आरोग्यवर्धिनी वटी के लाभ और उपयोग

आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati) का मतलब है, वैसी वटी जो शरीर के रोगों को ठीक करे। आरोग्यवर्धिनी वटी कई जड़ी-बूटियों से बनाई गई एक औषधि है। कई रोगों के इलाज में आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे मिलते हैं। आप पाचन-तंत्र विकार, त्वचा रोग आदि के अलावा कई और रोगों में आरोग्यवर्धिनी वटी से लाभ ले सकते हैं।
 
Arogyavardhini Vati ke fayde
 
आयुर्वेद में आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। आइए जानते हैं कि आरोग्यवर्धिनी वटी से क्या-क्या लाभ मिलता है।
 
 
आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे और उपयोग (Arogyavardhini Vati Benefits and Uses in Hindi)
आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे कई बीमारियों में मिलते हैं। आइए इसके बार में आगे विस्तार से जानते हैं-
 
 
मोटापा (वजन) कम करने के लिए आरोग्यवर्धिनी वटी का सेवन फायदेमंद (Arogyavardhini Vati Benefits for Weight Loss in Hindi)
आरोग्यवर्धिनी वटी मोटापा कम करने में लाभदायक होती है। यह चर्बी को कम करने का काम करती है।
आप मल त्याग करने संबंधी परेशानी में भी आरोग्यवर्धिनी वटी का सेवन कर लाभ पा सकते हैं।
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पाचनतंत्र विकार विकार में आरोग्यवर्धिनी वटी के सेवन से लाभ (Benefits of Arogyavardhini Vati for Indigestion in Hindi)
आरोग्यवर्धिनी वटी (divya arogya vati)  में ऐसा रसायन होता है, जो पाचनतंत्र संबंधी विकारों को ठीक करने में सहायता करता है। यह शरीर की कमजोरी, अपच की परेशानी, लिवर विकार में लाभदायक साबित होती है। यह पाचन शक्ति को ठीक कर शरीर को स्वस्थ बनाती है।
 
त्वचा रोग में आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे (Arogyavardhini Vati Uses to Treat Skin Disease in Hindi)
इसके सेवन से त्वचा संबंधित रोगों में तुरंत लाभ मिलता है। पीव वाले त्वचा रोग में त्वचा में यह वटी बहुत फायदा पहुंचाती है।
 
पोषक ग्रंथियों को स्वस्थ बनाने के लिए आरोग्यवर्धिनी वटी का सेवन फायदेमंद (Arogyavardhini Vati Benefits for Nutritive Glands in Hindi)
शरीर के विकास के लिए पोषक ग्रंथियों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। कई बार अनेक विकारों के कारण शरीर का उचित विकास नहीं हो पाता है। ऐसे में आरोग्यवर्धिनी वटी के सेवन से लाभ मिलता है। ध्यान रखें कि जब आप आरोग्यवर्धिनी वटी का सेवन कर रहे हों तो दवा के सेवन के दौरान केवल दूध का ही सेवन करें। इसके अलावा आरोग्यवर्धिनी वटी के इस्तेमाल की जानकारी किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर लें।
मूत्र रोग में आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे (Arogyavardhini Vati Uses for Urinary Disease in Hindi)
आरोग्यवर्धिनी वटी पेशाब से संबंधित बीमारी में भी लाभ पहुंचाती है। यह मूत्र मार्ग की सूजन को कम करने में सहायता करती है।
 
आंतों के रोग में आरोग्यवर्धिनी के फायदे (Benefits of Arogyavardhini Vati for Intestinal Disease in Hindi)
यह वटी बड़ी आंत और छोटी आंत से संबंधित विकार को ठीक करने में मदद करती है। आरोग्यवर्धिनी वटी का इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लें।
 
 
 
रक्त विकार में आरोग्यवर्धिनी वटी के सेवन से लाभ (Divya Arogyavardhini Vati Uses to Treat Blood Related Disorder in Hindi)
कई बार शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। खुजली और एक्जिमा होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में आरोग्यवद्धिनी वटी को महामंजिष्ठादि अर्क के साथ सेवन करने से विशेष लाभ मिलता है। आप नीम की छाल के काढ़ा के साथ प्रयोग कर सकते हैं। इससे विशेष लाभ होता है।
 
