आयु 10-12 वर्ष वर्ष के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन

10 से 12 साल की उम्र में या तो बच्चा यौन संबंध के बारे में बात करने से हिचक सकता है या फिर इस बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक हो सकता है। हार्मोन, भावनात्मक, शारीरिक परिवर्तनों के बारे में उसे बताकर यौवन के लिए उसे तैयार करें। जैसे आप मासिक चक्र धर्म के बारे में अपनी बेटी से बात कर सकते हैं। यह उसे पीरियड्स में होने वाली किसी भी असुविधा के लिए तैयार करेगा। इस उम्र में बच्चे काफी कुछ समझने लगते हैं, इसलिए आप उन्हें पॉर्न और इसके नतीजों के बारे में बताएं। उसे बताएं कि सेक्स से जुड़े विषयों की जानकारी वे मैग्जीन्स, इंटरनेट और किताबों से भी ले सकते हैं।

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आयु 6-9 वर्ष वर्ष के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन

इस उम्र तक आते-आते बच्चा लगभग शरीर के सभी अंगों के बारे में जान लेता है। इस वक्त आपको अपने बच्चों को सिखाना चाहिए, कि यौन शोषण से कैसे बचा जाए। उसके नीजि अंगों को उसे खुद साफ करने के लिए प्रेरित करें और ऐसा करने का महत्व भी उसे बताएं।

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आयु 3-5 वर्ष वर्ष के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन

यह वह उम्र होती है, जब बच्चा अपने शरीर को जानना शुरू कर देता है। एक बार जब आपका बच्चा प्री-स्कूल शुरू करता है, तो वह यह जानने के लिए उत्सुक होता है, कि लड़की और लड़के में क्या अंतर होता है। इस दौरान आप अपने बच्चों को इन्हें नीजि अंगों को छूते या इस संबंध में बात करते हुए देखें, तो घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें समझाएं कि ऐसा करना ठीक नहीं है। आप अपने बच्चे को नहाने के समय उसे उसके नीजि अंगों के बारे में बता सकते हैं। अगर बच्चा इस दौरान कोई सवाल करें, तो उसे सही जवाब दें। टालें नहीं।

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आयु 0-2 वर्ष के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन

इस आयु वर्ग में अपने बच्चों को उसके बचपन के दिनों से शरीर के कुछ हिस्सों का नाम सिखाएं। गलत नाम का उपयोग करने के बजाय हमेशा बच्चों को शरीर के अंगों का सही नाम बताएं। दो साल की उम्र से निजी भागों के बारे में बच्चों से बात करना शुरू कर सकते हैं, ताकि वह समय के साथ उनसे परीचित हो सकें। उसे बताएं, कि नीजि अंग को नीजि क्यों कहा जाता है। टॉडलर्स यानि छोटे बच्चों को नग्न होना बहुत पसंद होता है। ऐसे में उन्हें सिखाएं, कि सार्वजनिक रूप से शारीरिक अंगों को दिखाना या छूना अच्छा नहीं माना जाता। Read More : आयु 0-2 वर्ष के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन about आयु 0-2 वर्ष के बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन

बच्चों से उनकी उम्र के अनुसार सेक्स की बात करें

बच्चों से सेक्स के बारे में बात करने की प्रक्रिया शुरू करने में सबसे पहले उन्हें छोटी उम्र से नहलाते समय उनके प्राइवेट पाट्र्स के नाम बताएं। पेनिस, वल्वा, वेजाइना, निपल्स ये ऐसे शब्द हैं, जो हर बच्चे को जानना ही चाहिए। बच्चों से खुलकर बात करें और उन्हें सही जानकारी दें। दो साल की उम्र के बच्चों से आप इस बारे में बात कर सकते हैं। नीचे हम आपको बच्चों की उम्र के अनुसार सेक्स की बात करने के तरीके बता रहे हैं। Read More : बच्चों से उनकी उम्र के अनुसार सेक्स की बात करें about बच्चों से उनकी उम्र के अनुसार सेक्स की बात करें

