर्देश पर इसे तैयार नहीं किया था, लेकिन युद्ध में इस्तेमाल के लिए उन्होंने अपना आविष्कार मुहैया कराया था. नए विमान तैयार करने के लिए या दूसरे पक्ष की सूचनाओं को डिकोड करने के लिए इसे काम में लाया जा रहा था. त्सूज़े सिर्फ़ अपने आविष्कार में मगन थे. पीछे मुड़कर देखते हुए बाद में उन्होंने कहा था -
उस समय मेरे सामने सवाल यह था कि कैसे इस तरह की मशीनों को विकसित करते हुए विश्लेषण का काम आगे बढ़ाया जा सकता है. सेना के लोगों से भी मेरी बाते हुई थीं, लेकिन उनके पास एनिग्मा नाम की मशीन थी, जो उस दौर के हिसाब से काफ़ी अच्छी थी. - कॉनराड त्सूज़े

विश्वयुद्ध ख़त्म होने के बाद जर्मनी को कंप्यूटर नही, दूसरी चीज़ों की ज़रूरत थी. लेकिन कॉनराड त्सूज़े अपने रास्ते पर बने रहे.

मेरे लिए यह बात साफ़ थी कि मैं संगणन की एक नई दुनिया में क़दम रख रहा हूं और मेरी राय में ऐलगोरिदम की भाषा तैयार करने के लिए शतरंज का खेल एक इलाका हो सकता था. मिसाल के तौर पर 1938 में अपने दोस्तों के बीच मज़ाक करते हुए मैंने कहा था कि पचास साल के अंदर एक मशीन शतरंज के विश्वचैंपियन को हरा देगी. अफ़सोस कि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन रास्ता बिल्कुल सही था - कॉनराड त्सूज़े

1940 से ही कॉनराड त्सूज़े की अपनी कंपनी थी, त्सूज़े अप्पाराटेनबाऊ, जो 1964 में दीवालिया हो गई. लेकिन इससे भी ज़्यादा अफ़सोस उन्हें इस बात का था, कि पेटेंट दफ़्तर में उनकी दरख़्वास्त खारिज कर दी गई. उनका कहना था कि यह फ़ैसला सही नहीं था.

कंपनी दीवालिया हो जाने के बाद वे कलाकार बन गए. लेकिन यहां भी कंप्यूटर ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. वे कंप्यूटर की दुनिया के दिग्गजों की ऑयल पेंटिंग बनाने लगे. 1995 में अपनी मौत से कुछ ही माह पहले उन्होंने बिल गेट्स को उनकी एक तस्वीर भेंट की. सीएट्ल में माइक्रोसॉफ़्ट के मुख्यालय में बिल गेट्स के दफ़्तर में आज भी यह तस्वीर टंगी हुई है.

रिपोर्ट: मिषाएल एंगेल/उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन: विवेक कुमार

Vote: 
Average: 3.4 (14 votes)

जवाब विशेषज्ञ से लें

Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
  • सेक्स टाइम कैसे बढ़ाएं
  • लिंग का साइज कैसे बढ़ाएं
  • लिंग को बड़ा लम्बा और मोटा करने के घरेलू उपाय
  • सेक्स की फीलिंग को कैसे बढ़ाए
  • ओरल सेक्स कैसे करें

इस प्रकार सवालों का जवाब विशेषज्ञ से लें

सलाह शुल्क ₹500 है जिसमें आप हर सप्ताह व्हाट्सएप पर बात करके अपनी समस्या को व्यवस्थित तरीके से हल कर सकते हैं

A/c Name: Pradeep Kumar
A/c No: 5547297104
IFSC : kkbk0005321
Bank: Kotak Mahindra Bank

 
1 Start 2 Complete
Files must be less than 2 MB.
Allowed file types: gif jpg jpeg png bmp tif pict txt rtf pdf doc docx.

विज्ञान एवं तकनीकी

विज्ञान एवं तकनीकी Total views Views today
पिता बनने के बाद पुरूषों में यौन उत्तेजना और टेस्टोस्टेरोन में कमी आने लगती है. 1,519 5
आपको डेंटिस्‍ट की जरूरत नहीं पड़ेगी 4,333 4
रक्तचाप को संतुलित रखने में शिक्षा की भूमिका अहम है. 1,155 4
एक ऑटोसेक्शुअल लड़की की कहानी 1,770 4
क्‍या जीवनसीमा का पूण विकास हो चुका है 4,396 4
पीरियड्स में महिलाओं का दिमाग तेज़ हो जाता है? 1,706 3
चिप्स खाकर युवा ने गंवाई आंखों की रोशनी 1,938 3
मौत के मुंह से वापस लाने का जुनून 2,155 3
गोल्डन मिल्क दुनिया भर में क्यों हो रहा है मशहूर 1,485 3
कृत्रिम अग्न्याशय 2018 तक उपलब्ध हो सकते हैं : वैज्ञानिक 5,642 3
तीन बेहद सस्ती चीज़ें जो मिटा सकती हैं दुनिया भर से कुपोषण 1,890 3
फ़ाइजर की नज़र भारतीय कंपनी पर 1,621 2
क्या वाक़ई चीनी आप की सेहत के लिए ख़राब है? 2,000 2
बर्फ़ की तरह ठंडे पानी में डुबकी लगाने से डरना ज़रूरी क्यों है 1,821 2
आधे मस्तिष्क से भी इन्सान रह सकते हैं ज़िंदा ! 4,244 2
अगर हम सब दिमाग़ बढ़ाने वाली गोली लेने लगें तो क्या होगा? 1,658 2
'गर्मी की वजह से बिगड़ता है बच्चों का रिजल्ट' 2,121 2
डीएनए की दुनिया 13,241 2
एक हादसे ने कैसे एक शख्स को गणित का पंडित बना दिया 1,853 2
क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़? 2,702 2
शुक्राणु पर अंकुश वाली गोलियां बाज़ार में क्यों नहीं आती? 1,574 2
क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर? 2,550 2
उच्च रेशायुक्त आहार किसी वरदान से कम नहीं 2,987 2
अपनी मदद ख़तरनाक 1,276 2
शाकाहारी हुई दुनिया तो हर साल 70 लाख तक कम मौतें 2,383 2