मौन by osho

ओशो – पहले विचार फिर निर्विचार !

पहले विचार फिर निर्विचार

मनुष्य को समझने के लिए सबसे पहला तथ्य यह समझ लेना जरुरी है कि मनुष्य के जीवन में जो चीजें सहयोगी होती हैं , 

एक सीमा पर जाकर वे ही चीजें बाधक हो जाती हैं । अगर कोई 

आदमी सोचे भी , विचार भी करे , तो भी इस महत्वपूर्ण तथ्य का

एकदम से दर्शन नहीं होता है ।

क्योंकि हम सोचते हैं , जो सहायक है , वह कभी बाधक नहीं होगा । लेकिन हर सहायक चीज एक सीमा पर बाधक हो जाती है 
अगर कोई आदमी किसी मकान की सीढ़ियां चढ़ता हो , सीढियां बिना चढे़ वह मकान के ऊपर नहीं पहुंच सकता । Read More : ओशो – पहले विचार फिर निर्विचार ! about ओशो – पहले विचार फिर निर्विचार !

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