गन्धक वटी – आयुर्वेद की भेंट

क्र.सं. घटक द्रव्य प्रयोज्यांग अनुपात

रस (शुद्ध पारद) (Mercury) 24 ग्राम
गन्धक शुद्ध (Sulphur) 48 ग्राम
शुण्ठी (Zingiber officinale Rosc.) कन्द 48 ग्राम
लवङ्ग (Syzygium aromaticum Linn.Merr. & Per.) पुष्प 48 ग्राम
मरिच (Piper nigrum Linn.) फल 48 ग्राम
सैंधव लवण 144 ग्राम
सौवर्चल लवण (काला नमक Rock salt) 144 ग्राम
चणकाम्ल पत्र 96 ग्राम
मूलक क्षार पंचांग 96 ग्राम
निम्बजल (Azadirachta indica A. Juss.) फल Q.S मर्दनार्थ
मात्रा– 2 ग्राम

अनुपान– नीबू शर्बत, कोष्ण जल

गुण और उपयोग– यह वटी दीपन–पाचन तथा मुँह का फीकापन दूर कर जायका ठीक करती है। अग्निमांद्य को दूर कर अजीर्ण को ठीक करती है। भोजन के बाद यह वटी लेने से पाचन अच्छी प्रकार से होता है। यह वटी पेट दर्द, पेट की गैस, कब्ज, आँव, भोजन के प्रति अरुचि तथा अम्लपित्त में विशेष लाभ करती है। इसके सेवन से भूख अच्छी लगती है और भोजन अच्छी प्रकार पचता है। इसके नियमित सेवन से दूषित जल का भी शरीर पर प्रभाव नहीं पड़ता। अति लाभकारी यह वटी राजवटी के नाम से भी प्रचलित है।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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