अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं

अल्कोहल ड्रिंक्स

 अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं. इसकी वजह है कि अल्कोहल ड्रिंक्स ये दोनों ही आपके शरीर से पानी निकालते हैं और गले में सूखापन लाते हैं. इसीलिए अगर आप अगर अपनी संगीत साधना को लेकर गम्भीर हैं तो कॉफी और अल्कोहल ड्रिंक्स से कोसों दूर रहें.

अगर आप को mouthwash / gargle (गरारा/कुल्ला) करने की सलाह दी गयी है या फिर आप गले को स्वस्थ रखने के लिए करना चाहते हैं तो जहाँ तक संभव हो अल्कोहल वाले या फिर chemical वाले mouthwash का प्रयोग न करें. chemical दवाओं का प्रयोग तो बिलकुल भी न करें. इससे गले की सतह प्रभावित होती है. करना ही है तो पानी गुनगुना कर के, थोड़ा नमक मिला कर फिर कुल्ला/ गरारा करें, इससे गले की सफाई तो होगी ही, गले को कोई नुकसान भी नहीं होगा.

गले की उत्तम प्रकृति को बनाए रखने के लिए जरूरी है की उसे धुएं से बचाया जाये. धूम्रपान करना या फिर सिगरेट / बीड़ी के धुएं के आसपास रहना, दोनों ही गले की आवाज़ बनाने वाली झिल्ली (vocal folds) को खुरदरा बना देता हैं, आवाज़ की रेंज को घटाता है और सबसे जरूरी बात ये कि धूम्रपान से होने वाला नुकसान स्थायी हो जाता है जिसे सुधारना लगभग असम्भव ही होता है.

आम आदमी के गला एक बस सामान्य सा शरीर का हिस्सा है जो उन्हें उनकी पहचान वाली आवाज़ देता है. रोजाना की जिंदगी में आम आदमी का गले पर कोई खास ध्यान नहीं जाता। लेकिन गायकी के कलाकार के लिए गला उनकी कला का सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण साधन है, यन्त्र है. इसीलिए गायक के लिए आवश्यक है कि रोजमर्रा की बातों में, रियाज़ करते समय और संगीत प्रस्तुतियों में गले पर बहुत जोर न पड़े. आम बात चीत में बहुत ज्यादा चिल्लाना और तेज आवाज़ में बात करना धीरे धीरे गले की पेशियों को सुरों की नाजुक महीन उतार चढाव को सँभालने में अक्षम करने लगता है. इसी तरीके से, रियाज़ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि गले पर बहुत जोर न पड़े. जब गाने का अभ्यास करते करते गले में थोड़ा दर्द महसूस हो या फिर तनाव महसूस हो तो गले को आराम दें, रियाज़ से ब्रेक लें और जब तक गला फिर से आराम के साथ दुबारा मेहनत के लिए तैयार न हो, तब तक दुबारा अभ्यास न करें. गले को एक रबरबैंड की तरह समझें. अपनी हद समझें और जरूरत से ज्यादा न खींचे नहीं तो स्थायी रूप से नुक्सान हो सकता है.

गायकों के साथ एक और बात देखी गयी है. गले में थोड़ा खराश होने से वो बार बार गले को जोर से खरखराहट के साथ साफ़ करते रहते हैं. ये अच्छी आदत नहीं है. ऐसा करने से गले में और ज्यादा उत्तेजना पैदा होती है और साथ ही गला प्राकृतिक रूप से और ज्यादा कफ पैदा करता है. ख़राश को साफ़ करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है पूरी तरीके से खाँसना। जब भी गले में ख़राश हो तो बार बार गला साफ करने की बजाय थोड़ा खांस लें. अब बात तो ये छोटी सी ही है लेकिन जो संगीत साधना में महारथ रखते हैं, वो जानते हैं कि ये कितनी महत्वपूर्ण हैं.

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Dr. Popat Sonawane - Orthopaedic Surgeon, ghodnadi-shirur

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