संगीत और हमारा जीवन

भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत

भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत

भारतीय संगीत मूल रूप में ही आध्यात्मिक संगीत है। भारतीय संगीत को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग माना है तो कहीं साक्षात ईश्वर माना गया है। अध्यात्म अर्थात व्यक्ति के मन को ईश्वर में लगाना व व्यक्ति को ईश्वर का साक्षात्कार कराना अध्यात्म कहलाता है संगीत को अध्यात्मिक अभिव्यक्ति का साधन मानकर संगीत की उपासना की गई है। संगीत को ईश्वर उपासना हेतु मन को एकाग्र करने का सबसे सशक्त माध्यम माना गया है। वेदों में उपासना मार्ग अत्यंत सहज तथा ईश्वर से सीधा सम्पर्क स्थापित करने का सरल मार्ग बताया है। संगीत ने भी उपासना मार्ग को अपनाया है। Read More : भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत about भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत

संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है

संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है

गुलज़ार साहब कहते है

" संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है , सुबह उठ कर पूजा के श्लोक , तकरीबन उसी समय दूधवाला आता है अपनी की साइकिल की घंटी और साथ में सिटी बजाने से लेकर एक फ़क़ीर के गाने की आवाज़ से लेकर हमारी माँ की खाना पकाते समय की गुनगुनाहट , और रात में लोरियों की गरमाहट , संगीत हमारे जीवन की खाली जगह को भर देता है और इसीलिए संगीत सब को पसंद है " Read More : संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है about संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है

पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य

चरण स्पर्श का महत्व, पैर छूने के फायदे

पैर छूने से ऊर्जा का संचार होता है
भारतीय सभ्यता और संस्कृति बहुत प्राचीन हैं | ऋषि मुनियों द्वारा स्थापित इस संस्कृति का आधार गूढ़ वैज्ञानिक रहस्य है | इन ऋषियों ने काफी शोध के बाद हमारी सभ्यता और संस्कृति के लिए कुछ नियम बनाएं हैं और उन्हें शास्त्रों में संजों के रखा है | ऐसा ही एक नियम है भारतीय सभ्यता में "पैर छूना " जो सिर्फ एक अभिवादन और आदर करने का तरीका नहीं है बल्कि उसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी काम करता है | हम सिर्फ पैर ही क्योंछूते हैं ? शरीर का कोई और हिस्सा जैसे पेट, पीठ और टांग छू कर आशीर्वाद क्यों नहीं लेते ? क्यूंकि इसके पीछे भी एक तार्किक वैज्ञानिक कारण है | Read More : पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य about पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य

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