Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल

Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल

एक सच्ची कहानी

पंडित ओंकार नाथ ठाकुर , शायद कुछ लोग उन्हें जानते भी न हों , हमारे देश के महान शास्त्रीय संगीतज्ञ थे। वह बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के Music Faculty के पहले डीन हुए थे।
एक बार वह इटली के प्रधान मंत्री Benito Mussolini के यहाँ मेहमान हुए। रात के भोजन के समय मुसोलिनी को कुछ मजाक सूझा , उसने ओमकार नाथ ठाकुर से कहा कि “मैंने सुना है कि आप के भारत में जो कृष्ण पैदा हुए थे , उनके हाथ में सदैव बांसुरी होती थी , और जब उनकी बांसुरी बजती थी तो गोपियाँ मंत्रमुग्ध हो कर नाचने लगती थी , यह बात समझ आती है , पर जंगल के सारे जानवर , पक्षियाँ और मोर भी मस्त हो कर नाचने लगते थे , यह बात कुछ हजम नहीं होती। इस बारे में आप का क्या कहना है ? ”
ओमकार नाथ ठाकुर ने कहा कि ” वह तो बहुत बड़े थे , उनकी तो कोई बराबरी ही नहीं है , पर संगीत से क्या हो सकता है ? इसका नमूना मै आप को दिखा सकता हूँ। ”

ठाकुर के संगीत का असर

उस समय ठाकुर के पास कोई भी वाद्य यन्त्र नहीं था , वह क्या करते ? नमूना दिखाने को भी कह चुके थे , उनके सामने कटोरे , चम्मच और कांटे थे , उन्ही से उन्होंने कोई राग बजाना शुरू कर दिया। दो मिनट बाद मुसोलिनी झूमने लगा , उसका सर दीवाल से टकराने लगा और वह घायल होने लगा। वह चिल्ल्या ” कृपया बंद करिये अपना संगीत , मै अपने को संभाल नहीं पा रहा हूँ। ”
ओंकार नाथ ठाकुर ने बजाना बंद कर दिया , मुसोलिनी भी शांत हो गया। ” उसने कहा ” जब इस तरह के वाद्य के प्रभाव का इतना असर है , मै अपने को नहीं संभाल सका तो जरूर कृष्ण के बांसुरी में कुछ जादुई असर रहा होगा। ”

Sounds Magic क्या होता है ?

पहले हम समझते हैं कि साउंड क्या होता है ?
साउंड एक तरह की ऊर्जा है जो वाइब्रेशन के द्वारा पैदा होती है। कोई भी चीज जब Vibrate होती है तो वह एक सेकंड में कितनी बार कम्पित हुई उसी को हम फ्रीक्वेंसी कहते हैं। ध्वनि को एक जगह से दूसरे जगह पहुचने के लिए माध्यम की जरूरत होती है। वैक्यूम में साउंड का मूवमेंट नहीं होता। ध्वनि की गति ३४० मीटर प्रति सेकंड होती है।
अलग अलग तरह के प्राणियों की सुनने की क्षमता अलग अलग होती है , मनुष्य २० हर्ट्ज़ से २० किलो हर्ट्ज़ तक सुन सकता है।

अब हम आते हैं sound magic साउंड मैजिक पर –
अध्यात्म कहता है कि यह पूरा संसार ही ध्वनि से निर्मित है। भगवान शिव का डमरू , ओम का मंत्र सब ध्वनि है। योगी जब समाधि तक पहुँचने वाला होता है तो वह पहले अनहत नाद सुन पता है, और वह जान पाता है की समस्त ब्रह्माण्ड ध्वनि का विस्तार है। हम सब sound magic की दुनिया में हैं।
गाली भी साउंड है जो आप के तन मन में आग लगा दे और मधुर संगीत भी साउंड है जो आपको सुकून की दुनिया में ले जा सकता है। मंत्र भी साउंड है जिसका सही उपयोग मोक्ष प्रदान कर सकता है।
ध्वनि आपको पागल भी कर सकते है। साउंड पोल्लुशन आज चिंता का विषय है क्यों कि उसके कारण लोग अवसाद ग्रस्त और पागल होते जा रहे है।
सार–
गलत तरह की ध्वनियों को अपने मस्तिष्क तक न जाने दें। हो सके तो दिन में एक घंटा साउंड प्रूफ कमरे में ध्यान में बिताएं। इससे दिमाग को ताजगी मिलेगी और आप अच्छा सोच सकेंगे और तरोताजा हो कर ज्यादा बढ़िया काम कर सकेंगे
एक निवेदन –
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