ध्यान :"मैं यह नहीं हूं'

ध्यान :"मैं यह नहीं हूं'

मन कचरा है! ऐसा नहीं है कि आपके पास कचरा है और दूसरे के पास नहीं है। मन ही कचरा है। और अगर आप कचरा बाहर भी फेंकते रहें, तो जितना चाहे फेंकते रह सकते हैं, लेकिन यह कभी खतम होने वाला नहीं है। यह खुद ही बढ़ने वाला कचरा है। यह मुर्दा नहीं है, यह सकि"य है। यह बढ़ता रहता है और इसका अपना जीवन है, तो अगर हम इसे काटें तो इसमें नई पत्तियां अंकुरित होने लगती हैं।

 

तो इसे बाहर निकालने का यह मतलब नहीं है कि हम खाली हो जाएंगे। इससे केवल इतना बोध होगा कि यह मन, जिसे हमने अपना होना समझ रखा था, जिससे हमने अब तक तादात्म्य बना रखा था, यह हम नहीं हैं। इस कचरे को बाहर निकालने से हम पृथकता के प्रति सजग होंगे, एक खाई के प्रति, जो हमारे और इसके बीच है। कचरा रहेगा, लेकिन उसके साथ हमारा तादात्म्य नहीं रहेगा, बस। हम अलग हो जाएंगे, हम जानेंगे कि हम अलग हैं।

 

तो हमें सिर्फ एक चीज करनी है--न तो कचरे से लड़ने की कोशिश करें और न उसे बदलने की कोशिश करें--सिर्फ देखें! और एक बात स्मरण रखें: "मैं यह नहीं हूं।' इसे मंत्र बना लें: "मैं यह नहीं हूं।' इसका स्मरण रखें और सजग रहें और देखें कि क्या होता है। तत्क्षण एक बदलाहट होती है। कचरा अपनी जगह रहेगा, लेकिन अब वह हमारा हिस्सा नहीं रह जाता। यह स्मरण ही उसका छूटना हो जाता है।

 

ओशो: ध्यान विज्ञान #16

 

Vote: 
No votes yet
Meditation Category: 

जवाब विशेषज्ञ से लें

Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

  • सेक्स कैसे करें
  • सेक्स टाइम कैसे बढ़ाएं
  • लिंग का साइज कैसे बढ़ाएं
  • लिंग को बड़ा लम्बा और मोटा करने के घरेलू उपाय
  • सेक्स की फीलिंग को कैसे बढ़ाए
  • ओरल सेक्स कैसे करें

इस प्रकार सवालों का जवाब विशेषज्ञ से लें

सलाह शुल्क ₹500 है जिसमें आप हर सप्ताह व्हाट्सएप पर बात करके अपनी समस्या को व्यवस्थित तरीके से हल कर सकते हैं

A/c Name: Pradeep Kumar
A/c No: 5547297104
IFSC : kkbk0005321
Bank: Kotak Mahindra Bank

 
1 Start 2 Complete
Files must be less than 2 MB.
Allowed file types: gif jpg jpeg png bmp tif pict txt rtf pdf doc docx.

New Dhyan Updates

साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है
ध्यान: श्वास को विश्रांत करें
ओशो जिबरिश ध्यान विधि
ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान
ओशो डाइनैमिक ध्‍यान
क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं।
साप्ताहिक ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार
ध्यान -:पूर्णिमा का चाँद
अपनी श्वास का स्मरण रखें
ध्यान : संयम साधना
ओशो – तुम कौन हो ?
ओशो – ध्यान धन है ।
ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान
ओशो स्टाॅप मेडिटेशन
जहाँ मन समाप्त होता है, वहाँ ध्यान शुरू होता है!
क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है?
पुनर्जन्‍म की बात
संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है?
ध्यान एक अवस्था है, जब चेतना अकेली रह जाती है।
साप्ताहिक ध्यान : संयम साधना
समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है?
गौतम बुद्ध ज्ञान को उपलब्ध होने के बाद घर वापस लौटे
शांत प्रयोग सफल नहीं होता
साप्ताहिक ध्यान "मैं यह नहीं हूं'