पतंजलि योग सूत्र में पदों की संख्या
पातञ्जल योगसुत्रे
Submitted by vasna on 27 September 2019 - 5:10pmभारतीय दर्शन परंपरेत मानवी जीवन व सभोवतालचे विश्व यांच्या खर्या स्वरुपाचा शोध घेणार्याप तत्वज्ञानाच्या सहा शाखा आहेत. दर्शन म्हणजे केवळ बौद्धिक चर्चा नाही तर प्रत्यक्ष अनुभुती.न्याय(म. गौतम), वैशेषिक(म. कणाद), सांख्य(म. कपिल), योग, मिमांसा(म. जैमिनी) व वेदांत(म. बादरायण व्यास). या षडदर्शनापैकी योगदर्शनाची परंपरा हिरण्यगर्भापासून प्रारंभ होते असे मानण्यात येते. हिरण्यगर्भो योगस्य वक्ता, नान्य: पुरातन: ॥ याज्ञवल्क्य स्मृती, महाभारत 12.349.65 (हिरण्यगर्भाहून जुना योगाचा व्याख्याता अन्य कोणीही नाही.)
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