मेकअप करने का स्टेप 7: ब्लश

मेकअप करने के लिए ब्लश का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण (significant) होता है। यदि आपकी स्किन बहुत ज्यादा डार्क है तो आपको दिन में डार्क क्रिम्सन रंग (crimson colour) और प्लम्प और ब्रोंज ब्लश का उपयोग करना चाहिए। न्यूट्रल ब्राउन रंग के ब्लश का उपयोग करने से बचें।

ब्लशर को चेहरे पर यूज करने के लिए सबसे पहले बहुत कम मात्रा में ब्लशर ब्रश में लें और हल्के हाथों से चेहरे पर अप्लाई करें। हमेशा ब्लशर की पतली परत ही लगाएं। अगर आपको लगे, कि यह हल्का है, तो आप दोबारा इसे लगा सकती हैं। Read More : मेकअप करने का स्टेप 7: ब्लश about मेकअप करने का स्टेप 7: ब्लश

मेकअप करने का स्टेप 5: फाउंडेशन पाउडर

मेकअप करने के स्टेप 5 (makeup karne ka tarika step by step in hindi) मे आप कंसीलर के बाद फाउंडेशन पाउडर लगाएं। एक पाउडर ब्रश को लेकर अपने चेहरे पर फाउंडेशन पाउडर को लगाएं। पूरे चेहरे पर पाउडर की एक हल्की कोट करें। इसके लिए आप पहले ब्रिसल्स को पाउडर में दबाएं, और फिर ब्रश को गोलाई में घुमाते हुए फेस पर लगाएं। इससे मेकअप सेट होता है। फाउंडेशन पाउडर को खरीदने से पहले अपनी स्किन टोन को ध्यान रखें। चेहरे को कदम एक चिकना बनाने के लिए पाउडर छिद्रों और लाइनों को भरने में मदद करता है। Read More : मेकअप करने का स्टेप 5: फाउंडेशन पाउडर about मेकअप करने का स्टेप 5: फाउंडेशन पाउडर

मेकअप करने का स्टेप 4: कंसीलर

ऊपर दी गई मेकअप करने की सभी स्टेप्स (How To Apply Makeup Step By Step In Hindi) को पूरा करने के बाद आंखों के नीचे काले घेरे या गहरे रंग को छुपाने के लिए आंखों के नीचे अच्छे तरीके से कंसीलर लगाएं। त्वचा पर अधिक मात्रा में मैलेनिन के जमा होने या आनुवांशिक समस्याएं (genetic problems) होने पर आंखों के नीचे त्चचा का रंग अधिक गहरा हो जाता है, इसे ही छुपाने के लिए कंसीलर लगाया जाता है। Read More : मेकअप करने का स्टेप 4: कंसीलर about मेकअप करने का स्टेप 4: कंसीलर

मेकअप करने का स्टेप 1: मॉइस्चराइजर

इससे पहले कि आप अपना मेकअप करना शुरू करें, समय निकालकर अपनी त्वचा को उच्च गुणवत्ता वाले मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करें।

 

मेकअप करने के पहले स्टेप में फेस पर मॉइस्चराइज़र लगाया जाता है। मेकअप शुरू करने से पहले उनके चेहरे को यदि सही तरीके से मॉश्चराइज नहीं किया जाता है तो उनकी स्किन फीकी (blur) दिखायी देती है। मॉइस्चराइजर से चेहरे का फीकापन कम हो जाता और चेहरा नमी पाकर निखर उठता है और फिर चेहरे पर मेकअप भी आकर्षक दिखायी देता है। मॉइस्चराइज़र के लिए आप इन चीजों का इस्तेमाल कर सकती है। Read More : मेकअप करने का स्टेप 1: मॉइस्चराइजर about मेकअप करने का स्टेप 1: मॉइस्चराइजर

मेकअप करने का तरीका स्टेप बाय स्टेप

मेकअप हर लड़की को पसंद होता है लेकिन हर बार मेकअप करवाने के लिए पार्लर जाना संभव नहीं है। इसलिए आज हम आपको घर पर स्टेप बाय स्टेप मेकअप करने का तरीका के बारे में बताएंगे।

