पृथ्वी मुद्रा

पृथ्वी मुद्रा करने की विधि : पृथ्वी मुद्रा करने के लिए सबसे पहले सुखासन की मुद्रा में बैठ जाये| अपने मन को शांत रखे| तर्जनी अँगुली (second little fingure) को अँगूठे से स्पर्श कर दबाएँ। बाकि बची हुई तीनों अँगुलियों को उपर की और सीधा तान कर रखें। इस मुद्रा की खासियत यह है की आप इसे कभी भी कही भी कर सकते है|
पृथ्वी मुद्रा की विधि और लाभ जानने से पहले हम आपको बता दे की इसे कई नामो से जाना जाता है,

  • अग्नि-शामक मुद्रा
  • पृथ्वी-वर्धक मुद्रा

पृथ्वी मुद्रा के लाभ
शरीर में स्फूर्ति लाये

पृथ्वी मुद्रा शरीर में प्रथ्वी तत्व बढाते है, जिसके चलते शारीरिक दुर्बलता दूर होती है| इससे आलस दूर होता है और शरीर में स्फूर्ति आती है| इससे व्यक्ति तेजस्वी बनता है|

आत्मविश्वास बढ़ाये
जिन लोगो में आत्मविश्वास की कमी होती है उन्हें पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास जरुर करना चाहिए| इससे सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ता है|

वजन बढाने में मददगार
जो लोग दुबले होते है उन्हें इस मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए| यह एक फायदेमंद Mudra for Weight Gain है| इससे पाचन क्रिया भी दुरुस्त होती है और यह विटामिन की कमी को पूरा करता है|

हड्डिया मजबूत बनाये
पृथ्वी तत्व हड्डियों के लिए सबसे मुख्य होते है| इसलिए पृथ्वी मुद्रा करने से सारी मांसपेशिया मजबूत बनती है|

अन्य फायदे इन्हें भी जानिए:-

  1. इस मुद्रा का अभ्यास लगभग हर व्यक्ति कर सकता है|
  2. यह एकाग्रता बढाने में सहायक है|
  3. इससे बाल सफेद होने की समस्या और बालो का झड़ना दूर होता है|
  4. इससे तनाव के कारण होने वाले हाइपरटेंशन से भी राहत मिलती है|
  5. इससे कार्य क्षमता बढती है जिसके चलते आप बिना थके ज्यादा देर तक काम कर सकते है|
  6. इस मुद्रा के अभ्यास से आंतरिक सूक्ष्म तत्वों में महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है जिसके चलते विचारों की संकीर्णता मिटकर उदारता आने लगती है|

उपरोक्त के अतिरिक्त यह कई समस्याए दूर करने में मददगार है जैसे की:-

  1. दुर्बलता
  2. वजन में कमी
  3. ऑस्टियोपोरोसिस
  4. पोलियो
  5. सूखी त्वचा
  6. बालों का झड़ना
  7. आंखों में जलन
  8. पेट की गैस
  9. पेशाब की जलन
  10. गुदा में जलन
  11. हाथों में जलन
  12. पीलिया
  13. बुखार
  14. मुंह और पेट में अल्सर आदि|

लिंग मुद्रा

लिंग मुद्रा प्राण मुद्रा, अपान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा, ज्ञान मुद्रा, शून्य मुद्रा, वायु मुद्रा, लिंग मुद्रा

लिंग मुद्रा -

विधि-
सर्वप्रथम वज्रासन / पद्मासन या सुखासन में बैठ जाइए।
अब  अपने दोनो हाथों की उंगलियों को आपस में फँसाकर सीधे हाथ के अंगूठे को बिल्कुल सीधा रखेंगे यही लिंग मुद्रा कहलाती है  ।
आँखे बंद रखते हुए श्वांस सामान्य बनाएँगे।
अपने मन को अपनी श्वांस गति पर व मुद्रा  पर केंद्रित रखिए।

लाभ- 

    -बलगम व खाँसी में लाभप्रद।
    -शरीर में गर्मी उत्पन्न करती है व मोटापे को कम करती है।
    -श्वसन तंत्र को मजबूत करती है। Read More : लिंग मुद्रा about लिंग मुद्रा

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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