बोस-हाकिंग्स में गहरा नाता....अपना भारत

बोस-हाकिंग्स

कण से कण जुड़े तो तत्व और पदार्थ बने। विज्ञानियों के शोध आपस में जुड़े तो नए सिद्धांत बने। बिना पहले के ज्ञान को समझे नया शोध संभव नहीं। गैलीलियो, लिमेत्री, आइंस्टीन, जगदीश चंद्र बोस, हिग्स और स्टीफन हाकिंग्स ब्रह्मांड के रहस्य जानने वालों की एक सुगठित कड़ी है।
...भारत में जन्मे सत्येन्द्रनाथ बोस ने एक कण की परिकल्पना की। इसको बाद में बोसान कण या सुपरकण भी कहा गया। विज्ञान के इतर इसे गाडपार्टिकल के नाम से भी जाना जाता है। बोसान कण उन्हें कहते हैं जो बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी का पालन करते हैं। ये सभी उर्जा वाहक कण फोटॉन, ग्लुऑन, गेज बोसॉन कण होते हैं। इन कणों में फर्मिऑन की संख्या सम होती है। इन कणों को द्रव्यमान या भार के लिये जिम्मेदार माना जाता है। असल में भौतिकशास्त्र में दो प्रकार के अणु माने जाते हैं, बोसॉन और फर्मियान। इनमें से बोसॉन अणु सत्येन्द्रनाथ बोस के नाम से ही जाने जाते हैं।
...प्रेसिडेंसी कॉलेज में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय जैसे महान शिक्षकों से शिक्षा लेने वाले सत्येंद्रनाथ बोस ने 1915 में गणित से एमएससी किया। बाद में उन्होंने भौतिकी को अपनी शिाक्षा का आधार बनाया और विज्ञान में नये अध्याय जोड़े। उन दिनों दुनिया में भौतिक विज्ञान में नई-नई खोजें हो रही थीं। जर्मन भौतिकशास्त्री मैक्स प्लांक ने क्वांटम सिद्धांत दिया था। इस सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा को सूक्ष्म हिस्सों में बांटा जा सकता है। जर्मनी में अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत की धूम मची थी। भारत में सत्येन्द्रनाथ बोस इन सभी खोजों का अध्ययन कर रहे थे। कालेज में उनकी प्रतिभा देखकर कहा जाता था कि वह एक दिन पियरे साइमन, लेप्लास और आइस्टीन लुई काउथी जैसे गणितज्ञ बनेंगे। 
...इसी बीच बोस ने प्लांक्स लॉ एंड लाइट क्वांटम नामक एक लेख लिखा। इसे भारत में किसी पत्र-पत्रिकाओं ने नहीं छापा। इससे परेशान होकर सत्येन्द्रनाथ ने अपना लेख सीधे आइंस्टीन को भेज दिया। आइंस्टीन ने खुद इसका जर्मन में अनुवाद किया। इसके बाद सत्येन्द्रनाथ को दुनिया में प्रसिद्धि मिली। उन्होंने यूरोप यात्रा के दौरान आइंस्टीन से मुलाकात भी की। बताते हैं कि बोस तथा आइंस्टीन ने मिलकर बोस-आइंस्टीन स्टैटिस्टिक्स की खोज की थी। 1926 में बोस भारत लौटे और ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाते रहे। इसके बाद वह विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति बने।
...1964 में ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्गस ने महाविस्फोट के बाद एक सेकेंड के अरबवें भाग में ब्रह्मांड के द्रव्यों को मिलने वाले भार का सिद्धांत दिया। यह भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्रनाथ बोस के बोसान सिद्धांत पर ही आधरित था। इसे बाद में हिग्गस-बोसान्श के नाम से जाना गया। इस सिद्धांत ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों पर से पर्दा उठाया और उसके स्वरूप को परिभाषित करने में भी मदद की। महाविस्फोट प्रतिरूप के अनुसार, यह ब्रह्मांड अति सघन और ऊष्म अवस्था से विस्तृत हुआ है और अब तक इसका विस्तार जारी है। एक सामान्य धरणा के अनुसार अंतरिक्ष स्वयं भी अपनी आकाशगंगाओं सहित विस्तृत होता जा रहा है।