आजकल हर लड़की सुंदर दिखने के लिए मेकअप करती है, लेकिन स्टेप बाय स्टेप मेकअप कैसे करें (makeup kaise kare step by step in hindi), इसके बारे में सभी लड़कियों को जानकारी नहीं होती है। यदि आप एक बिगिनर है और मेकअप करने का तरीका जानना चाहती हैं,  तो आज का यह आर्टिकल आपके लिए ही है। Read More : मेकअप करने का तरीका स्टेप बाय स्टेप about मेकअप करने का तरीका स्टेप बाय स्टेप

टीकाकरण कराकर बच्‍च्‍ो को इससे बचाएं

डिफ्थीरिया से बच्‍चे को बचाने के लिए वैक्सीनेशन कराया जाता है। नियमित टीकाकरण में डीपीटी (डिप्थीरिया, परटूसस काली खांसी और टिटनेस) का टीका लगाया जाता है। एक साल के बच्चे को डीपीटी के तीन टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा टीका और 4 साल की उम्र पर पांचवां टीका लगता है। टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया होने की संभावना नहीं रहती है। Read More : टीकाकरण कराकर बच्‍च्‍ो को इससे बचाएं about टीकाकरण कराकर बच्‍च्‍ो को इससे बचाएं

एंटीबायोटिक दवाएं

एंटीबायोटिक दवाओं से भी डिप्थीरिया का इलाज किया जाता है। एंटीबायोटिक दवाओं से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को मारा जाता है और संक्रमण ठीक किए जाते हैं। जिन लोगों या बच्चों को बार-बार डिप्थीरिया होता है, उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। छोटे बच्चों या बूढ़े लोगों को खासकर डिप्थीरिया से ग्रस्त व्यक्ति से अलग रखना चाहिए। अगर गले में मौजूद ग्रे परत से सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो डॉक्टर इसे हटा भी सकते हैं।

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एंटी-टॉक्सिन

अगर डॉक्टर को डिप्थीरिया का संदेह होता है, तो संक्रमित व्यक्ति या बच्चे को एंटी-टॉक्सिन दवा दी जाती है। नस या मांसपेशी में एंटी-टॉक्सिन का टीका लगाने से शरीर में मौजूद डिप्थीरिया के विषाक्त पदार्थों का प्रभाव बेअसर हो जाता है। एंटी-टॉक्सिन देने से पहले, डॉक्टर इस बात की जांच करते हैं कि क्या रोगी को एंटी-टॉक्सिन से कोई एलर्जी है या नहीं। इससे एलर्जी वाले व्यक्तियों को पहले एंटी-टॉक्सिन के प्रति असंवेदनशील बनाया जाता है। इसके लिए डॉक्टर रोगी को पहले एंटी-टॉक्सिन की कम खुराक देते हैं और फिर धीरे-धीरे खुराक बढ़ा देते हैं। Read More : एंटी-टॉक्सिन about एंटी-टॉक्सिन

डॉक्‍टर से परामर्श के बाद ही दे दवाएं

डिप्थीरिया का संदेह होने पर डॉक्‍टर से परामर्श करने के बाद ही बच्‍चों को दवा दें। क्‍योंकि बिना समझे दवाएं देने से संक्रमण फैलने से तो नहीं रुकेगा अलबत्‍ता और समस्‍याएं पैदा हो सकती हैं।

 

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क्‍या है डिप्‍थीरिया का उपचार

इस बीमारी के मरीज को एंटी-टॉक्सिन्‍स दिया जाता है। यह टीका व्‍यक्ति को बांह में लगाया जाता है। एंटी-टॉक्सिन देने के बाद चिकित्‍सक एंटी-एलर्जी टेस्‍ट कर सकते हैं, इस टेस्‍ट में यह जांच की जाती है कि कहीं मरीज की त्‍वचा एंटी-टॉक्सिन के प्रति संवेदनशील तो नहीं। शुरूआत में डिफ्थीरिया के लिए दिये जाने वाले एंटी-टॉक्सिन की मात्रा कम होती है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी मात्रा को बढ़ा सकते हैं। 

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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