माता-पिता के लिए यौन शिक्षा

माता-पिता अपने बच्चों के साथ सेक्स के बारे में बात करने में सहज महसूस नहीं करते हैं। सेक्स के बारे में उनके बच्चे के प्रश्न का उत्तर देना उन्हें बहुत अजीब लगता है, हालाँकि, इस विषय को टाला नहीं जाना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चे में शारीरिक परिवर्तनों के बारे में स्वस्थ भावनाओं को विकसित करने के लिए जिम्मेदार हैं। अपने बच्चे को यह बताना महत्वपूर्ण है कि जैसे-जैसे वे परिपक्व होंगे उनके शरीर कैसे बदलेंगा। आपके बच्चे के साथ पेनिस इरेक्शन, यौवन, मासिक धर्म और हस्तमैथुन जैसे विषयों पर चर्चा की जानी चाहिए। Read More : माता-पिता के लिए यौन शिक्षा about माता-पिता के लिए यौन शिक्षा

स्कूलों में यौन शिक्षा

स्कूलों में यौन शिक्षा में प्रजनन, यौन संचारित रोग, यौन अभिविन्यास, एचआईवी / एड्स, संयम, गर्भनिरोधक, गर्भावस्था, गर्भपात और गोद लेने जैसे विषय शामिल होने चाहिए। इसे 7 से 12 वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाया जाता है, हालांकि इनमें से कुछ विषयों को कक्षा 4 के छात्रों को भी पढ़ाया जा सकता है। सेक्स शिक्षा कैसे सिखाई जानी चाहिए, इस पर विभिन्न कानून लागू किए गए हैं। Read More : स्कूलों में यौन शिक्षा about स्कूलों में यौन शिक्षा

सेक्स एजुकेशन की आवश्यकता क्यों है

किशोरावस्था के समय किशोरों को शारीरिक रूप से अपने शरीर में होने वाले परिवर्तनों को जानना चाहिए। यह केवल सही सेक्स एजुकेशन प्रदान करने से संभव हो सकता है।
सिर्फ लड़कियों को ही नहीं बल्कि लड़कों को भी मासिक धर्म के बारे में पता होना चाहिए ताकि दोनों लिंग आसानी से एक लड़की के शरीर में होने वाली प्राकृतिक घटना के रूप में इसे स्वीकार कर सकें। इसके अलावा, उन्हें सैनिटरी पैड और टैम्पोन के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।
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बच्चों में यौन शिक्षा का उद्देश्य

इसका उद्देश्य यौन व्यवहार, अंतरंगता, सेक्स बीमारी की रोकथाम, गर्भावस्था और सुरक्षा से संबंधित जानकारी साझा करके यौन स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्पष्ट तस्वीर देना है। यौन स्वास्थ्य का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी बीमारी से पीड़ित नहीं है, बल्कि यह कामुकता के मामले में शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ होने की स्थिति है। Read More : बच्चों में यौन शिक्षा का उद्देश्य about बच्चों में यौन शिक्षा का उद्देश्य

सही उम्र में सेक्स शिक्षा महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत में अभी भी सेक्स को वर्जित माना जाता है, लेकिन कोई भी इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता है कि यह मानव शरीर के लिए एक शारीरिक आवश्यकता है। इसलिए, सेक्स एजुकेशन की सभी को सही उम्र में जानाकारी होना जरूरी है क्योंकि यह वास्तव में लोगों के जीवन और समाज की मानसिकता को बदल सकती है। सेक्स शिक्षा सेक्स से जुड़ी मान्यताओं की खोज करने में मदद करती है और साथ ही यह एक व्यक्ति को अपने स्वयं के यौन स्वास्थ्य और संबंधों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाती है। Read More : सही उम्र में सेक्स शिक्षा महत्वपूर्ण क्यों है? about सही उम्र में सेक्स शिक्षा महत्वपूर्ण क्यों है?

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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