कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं

अच्छा गाना गा सकते हैं

आप जब गाते हों तो हो सकता है की आपको लगता हो की बहुत अच्छा गाना गाते हैं लेकिन यह कैसे पता चले की आप सच में एक अच्छे गायक हैं । अगर आप अपनी आवाज़ को अच्छे से जांचना चाहते हों तो ऐसा आप कर सकते हैं । इसके लिए आपको बस अपने आप को ध्यान से सुनने की ज़रुरत है और औरों से अपनी आवाज़ के बारे में सुझाव लेना ज़रूरी है Read More : कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं about कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं

रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज

रागों में छुपा है

भारतीय संस्कृति को अपनी परम्पराओं, विशालता, जीवन्तता के कारण सर्वत्र सराहा गया है व विश्वभर में विद्यमान संस्कृतियों में श्रेष्ठतम माना गया है । भारतीय संस्कृति ने प्राचीन काल से ही विदेशियों को प्रभावित किया है । भारतीय चिन्तन के अनुसार भारतीय सभ्यता व संस्कृति की संवाहक हैं कलाएं । जीवन में सकारात्मक प्रवृत्ति, उल्लास व उत्साह भरने के लिए कलाएं मनुष्य को सदैव प्रेरित करती आई हैं जिनमें से सबसे उत्कृष्ट ललित कलाओं को माना गया है । इन ललित कलाओं में संगीत का स्थान सर्वोपरि है । संगीत एक ऐसी विधा है जो मानव चित्त पर विशेष व अमिट छाप छोड़ती है । भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व के अन्य देशों क Read More : रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज about रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज

राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं।

राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। यह संगीत का मूलाधार है। 'राग' शब्द का उल्लेख भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' में भी मिलता है। 'राग' में कम से कम पाँच और अधिक से अधिक सात स्वरों होते हैं। राग वह सुन्दर रचना है, जो कानों को अच्छी लगे।

भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आज से लगभग ३००० वर्ष पूर्व रचे गए वेदों को संगीत का मूल स्रोत माना जाता है। ऐसा मानना है कि ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था। चारों वेदों में, सामवेद के मंत्रों का उच्चारण उस समय के वैदिक सप्तक या समगान के अनुसार सातों स्वरों के प्रयोग के साथ किया जाता था। Read More : राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। about राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं।

रागों का सृजन

रागों का सृजन

रागों का सृजन बाईस श्रुतियों के विभिन्न प्रकार से प्रयोग, विभिन्न रस या भावों को दर्शाने के लिए किया जाता है। प्राचीन समय में रागों को पुरुष व स्त्री रागों में अर्थात राग व रागिनियों में विभाजित किया गया था। सिर्फ़ यही नहीं, कई रागों को पुत्र राग का भी दर्जा प्राप्त था। उदाहरणत: राग भैरव को पुरुष राग और भैरवी, बिलावली सहित कई अन्य रागों को उसकी रागिनियाँ तथा राग ललित, बिलावल आदि रागों को इनके पुत्र रागों का स्थान दिया गया था। बाद में आगे चलकर पंडित विष्णुनारायण भातखंडे ने सभी रागों को दस थाटों में बॉंट दिया। अर्थात एक थाट से कई रागों की उत्पत्ति हो सकती थी। अगर थाट को एक पेड़ माना जाए व उसस Read More : रागों का सृजन about रागों का सृजन

वो राग जिसे गाते वक्त मेहदी हसन को लगता था बेसुरे होने का डर!

मेहदी हसन

कौन सा है वो राग जिसे गाते वक्त मेहदी हसन को लगता था बेसुरे होने का डर! इस राग पर ही आधारित है मशहूर कव्वाली- चढ़ता सूरज धीरे-धीरे ढलता है ढल जाएगा 

मधुर भंडारकर रियलस्टिक फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं. चांदनी बार, पेज 3, कॉरपोरेट, फैशन जैसी फिल्मों ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक कामयाब डायरेक्टर की छवि दी है. Read More : वो राग जिसे गाते वक्त मेहदी हसन को लगता था बेसुरे होने का डर! about वो राग जिसे गाते वक्त मेहदी हसन को लगता था बेसुरे होने का डर!

बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ।

बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ।

उस हर्ष में प्रवेश करो और उसके साथ एक हो जाओ। किसी भी हर्ष से काम चलेगा। यह एक उदाहरण है।

‘’बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है।‘’ Read More : बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ। about बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ।

त्राटक-एकटक देखने की विधि है |

त्राटक-एकटक

यदी आप लंबे समय तक कुछ महिनो के लिए, प्रतिदीन एक घंटा ज्योत की लौ को अपलक देखते रहे तो आपकी तीसरी आंख पूरी तरह सक्रिय हो जाती है। आप अधिक प्रकाशपूर्ण, अधिक सजग अनुभव करते है। त्राटक शब्द जीस मूल से आता है उसका अर्थ है:आंसु। तो आपकी ज्योत की लौ को तबतक अपलक देखते रहेना है जबतक आंखो से आंसु न बहने लगे। एकटक देखते रहे बिना पलक जपकाए आपकी तीसरी आंख सक्रिय होने लगेगी। एकटक देखने की विधि असल मे कीसी विषय मे संबधीत नही है। इसका संबध देखने मात्र से है। क्योकी आप जब बिना पलक जपकाए एकटक देखते है तब आप एकाग्र हो जाते है। और मन का स्वभाव है भटकना। यदी आप एकटक देखे रहे है,जरा भी हिले डूले बिना, तो मन अव Read More : त्राटक-एकटक देखने की विधि है | about त्राटक-एकटक देखने की विधि है |

ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है

ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है

एक, तीसरी आँख की ऊर्जा वही है जो ऊर्जा दो सामान्‍य आंखों को चलाती है। ऊर्जा वही है, सिर्फ वह नई दिशा में नए केंद्र की और गति करने लगती है। तीसरी आँख है; लेकिन निष्‍क्रिय है। और जब तक सामान्‍य आंखे देखना बंद नहीं करती, तीसरी आँख सक्रिय नहीं हो सकती है। देख नहीं सकती। उसी उर्जा को यहां भी बहना है। जब उर्जा सामान्‍य आँखो में बहना बंद कर देती है तो वह तीसरी आँख में बहने लगती है। और जब ऊर्जा तीसरी आँख में बहती है तो सामान्‍य आंखों में देखना बंद कर देती है। अब उनके रहते हुए भी तुम उनके द्वारा कुछ नहीं देखते हो। जो ऊर्जा उनमें बहती थी वह वहां से हट कर नये केंद्र पर गतिमान हो जाती है। यह केंद्र दो Read More : ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है about ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है

योगा का गलत तरीका नुकसान पहुचा सकता है

योग शरीर को स्वस्थ और फिट रखने का बेहतरीन माध्यम है। आजकल दुनिया भर में योग के प्रति लोगों की जागृति में इजाफा हुआ है। लोग निरोग होने के लिए नियमित योग कर रहे हैं। योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला अभ्यास है जिसमें अनुशासन का बड़ा महत्व है। मतलब यह कि एक निश्चित नियम के अनुसार योग करने से ही उसका लाभ हमें मिलता है। इसलिए योग करने से पहले जरूरी है कि हम उसकी ठीक से जानकारी कर लें। गलत तरीके से योग करना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इन सबके अलावा योग से पहले यह बात भी जान लेना जरूरी है कि योग के पहले और बाद में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। तो आइए हम आपको बताते हैं कि योग क Read More : योगा का गलत तरीका नुकसान पहुचा सकता है about योगा का गलत तरीका नुकसान पहुचा सकता है

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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