संगीत और हमारा जीवन

आइआइटी कानपुर ने भी माना राग दरबारी सुनने से तेज होता है दिमाग, दूर कर सकते रोग

दरबारी सुनने से तेज होता है दिमाग

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में महज 10 मिनट राग दरबारी सुनने पर दिमाग के न्यूरॉन्स की बढ़ी सक्रियता, एकाग्रता में हुआ इजाफा। अन्य राग-रागनियों पर भी चल रहा शोध।  Read More : आइआइटी कानपुर ने भी माना राग दरबारी सुनने से तेज होता है दिमाग, दूर कर सकते रोग about आइआइटी कानपुर ने भी माना राग दरबारी सुनने से तेज होता है दिमाग, दूर कर सकते रोग

चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

गीत स्वयं की अनुभूति है, स्वयं को जानने की शक्ति है एवं एक सौन्दर्यपूर्ण ध्वनि कल्पना है जिसका सृजन करने केलिए एक ऐसे अनुशासन की सीमा को ज्ञात करना है, जिसकी सीमा में रहते हुए भी असीम कल्पना करने का अवकाश है। मनुष्य अनुशासन की परिधि में रहकर संगीत को प्रकट करता है, किन्तु प्रत्येक व्यक्ति के विचार, संवेदना, बुद्धिमता एवं कल्पना में विविधता होने के कारण प्रस्तुति में भी विविधता अवश्य होती है। इसी प्रकार देश एवं काल क्रमानुसार संगीत के मूल तत्व समाज में उनके प्रयोग और प्रस्तुतिकरण की शैलियों में परिवर्तन होना स्वाभाविक है। संगीत कला में भी प्रत्येक गुण की राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक अवस्थाओं Read More : चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख about चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख

संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

रेडियो तरंगों की तरह संगीत की भी शक्तिशाली तरंगें होती हैं। वे अपने प्रभाव क्षेत्र को प्रभावित करती हैं। उनसे वातावरण अनुप्राणित होता है। पदार्थों में हलचल मचती है और प्राणियों की मनोदशा पर उसका अनोखा प्रभाव पड़ता है। प्राणियों में मनुष्य की बौद्धिक एवं संवेदनात्मक क्षमता अन्य प्राणियों से विशिष्ट है। इसलिए संगीत का उस पर असाधारण प्रभाव पड़ता है। यों भाव संवेदना प्राणि मात्र पर पड़ती है। वे अपने सामान्य क्रिया कलाप रोक कर वादन ध्वनि के साथ लहराने लगते हैं। उनमें शब्द ज्ञान तो होता नहीं इसलिए गायनों का अर्थ समझने में असमर्थ रहने पर भी वे गीतों के साथ जुड़े हुए भाव संचार को ग्रहण करते और उससे Read More : संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव about संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

स्वर यंत्र, गले के अंदर सूजन, श्वसनीशोथ के उपचार, कंठ रोग, गले के रोग का इलाज

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

कारण :-

अधिक सर्दी लगना, पानी में अधिक भींगना, अधिक देर तक गाना गाना, गले में धूल का कण जमना, धुंआ मुंह में जाना, अधिक जोर से बोलना तथा अचानक मौसम परिवर्तन के कारण यह रोग होता है।

लक्षण :-

इस रोग में स्वरयंत्र की श्लैष्मिक झिल्ली फूल जाती है और उससे लसदार श्लेष्मा निकलने लगता है। गला कुटकुटाना और जलन होना, कड़ा श्लेष्मा निकलना, कुत्ते की तरह आवाज होना, सूखी खांसी आना, आवाज खराब होना या गला बैठ जाना, बुखार होना, प्यास अधिक लगना, भूख न लगना, सांस लेने में कष्ट होना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण है। Read More : नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) about नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

रियाज़ कैसे करें 10 तरीके

सुरसाधना, खरज का रियाज, सरगम सीखना, गायकी टिप्स, गायन सीखना, हारमोनियम बजाना कैसे सीखे

