चंदे का डर - हरिशंकर परसाई
Submitted by vasna on 1 October 2018 - 7:53pmएक छोटी-सी समिति की बैठक बुलाने की योजना चल रही थी। एक सज्जन थे जो समिति के सदस्य थे, पर काम कुछ नहीं, गड़बड़ पैदा करते थे और कोरी वाहवाही चाहते थे। वे लंबा भाषण देते थे।
वे समिति की बैठक में नहीं आवें, ऐसा कुछ लोग करना चाहते थे, पर वे तो बिना बुलाए पहुँचने वाले थे। फिर यहाँ तो उनको निमंत्रण भेजा ही जाता, क्योंकि वे सदस्य थे। Read More : चंदे का डर - हरिशंकर परसाई about चंदे का डर - हरिशंकर परसाई











