जरूरी था FDC पर बैन

सरकार के दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर इन दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई गई है। बोर्ड ने अपनी सिफारिश में कहा कि इन 328 दवाओं में जो सामग्री या कंपोनेंट हैं, उनकी कोई मेडिसिनल वैल्यू नहीं है। उलटे ये चीजें इंसान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दरअसल, इन दवाओं को बैन करने की कोशिश पहले भी हुई है। केंद्र सरकार ने मार्च 2016 में भी 349 एफडीसी दवाओं पर रोक लगा दी थी, लेकिन दवा कंपनियां इस फैसले के खिलाफ कोर्ट चली गई थीं। दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने मामले की समीक्षा की और केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंपी। सरकार ने इस मसले पर दो कमिटियां बनाईं और उनकी रिपोर्ट के बाद कंपनियों से भी जवाब मांगा कि दो या ज्यादा दवाओं को मिलाने का औचित्य क्या है? दवा कंपनियां इसका संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। दरअसल, इन कॉम्बो दवाओं में कई दवाएं या सामग्री ऐसी हैं, जिन्हें पहले ही विकसित देशों में बैन कर दिया गया है क्योंकि वहां की ड्रग्स रेग्युलेटरी अथॉरिटी जागरूक और सख्त हैं। ज्यादातर मामलों में दवा कंपनियां विकसित देशों में और विकासशील या अविकसित देशों के लिए अलग-अलग दवा तैयार करती हैं। इसकी वजह यही है कि विकासशील या अविकसित देशों में ड्रग्स कंट्रोल के नियम ज्यादा सख्त नहीं होते। वैसे, हमारे देश में पहले भी इस बारे में अच्छी पहल हो चुकी है। देश के ज्यादातर हिस्सों में ये दवाएं धड़ल्ले से बिक रही हैं लेकिन पुडुचेरी ने 2014 में ही इन पर लगाम कस दी थी और बिना परमिशन बनाई गईं सभी FDC के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी।

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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