रियाज़ करने की शुरुआत के लिए आप इस प्रकार से कोशिश करें -
1) संगीत सीखने का सबसे पहला पाठ और रियाज़ ओंकार . 3 महीनो तक आप रोज़ सुबह कम से कम 30 मिनट 'सा' के स्वर में ओंकार का लगातार अभ्यास करें.
2) अगर आप और समय दे सकते हैं तो ओंकार रियाज़ करने के बाद 5 मिनट आराम कर के, सरगम आरोह अवरोह का धीमी गति में 30 मिनट तक रियाज़ करें. जल्दबाजी नहीं करें.
3) सरगम का रियाज़ करते समय स्वर ठीक से लगाने का पूरा ध्यान रखें. अगर स्वर ठीक से नहीं लग रहा है तो बार बार कोशिश करें. संगीत अभ्यास में लगन की जरूरत होती है और शुरुआत में बहुत धीरज और इत्मीनान चाहिए.
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गुरु की परिभाषा

गुरु की परिभाषा

गुरु की परिभाषा
'गुरु' शब्द में 'गु' का अर्थ है 'अंधका' और 'रु' का अर्थ है 'प्रकाश' अर्थात गुरु का शाब्दिक अर्थ हुआ 'अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक'। सही अर्थों में गुरु वही है जो अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करे और जो उचित हो उस ओर शिष्य को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे। गुरु उसको कहते हैं जो वेद-शास्त्रों का गृणन (उपदेश) करता है अथवा स्तुत होता है। [1] मनुस्मृति [2] में गुरु की परिभाषा निम्नांकित है- Read More : गुरु की परिभाषा about गुरु की परिभाषा

संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव

संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव

संगीत सुनने के कई फायदे हैं। यह बात तो सभी को मालूम है पर कोई आपसे पूछ बैठे कि जरा बताइए कि क्या इन फायदों के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है तो आप सोच में पड़ जाएँगे। दरअसल हर तरह के संगीत को सुनने से आप पर अच्छा प्रभाव पड़े यह भी कतई जरूरी नहीं है। तो आइए रॉक म्यूजिक और शास्त्रीय संगीत सुनने से क्या प्रभाव पड़ता है इसे शोध की नजर से देखते हैं। इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर ने यह बात शोध से साबित की है। संस्था ने इस शोध में करीब 1500 बच्चों पर अलग-अलग तरह के संगीत का प्रभाव परखा। Read More : संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव about संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव

गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका

गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका

साँस एक बड़ी अनोखी प्रक्रिया है. साँस शरीर को भी प्रभावित करती है और मन को भी. साँस के सही नियंत्रण से शरीर भी स्वस्थ होता है और मन भी. संगीत के रियाज़ में चूंकि शरीर और मन दोनों बड़ी भूमिका निभाते हैं इसलिए साँस का अभ्यास संगीत (गायन) में बड़ा महत्व रखता है और इसलिए इस पेज में हम साँस के बारें में जानेंगे
1. रियाज़ करते समय मुह से साँस लेना स्वाभाविक और आसान लग सकता है लेकिन, साँस सिर्फ नाक से ही लेना है.
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गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त

गुनगुनाइए गीत, याददाश्त, म्यूजिक थेरेपी

म्यूजिक थेरेपी 
गीत गुनगुनाने से सिर्फ आपका मूड ही फ्रेश नहीं होता, बल्कि इससे आपकी याददाश्त भी दुरुस्त होती है. फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है. तेपो सरकामो के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के मुताबिक, गीत-संगीत विशेषकर गायन, डिमेंशिया रोग के शुरुआती चरण में काफी फायदा होता है.
इस शोध के अनुसार, संगीत मानसिक रोगियों की देखभाल में ज्यादा लाभकारी होता है. इसे डिमेंशिया की विभिन्न चरणों में असरदार माना गया है.
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