.. ब्रह्मांड के उतपत्ति के रहस्य महाविस्फोट सिद्धांत के आरंभ का इतिहास आधुनिक भौतिकी में जॉर्ज लिमेत्री ने लिखा था। लिमेत्री एक रोमन कैथोलिक पादरी थे और वैज्ञानिक भी थे। उनका यह सिद्धांत अल्बर्ट आइंसटीन के प्रसिद्ध सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत पर आधरित था। महाविस्फोट सिद्धांत दो मुख्य धरणाओं पर आधरित है। पहला भौतिक नियम और दूसरा ब्रह्माण्डीय सिद्धांत। ब्रह्माण्डीय सिद्धांत के मुताबिक ब्रह्मांड सजातीय और समदैशिक (Isotopic) होता है। 
...विज्ञानियों के अनुसार ब्रह्मांड का जन्म एक महाविस्फोट का परिणाम है। इसी को महाविस्फोट सिद्धांत या बिग बैंग सिद्धांत कहा गया। इसके अनुसार लगभग 12 से 14 अरब वर्ष पूर्व संपूर्ण ब्रह्मांड एक परमाण्विक इकाई के रूप में था। उस समय मानवीय समय और स्थान जैसी कोई अवधरणा अस्तित्व में नहीं थी। लगभग 13.7 अरब वर्ष पूर्व इस धमाके में अत्यधिक ऊर्जा का उत्सजर्न हुआ। सारी भौतिक मान्यताएं इसी घटना से परिभाषित होती हैं। महाविस्फोट के धमाके के मात्र 1.43 सेकेंड के अंतराल के बाद समय, अंतरिक्ष की वर्तमान मान्यताएं अस्तित्व में आ चुकी थीं। भौतिकी के नियम लागू होने लग गये थे। 1.34वें सेकेंड में ब्रह्मांड 1030 गुना फैल चुका था और क्वार्क, लैप्टान व फोटोन का गर्म द्रव्य बन चुका था। 1.4 सेकेंड पर क्वार्क मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाने लगे, ब्रह्मांड कुछ ठंडा हो गया। इसके साथ ही हाइड्रोजन, हीलियम आदि का अस्तित्व आरंभ होने लगा और भौतिक तत्व बनने लगे।
...अपने से पहले के सभी भौतिक विज्ञानियों के सिद्धांतों को करिश्माई वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग्स ने आगे बढ़ाया। स्टीफन से पहले इतना ही पता था कि ब्रह्मांड की उतपत्ति 13.8 अरब साल पहले बिग बैंग से हुई। ब्रह्मांड से पहले क्या था, इस बारे में हॉकिंग ने बताया। उन्होंने कहा कि बिग बैंग से पहले सिर्फ एक अनंत ऊर्जा और तापमान वाला एक बिंदु था। उस वक्त समय और स्थान घुमावदार और कोण वाली स्थिति में थे। हॉकिंग के मुताबिक हम आज समय को जिस तरह से महसूस करते हैं, ब्रह्मांड के जन्म से पहले का समय ऐसा नहीं था। इसमें चार आयाम थे। उन्होंने बताया कि भूत, भविष्य और वर्तमान को तीन समानांतर रेखाएं समझें तो उस वक्त एक और रेखा भी मौजूद थी, जो ऊर्धावाधर थी। उसे अभी काल्पनिक समझा जा सकता है, लेकिन वही शक्ति ब्रह्मांड की उतपत्ति में अहम थी। उन्होंने बताया कि काल्पनिक समय कोई कल्पना नहीं है, बल्कि यह हकीकत है। इसे देख नहीं सकते, लेकिन महसूस जरूर कर सकते हैं।
...विज्ञानियों के बीच कड़ियां जुड़ती रहेंगी और विज्ञान के नए अध्याय अनंत काल तक जुड़ते रहेंगे।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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