एलोरा की गुफाएं

एलोरा की गुफाएं

एलोरा भारत के महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले के 29 किलोमीटर (18 मील) उत्तर– पश्चिम में स्थित एक परातात्विक स्थल है। इसका निर्माण कलाचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट राजवंश ने 6 ठी से 9वीं शताब्दी के दौरान कराया था। 34 गुफाएं वास्तव में चारनंद्री पहाड़ियों के लंबवत हिस्से पर बनाई गई हैं। ये गुफाएं हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म को समर्पित हैं। 17 हिन्दू (गुफा संख्या 13–29), 12 बौद्ध (गुफा सं. 1–12)  और 5 जैन (गुफा सं. 30–34) को एक दूसरे के साथ– साथ बनाया गया है। एलोरा की गुफाओँ को 1983 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के उत्तर-पश्चिम में 29 किमी. (18 मील) की दूरी पर स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण छठी से बारहवीं सदी के बीच कलचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों द्वारा कराया गया था| वर्ष 1983 में युनेस्को ने एलोरा की गुफाओं को ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया | ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से संबन्धित हैं|
एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के उत्तर-पश्चिम में 29 किमी. (18 मील) की दूरी पर स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण छठी से बारहवीं सदी के बीच कलचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों द्वारा कराया गया था| वर्ष 1983 में युनेस्को ने एलोरा की गुफाओं को ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया | ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से संबन्धित हैं| यहाँ स्थित कुल 34 गुफाओं में से 17 (गुफा संख्या 13 से लेकर 29 तक) हिन्दू, 12 (गुफा संख्या 1 से लेकर 12 तक) बौद्ध और 5 जैन (गुफा संख्या 30 से लेकर 34 तक) धर्म से संबन्धित हैं| यहाँ की सभी जैन गुफाएँ दिगंबर संप्रदाय से संबन्धित हैं|

 

एलोरा की गुफाओं से संबन्धित दस रोचक तथ्य:

  • स्थानीय स्तर पर एलोरा की गुफाओं को ‘वेरुल लेणी’ के नाम से जाना जाता है|
  • यह सम्‍पूर्ण विश्‍व में चट्टान को काट कर बनाए गए सबसे बड़े मठ-मंदिर परिसरों में से एक है।
  • एलोरा की गुफाएँ भारत के शैल-कृत्य स्थापत्य (Rock-Cut Architecture) का अद्भुत नमूना हैं|
  • एलोरा, विश्‍व में सबसे बड़े एकल एकाश्‍म उत्‍खनन ( Largest Single Monolithic Excavation), विशाल कैलाश (गुफा 16) के लिए विख्‍यात है|
  • अजंता की गुफाओं से भिन्‍न, एलोरा की गुफाओं की विशेषता यह है कि व्यापार मार्ग के अत्यंत निकट स्थित होने के कारण इनकी कभी भी उपेक्षा नहीं हुई।
  • 19वीं सदी के दौरान इन गुफाओं पर इंदौर के होल्करों का नियंत्रण हो गया था, जिन्होनें पूजा के अधिकार के लिए इनकी नीलामी की तथा धार्मिक और प्रवेश शुल्क के लिए इमहें पट्टे पर दे दिया। होल्करों के बाद  इनका नियंत्रण हैदराबाद के निजाम को अंतरित कर दिया गया, जिसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मार्गदर्शन में अपने विभाग के माध्यम से गुफाओं की व्यापक मरम्मत एवं रखरखाव करवाया गया।
  • एक बड़े पठार की कगार में इन गुफाओं का उत्खनन किया गया है, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग 2 किलोमीटर तक फैला हुआ है। कगार अर्ध-वृत्ताकार रूप में होने से, दक्षिण में दाएं वृत्तांश पर बौद्ध धर्म समूह, जबकि उत्तर में बाएं वृत्तांश पर जैन धर्म समूह एवं केंद्र में हिन्दू धर्म समूह की गुफाएँ हैं।
  • यहाँ स्थित सबसे प्रसिद्ध बौद्ध गुफा ‘विश्वकर्मा गुफा’ ('Carpenter's Cave’) (गुफा संख्या 10) है, जोकि एक चैत्यगृह है|
  • दशावतार गुफा (गुफा संख्या 15) में भगवान विष्णु के दस अवतारों को दर्शाया गया है|
  • ये गुफाएं महाराष्ट्र की ज्वालामुखीय बसाल्टी संरचनाओं को काट कर बनाई गई हैं, जिन्हें 'दक्कन ट्रेप’कहा जाता है।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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