तिल्ली और लिवर विकार में आयोग्यवर्धिनी वटी के सेवन से फायदा (Arogyavardhini Vati Benefits for Liver and Spleen Disorder in Hindi)
आरोग्यवर्धिनी वटी (divya arogya vati) के सेवन से शरीर के किसी भी अंग जैसे- लिवर, तिल्ली (प्लीहा), गर्भाशय, आंत, ह्रदय आदि में होने वाली सूजन ठीक होती है। इसके अलावा पुराना बुखार, जलोदर, और एनीमिया में भी बहुत लाभ मिलता है।
शरीर में सूजन, एवं जलोदर जैसे रोग में केवल गाय के दूध के साथ सेवन करना चाहिए।
अगर लिवर बढ़ने के कारण दर्द हो रहा हो, तो पुनर्नवाष्टक काढ़ा में रोहेड़ा की छाल, और शरपुंखामूल 1-1 भाग अधिक मिलाकर पीने से फायदा होता है।
कुष्ठ रोग में आरोग्यवर्धिनी वटी के सेवन से फायदा (Divya Arogyavardhini Vati Uses for Leprosy Treatment in Hindi)
औदुम्बर कुष्ठ में शरीर की त्वचा खराब, और रूखी हो जाती है। इसमें त्वचा की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है, और शरीर सुन्नपन पड़ जाता है। पसीना अधिक निकलता है। ऐसे में आरोग्यवर्धिनी वटी को गन्धक रसायन के साथ प्रयोग करना चाहिए। यह कुष्ठ रोग की यह चमत्कारिक दवा है। इससे कुष्ठ रोग के साथ-साथ त्वचा रोगों में यह लाभ मिलता है।
Leprosy
ह्रदय विकार में फायदेमंद आरोग्यवर्धिनी वटी के फायदे (Benefits of Arogyavardhini Vati for Heart Related disorder in Hindi)
आरोग्यवर्धिनी वटी (divya arogya vati) ह्रदय से संबंधित दर्द में भी बहुत लाभ पहुंचाती है। इस रोग में आरोग्यवर्धिनी के साथ एक रत्ती डिजिटेलिस के पत्ते का चूर्ण और 1-2 रत्ती जंगली प्याज का चूर्ण  मिलाएं। इसे पुनर्नवादि या दशमूल काढ़ा के साथ सेवन करें। इससे ह्रदय रोग ठीक होता है
 
आरोग्यवर्धिनी वटी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Uses Arogyavardhini Vati?)
आरोग्यवर्धिनी वटी का इस्तेमाल इस तरह करेंः-
इसे चूसना चाहिए।
आरोग्यवर्धिनी वटी के सेवन की मात्रा (Arogyavardhini Vati Dosage)
आरोग्यवर्धिनी वटी का सेवन इतनी मात्रा में करनी चाहिएः-
आरोग्यवर्धिनी वटी की मात्रा– 250-500 मिली ग्राम
 
आरोग्यवर्धिनी वटी कहां मिलती है? (Where is Arogyavardhini Vati Found?)
आप 1mg पोर्टल से पतंजलि द्वारा निर्मित आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati Patanjali) खरीद सकते हैं।
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आयुर्वेद में आरोग्यवर्धिनी वटी के बारे में उल्लेख (Arogyavardhini Vati in Ayurveda)
आयुर्वेद में आरोग्यवर्धिनी वटी के बारे में ये उल्लेख मिलता हैः-
रसगन्धकलोहाभ्रशुल्वभस्म समांशकम्।
 
त्रिफला द्विगुणा प्रोक्ता त्रिगुणं च शिलाजतु।।
 
चतुर्गुणं पुरं शुद्धं चित्रमूलञ्च तत्समम्।
 
तिक्ता सर्वसमा ज्ञेया सर्वं सञ्चूर्ण्य यत्नत।।
 
निम्बवृक्षदलाम्भोभि मर्दयेद्द्विदिनावधि।
 
ततश्च वाटिका कार्या क्षुद्रकोलफलोपम़ा।।
 
मण्डलं सेविता सैषा हन्ति कुष्ठान्यशेषत।
 
वातपित्तकफोद्भूताञ्ज्वरान्नाना विकारजान्।।
 
देया पञ्चदिने जाते ज्वरे रोगे वटी शुभा।
 
पाचनी दीपनी पथ्या ह्द्या मेदोविनाशिनी।।
 
मलशुद्धिकरी नित्यं दुर्धर्षं क्षुत्प्रवर्तिनी।
 
बहुना।त्र किमुक्तेन सर्वरोगेषु शस्यते।।
 
आरोग्यवर्धनी नाम्ना गुटिकेयं प्रकीर्तिता।
सर्वरोगप्रशमनी श्रीनागार्जुनचोदिता।। र.र.स. 20/87-93
 
आरोग्यवर्धिनी वटी के उपयोगी घटक (Composition of Arogyavardhini Vati)
आरोग्यवर्धिनी वटी (arogya vati) को बनाने में इनका प्रयोग किया जाता हैः-
क्र.सं.
घटक
द्रव्य प्रयोज्यांग
अनुपात
 
1
 
पारद ( Mercury)
 
1 भाग
 
2
गन्धक (Sulphur)
 
1 भाग
 
3
 
लोह भस्म
 
1 भाग
 
4
 
अभ्रक भस्म
 
 
1 भाग
 
5
 
ताम्र भस्म
 
 
1 भाग
 
6
 
हरीतकी (Terminalia chebula Retz.)
 
फल मज्जा
 
2 भाग
 
7
 
विभीतकी (Terminalia bellirica Roxb.)
 
फल मज्जा
 
2 भाग
 
8
 
आमलकी (Emblica officinalis Gaertn.)
 
फल मज्जा
 
2 भाग
 
9
 
शिलाजतु
 
फल मज्जा
 
3 भाग
 
10
 
गुग्गुल निर्यास
 
 
4 भाग
 
11
 
चित्रक (Plumbago zeylanica Linn.)
 
मूल
 
4 भाग
 
12
 
कुटकी (Picrorhiza kurroa Royle ex Benth)
 
समभाग
 
 
13
 
नीमपत्र के रस (Azadiracta indica Linn.)
 
पत्ते Q.S. मर्दन हेतु

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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